दीदी ने दिलवाई सहेली की चूत 4

Didi aakhir mujhse chud gayi:- हे दोस्तो, आपके लिए इस sex story का एक और कामुक पार्ट लेकर आया हूँ (yeh ek hindi sex story hai)। तो आप सब कहानी पढ़ें और मुझे मेल करना न भूलें। अब आगे पढ़िए और मज़े लीजिए — sex story hindi me आपको पूरा मज़ा देगी।

Pichla part ==> दीदी ने दिलवाई सहेली की चूत 3

Didi aakhir mujhse chud gayi

दीदी की बड़ी-बड़ी चुचियाँ आगे-पीछे झूल रही थीं। मैंने दीदी की चुचियों को पकड़ लिया और उन्हें बड़ी बेदर्दी से मसलने लगा। दीदी के मुँह से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी।

दीदी – भाई आराम से कर। दर्द हो रहा है।

मगर मैं वैसे ही दीदी की चुचियाँ मसलता रहा। दीदी ने मेरा हाथ अपनी चुचियों से हटा दिया और मेरा लुंड बाहर निकाल दिया।

दीदी – भाई तू लेट जा। मेरी टाँगों में दर्द हो रहा है। मैं तेरे ऊपर बैठ जाती हूँ।

मैं दीवान पर लेट गया। दीदी ने मेरा लुंड पकड़ के अपनी चूत में डाल लिया और मेरे ऊपर बैठ गईं। दीदी अपनी कमर तेज़-तेज़ चलाने लगीं और मेरे सीने पर काटने लगीं।

दीदी मेरे निप्पल को काट रही थीं। मेरे सीने को चाट रही थीं। दीदी जानती थीं कि एक लड़के का कैसे पानी निकाला जाता है। मुझे खुद को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।

मैं – दीदी मेरा होने वाला है। अब ऊपर से हट जाओ।

दीदी – बस थोड़ी देर कंट्रोल कर ले। फिर निकाल देना।

दीदी मेरे ऊपर से हट गईं और नीचे लेट गईं। दीदी ने मेरा सिर पकड़ के अपनी चूत पर लगा दिया। मैं दीदी की पानी से भरी चूत चाटने लगा। थोड़ी देर चूत चाटने के बाद,

दीदी – अब तो नहीं निकल रहा है तेरा।

मैं – नहीं दीदी, आपकी चूत चाटने से थोड़ा कंट्रोल हो गया है।

दीदी ने मेरा लुंड पकड़ के अपनी चूत में डाल लिया और मुझे अपने ऊपर झुका के किस करने लगीं। दीदी अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थीं।

और मैं तेज़-तेज़ धक्के लगा रहा था। जैसे ही मेरा पानी निकलने वाला था, दीदी ने मेरा लुंड निकाल दिया और उसे मुठ मारने लगीं। मेरे पानी की धार दीदी की चुचियों तक गई।

और मैं उनके साइड में लेट गया। हम दोनों की साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं। मेरा और दीदी का पानी निकल चुका था। मैं दीदी को किस करने लगा।

दीदी – आज बहुत दिनों के बाद इतना अच्छा लग रहा है। तेरी चुदाई ने तो पूरा बदन हल्का-हल्का कर दिया। तभी मैं कहूँ कि प्रिया सिर शोभा तेरी तारीफ़ क्यों करती है।

मैं – दीदी आप भी कहाँ कम हो। जितना अच्छा लुंड आप चूसती हो, उतना अच्छा आज तक किसी ने नहीं चूसा है। आप सच में चुदाई की खिलाड़ी हो।

दीदी – तू भी कहाँ कम है भाई। अगर मुझे पहले पता होता कि तू इतनी अच्छी चुदाई करता है, तो मैं तुझसे शादी से पहले चुदवा लेती।

मैं – दीदी जब जो होना है, वो तभी होता है। शायद हमारा मिलना अभी ही लिखा था। मैं भी शुरू से आपका दीवाना हूँ। दीदी मुझे आपकी गाँड़ मारनी है।

दीदी – भाई तेरा जो मन करे कर लेना। मेरी गाँड़ मारनी है या चूत जो भी, बस आज नहीं — मैंने बहुत टाइम से गाँड़ में नहीं लिया है। और अगर तेरा लुंड अभी लिया, तो तेरा जीजा मेरी आवाज़ से जाग जाएगा।

मैं – ठीक है दीदी, जैसा आप कहो।

दीदी – वैसे तेरा लुंड तो फिर से खड़ा हो गया। चल आ जा मेरे ऊपर और अपनी बहन की चूत को दोबारा ठंडा कर दे।

दीदी और मैं फिर से चुदाई में लग गए और इस बार का राउंड और ज़्यादा लंबा चला। दीदी रात के 1 बजे नीचे चली गईं और मैं भी सो गया।

सुबह का ये हिस्सा is adult hindi story ka sabse garam mod tha — सुबह 8:30 बजे दीदी ने मुझे जगाया। दीदी नहा चुकी थीं। उन्होंने लेगिंग्स और टी-शर्ट पहनी हुई थी।

मैंने दीदी का हाथ पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। दीदी की बड़ी-बड़ी चुचियाँ टी-शर्ट में अच्छी लग रही थीं।

मैंने दीदी की टी-शर्ट उठा दी। दीदी ने नीले रंग की ब्रा पहनी थी। मैं ब्रा के ऊपर से ही उनकी चुचियाँ दबाने लगा।

दीदी – भाई थोड़ा सब्र कर। तेरे जीजा जी नहाने गए हुए हैं। जैसे ही वो चले जाएँगे, फिर जो मर्ज़ी कर लेना।

मैं – दीदी आपकी चुचियाँ देखकर कंट्रोल नहीं होता है। देखो मेरा लुंड कैसे खड़ा पड़ा है।

दीदी ने लोअर में हाथ डालके मेरा लुंड पकड़ लिया।

दीदी – भाई तेरा लुंड देखकर तो मेरे मुँह में भी पानी आ रहा है। मगर बस थोड़ा सा इंतज़ार कर ले।

मैं – दीदी बस थोड़ी देर के लिए इसे अपनी चूत की गर्मी दे दो।

दीदी – तू मानेगा नहीं, चल ठीक है।

दीदी सीढ़ियों के पास खड़ी हो गईं और उन्होंने जल्दी से अपनी लेगिंग नीचे कर दी और मेरे लुंड पर थूक दिया। दीदी ने अपने हाथ से मेरे लुंड पर थूक मल दिया और थोड़ा थूक अपनी चूत पर भी लगा लिया।

फिर दीदी सीढ़ियों के पास झुके खड़ी हो गईं। दीदी ने मेरा लुंड पकड़ा और उसे अपनी चूत में डाल लिया। दीदी की चूत में लुंड जाते ही मेरे लुंड को उनकी चूत की गर्मी मिलने लगी।

मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिए। मगर 2 ही धक्के मारे थे, जिससे थप-थप की आवाज़ निकल रही थी।

दीदी – भाई थोड़ा आराम से कर और आवाज़ मत कर, वरना तेरे जीजा जी सुन लेंगे।

मैं हल्के-हल्के धक्के लगाता रहा। सुबह-सुबह शुरुआत ही जब चूत से हो, तो सारा दिन भी बहुत अच्छा जाता है। मैं धक्के लगाता रहा।

दीदी भी मज़ा ले रही थीं। उनकी चूत गीली हो गई थी। मुझे सिर्फ़ 2 ही मिनट हुए थे, तभी नीचे से जीजा जी ने आवाज़ दे दी। मैंने अपना लुंड निकाल लिया।

दीदी अपनी लेगिंग ऊपर करने लगीं, मगर तभी मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। मैंने देखा दीदी की चूत एकदम साफ़ थी — उसपे छोटे-छोटे बाल भी गायब थे।

मैं – दीदी रात को तो आपकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे, मगर अब बिल्कुल चिकनी चूत है। आपने बाल कब साफ़ किए?

दीदी – भाई जब सुबह नहा रही थी, तभी बाल साफ़ किए थे। अब तो मेरी चूत को भी तेरा लुंड मिलता ही रहेगा, तो थोड़ी मेहनत तो मुझे भी करनी पड़ेगी।

मैं नीचे बैठ गया और दीदी की चूत पर मुँह लगा दिया। दीदी की चूत एकदम चिकनी और फूली हुई दिख रही थी। मैं अपनी जीभ उसपे फिरा रहा था, तभी जीजा जी की आवाज़ फिर आ गई।

दीदी ने अपनी लेगिंग्स ऊपर कर लीं और वो नीचे चली गईं। 2 मिनट बाद मैं भी नीचे चला गया।

जीजा जी मुझे देखते ही बोले –

जीजा जी – और रॉबिन, हो गई नींद पूरी? कल तो मैं भी जल्दी ही सो गया था।

मैं – अरे जीजा जी, आप तो कल ठीक से खाना भी नहीं खा पाए। इतना ज़्यादा नशा हो गया था।

जीजा जी – अरे बस एक ही तो दिन मिलता है, वरना तुम्हारी दीदी पीने कहाँ देती है। मगर मैं भी चुप-चुप के बाहर पी आता हूँ।

मैं – जीजा जी कल तो आप सो गए और आपके हिस्से का लेग पीस मैंने खा लिया।

दीदी मेरी तरफ देखकर हल्के से स्माइल कर रही थीं। वो जानती थीं मैं किस लेग पीस की बात कर रहा हूँ।

जीजा जी – अरे रॉबिन कोई बात नहीं, मैंने खाया तूने खाया एक ही बात है।

मैं फ्रेश होने चला गया और जीजा जी नाश्ता करने लगे। जब मैं फ्रेश हो गया, तब जीजा जी जाने लगे। गेट के पास जाते हुए उन्होंने दीदी के लिप्स पर किस किया और वो चले गए।

दीदी ने जैसे ही गेट बंद किया, मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। दीदी जल्दी से मुड़ीं और मेरे गले में हाथ डालके ऊपर उछल के मेरी कमर में पैर बाँध लिए।

मैं और दीदी एक-दूसरे के होठों को चूसने लगे। मैं दीदी को अंदर ले आया (ab shuru hota hai is kamuk kahani ka asli khel)।

दीदी – भाई मुझे बेडरूम में ले चल। आज मैं भी प्रिया की तरह तेरे साथ एन्जॉय करना चाहती हूँ।

मैं दीदी को उनके बेडरूम में ले आया। दीदी नीचे उतर गईं और जल्दी से मेरी टी-शर्ट और लोअर उतार दिया। मैंने भी दीदी की टी-शर्ट और लेगिंग्स निकाल दी।

अब दीदी सिर्फ़ नीली ब्रा-पैंटी में थीं। दीदी की पैंटी जाली वाली V-शेप में थी। मैं दीदी की ब्रा-पैंटी उतारने लगा, तो उन्होंने मुझे रोक दिया।

दीदी बेड पर लेट गईं और अपनी पैंटी साइड कर दी। दीदी की चूत मेरे सामने थी।

दीदी – देख क्या रहा है भाई? अपनी बहन की चूत को चाट के ठंडा कर दे।

मैंने अपना मुँह चूत पर लगा दिया और दीदी मेरा सिर अपनी चूत पर दबाने लगीं।

दीदी – तू क्या कह रहा था मेरे पति से कि तूने उनके हिस्से का लेग पीस खा लिया? और रात में जो तूने मेरी चूत की हालत कर दी थी, वो भी बता देता — कि कैसे जब वो सो रहे थे, तब तू उनकी बीवी को चोद रहा था।

मैं – अब इसमें मेरी क्या गलती है? आपका पति ही इतनी हसीन बीवी होते हुए भी सो रहा था, और मैं उसका फ़ायदा न उठाऊँ तो काहे का मर्द हुआ।

दीदी – सही कहा भाई, जो सोता है वो खोता है। जानता है आज जो ब्रा-पैंटी मैंने पहनी है, ये तेरे जीजा जी लाए थे। मगर सबसे पहले तू मुझे इसमें देख रहा है।

मैं – दीदी सिर्फ़ देखूँगा नहीं, आपको चोदूँगा भी। और आज तो आपकी बंद पड़ी गाँड़ को भी खोल दूँगा।

दीदी – मैं जानती हूँ भाई, इसीलिए तो सुबह ही गाँड़ में तेल लगाया था। मैं जानती थी आज मेरे भाई का मोटा लुंड मेरी गाँड़ ज़रूर फाड़ देगा। आज तो पूरा दिन हमारे पास है।

मैंने अपना लुंड डाल दिया और दीदी की चुदाई करने लगा। दीदी अब बिना रोक-टोक के आवाज़ निकाल रही थीं।

दीदी – आह्ह मम्म ओह्ह… और ज़ोर से कर भाई। निकाल दे मेरी चूत की सारी गर्मी। मेरे पति से तो अब उम्मीद नहीं है। तू मेरी चूत को ठंडा कर दे।

मैं दीदी की चुदाई करता रहा और उनका पानी निकल गया। मेरा लुंड अभी खड़ा था। डॉगी स्टाइल में दीदी झुक गईं।

दीदी – भाई आज अपनी इच्छा भी पूरी कर ले।

(yeh meri is chudai story ka sabse bold mod tha) — दीदी की गाँड़ का छेद मुझे और ज़्यादा जोश दिला रहा था। मैंने ढेर सारा थूक अपने लुंड पर लगाया और उसे दीदी की गाँड़ में डालने लगा। मैं बहुत हल्के-हल्के अपना लुंड डाल रहा था।

जैसे ही मेरा सुपाड़ा दीदी की गाँड़ में गया, उनके मुँह से आह्ह की आवाज़ निकली और उन्होंने मुझे रोक दिया। मैं अपने सुपाड़े को ही अंदर-बाहर करने लगा।

दीदी की गाँड़ कुछ ही देर में मेरे सुपाड़े को आराम से अंदर-बाहर होने दे रही थी। मैंने हल्के-हल्के अपना बचा हुआ लुंड भी अंदर डाल दिया, मगर इस बार दीदी ने मुझे नहीं रोका।

शुरू में हल्के-हल्के धक्के लगाता रहा, फिर मेरे धक्के तेज़ होते चले गए। दीदी की गाँड़ का छेद काफ़ी टाइट था और मेरे लुंड पर पूरी पकड़ बनाए हुए था।

मैं बीच-बीच में अपना लुंड निकाल लेता, तो दीदी की गाँड़ का छेद बिल्कुल खुल जाता था। मगर दीदी की पॉटी मेरे लुंड पर लगी हुई थी।

मगर मुझे तो इस टाइम दीदी की कसी हुई गाँड़ का मज़ा मिल रहा था। दीदी की कसी हुई गाँड़ के आगे टिकना मुश्किल हो रहा था और जल्दी मैंने भी तेज़ धक्कों के साथ अपना पानी दीदी की गाँड़ में डाल दिया।

मैं दीदी के बगल में लेट गया और मेरे लुंड पर अभी भी दीदी की पॉटी लगी हुई थी। दीदी ने मुझे लुंड धोने के लिए बोला। मैं लुंड धोकर आ गया।

और दीदी मेरे ऊपर आ गईं। मैं और दीदी एक-दूसरे को किस कर रहे थे और फिर हमने एक बार और चुदाई की। फिर जब मेरे भांजे के आने का टाइम हुआ, तब मैं वहाँ से निकल गया।

दीदी और मेरा चक्कर अभी भी चल रहा है। प्रिया दीदी भी हफ़्ते में आती रहती हैं। मगर मेरा लुंड मेरी दीदी ज़्यादा निचोड़ देती हैं।

तो कैसी लगी आपको meri yeh hindi sex kahani? आप मुझे मेल करना न भूलें। मेरी ईमेल आईडी नीचे दी गई है।

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