माँ बनी क्लाससमेट 1

Maa beta ki sexy hot sex story:- मैं राहुल खन्ना हूँ। ये मेरी नई कहानी है, छोटी और शॉर्ट स्टोरी जो 20-30 अपडेट्स में पूरी होगी। मैं एक पुरानी और अपनी पसंदीदा कहानी अपडेट कर रहा हूँ जो बंद हो चुकी थी, अब अपने तरीके से लिख रहा हूँ। उम्मीद है आपको मज़ा आएगा।

किरदार
मुख्य हीरोइन: त्रिप्ती खन्ना (उम्र 42)
मैं राहुल खन्ना – त्रिप्ती का बेटा (उम्र 21)
राहुल का बेस्टफ्रेंड: विक्की (उम्र 21)
राहुल और विक्की का राइवल: अभय (उम्र 21)

Maa beta ki sexy hot hindi sex story

संजीव खन्ना, एक बहुत ही बड़े बिज़नेसमैन, अपने लक्ज़रीयस हॉल के सोफ़े पर गहरी सोच में डूबा बैठा था। उसका कारोबार दिन-ब-दिन बढ़ रहा था, दुनिया भर की तरक्की उसके क़दमों में थी, पर आज उसके ज़ेहन पर मोहब्बत का एक पुराना बोझ था। उसकी उम्र 48 साल थी, लेकिन उसकी आँखों में अपने परिवार के लिए बेशुमार प्यार झलकता था। वो अपने बेटे और बीवी को अपनी ज़िंदगी से भी ज़्यादा अज़ीज़ रखता था।

तभी उसके बेटे राहुल खन्ना ने हॉल में क़दम रखा। राहुल, जो 21 साल का था और बीबीए कर रहा था, उसके चेहरे पर जवानी और लापरवाही का नूर था। उसने अपने पिता को उदास देखा तो कुछ देर वहीं रुक गया।

उसके तुरंत बाद ही त्रिप्ती खन्ना भी वहाँ आईं। त्रिप्ती। ख़ूबसूरती का एक जीवंत नमूना। 42 साल की होने के बावजूद वो सिर्फ़ 21 की लड़की लगती थीं। उनका फ़िगर 38-28-38, जिसे देखकर किसी भी जवान लड़के का दिल मचल जाए। उनका हुस्न वक़्त के हर हिसाब को झुठला रहा था।

त्रिप्ती ने नरम लहजे में संजीव से पूछा—

त्रिप्ती: क्या हुआ? आप इतने टेंशन में क्यों हो? सब ठीक है ना बिज़नेस में?

संजीव ने लंबी साँस ली और धीमे से बोला—

संजीव: त्रिप्ती, बात बिज़नेस की नहीं है। बात हमारी है। तुम्हारी पढ़ाई अधूरी रह गई। सिर्फ़ मेरे कारण। वो बीबीए डिग्री जो तुम अधूरी छोड़ आई थीं, उसका बोझ मेरे दिल पर आज तक है।

त्रिप्ती मुस्कुराईं, संजीव का हाथ अपने हाथों में लिया और स्नेह से बोलीं—

त्रिप्ती: वो हमारा बीता हुआ कल है, संजीव। लव मैरिज के जज़्बात में पढ़ाई छूट गई, तो कोई बात नहीं। हम ख़ुश हैं, ये काफ़ी है।

संजीव: नहीं। मैं चाहता हूँ तुम अपने सपने पूरे करो। तुम अपनी पढ़ाई पूरी करो।

मै, जो उनका बातचीत सुन रहा था, हैरत से बोल पड़ा—

मै: क्या? इस उम्र में कॉलेज जाएगी मम्मी? सीरियसली?

त्रिप्ती को भी एक पल के लिए झिझक हुई।

त्रिप्ती: हाँ राहुल सही कह रहा है। अब मैं कॉलेज जाऊँगी? सब लोग क्या सोचेंगे?

संजीव अपनी जगह से उठा और त्रिप्ती के सामने खड़ा हो गया। उसने अपने हाथ त्रिप्ती के कंधों पर रखे और गर्व से बोला—

संजीव: तुम अपने आप को देखो। अगर तुम जींस और टॉप पहन लो तो अभी भी 21 साल की लगोगी। तुम्हारा हुस्न आज भी वही है। मेरे लिए ये ज़रूरी है। लेकिन वेकिन कुछ नहीं। तुम अपने सपने पूरे करो।

त्रिप्ती की आँखों में एक नई चमक आई। आख़िरकार इतने सालों बाद उनके अधूरे ख़्वाब को पूरा करने का मौका मिल रहा था।

त्रिप्ती: ठीक है, संजीव। लेकिन मुझे एडमिशन कौन देगा?

संजीव ने बिना देरी किए फ़ैसला सुना दिया—

संजीव: वो सब मैं सँभाल लूँगा। तुम्हारा एडमिशन मैं राहुल के कॉलेज में करा दूँगा।

मै चौंक गया—

मै: मेरे कॉलेज में? ओह गॉड! मुझे कोई प्रॉब्लम तो नहीं है, लेकिन… पापा, आप मम्मी को हॉस्टल में रखना। प्लीज़। ताकि कोई ये न जान पाए कि ये मेरी मम्मी है। कॉलेज में सोशली हम दोनों के लिए प्रॉब्लम्स होंगी।

त्रिप्ती ने भी एक पल में हालातों की नज़ाकत समझी।

त्रिप्ती: हाँ, राहुल सही कह रहा है। लोगों को पता चल गया तो बड़ी मुसीबत होगी।

संजीव ने अपने बेटे और बीवी की मजबूरी समझी।

संजीव: ठीक है। ये सीक्रेट रहेगा। दोनों को अलग-अलग हॉस्टल मिल जाएगा।

अगला दिन एक नया सूरज लेकर आया। राहुल हॉस्टल जाने के लिए तैयार हो गया। उसका सामान पहले ही भेज दिया गया था। तभी त्रिप्ती भी नीचे हॉल में आईं, उन्होंने सामान ले रखा था, पर उनके चेहरे पर नए सफ़र की उत्सुकता थी। आज वो सालों बाद अपनी पहचान वापस पाने जा रही थीं।

संजीव: राहुल, तुम बाइक ले जा रहे हो कि कार?

मै: मैं अपनी बाइक ही ले जा रहा हूँ।

संजीव: त्रिप्ती, तुम कार ले जाओ।

और फिर माँ और बेटा, एक ही कॉलेज के दो अलग राही बनकर, अपनी-अपनी सवारी से हॉस्टल की तरफ़ रवाना हो गए। गर्ल्स हॉस्टल और बॉयज़ हॉस्टल आमने-सामने थे, सिर्फ़ एक दीवार का फ़ासला था, लेकिन ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा फ़ासला अभी भी बाक़ी था।

त्रिप्ती को जो रूम मिला था, उसमें एक लड़की पहले से मौजूद थी—कृति।

त्रिप्ती ने एक हल्की मुस्कान के साथ अपना परिचय दिया—

त्रिप्ती: हाई। माइसेल्फ़ त्रिप्ती।

कृति ने जवाबी मुस्कान दी।

कृति: मैं कृति। विच ईयर?

त्रिप्ती: बीबीए फ़ाइनल ईयर।

कृति: क्या! मैं भी फ़ाइनल ईयर में ही हूँ! ये तो कमाल हो गया। अच्छा हुआ मुझे मेरी क्लासमेट ही रूम पार्टनर मिली।

त्रिप्ती ने एक चैन की साँस ली।

त्रिप्ती: थैंक यू, कृति। ऐसा लग रहा है जैसे नए सिरे से शुरुआत कर रही हूँ। थोड़ा डर भी लग रहा है।

कृति ने भरोसा दिलाया।

कृति: अब तुम टेंशन मत लो। मैं तुम्हारी सबसे दोस्ती करा दूँगी। कॉलेज का माहौल समझने में हेल्प करूँगी।

त्रिप्ती ने दिल से थैंक यू कहा, उनके चेहरे पर एक चिंता की झुर्री पल भर में ग़ायब हो गई।

कृति ने तुरंत ही अपनी सारी फ्रेंड्स को अपने रूम में बुला लिया। त्रिप्ती का इंट्रोडक्शन करवाया। त्रिप्ती की ख़ूबसूरती और बेहद मेंटेन फ़िगर को देखकर सब लड़कियाँ एक पल के लिए हैरान रह गईं। उन्हें यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये लेडी उनकी क्लास में पढ़ेंगी।

महफ़िल में हँसी-मज़ाक़ चल रहा था, तभी शीतल नाम की लड़की, जो कृति की काफ़ी क्लोज़ फ्रेंड थी, वो बड़े ग़ुस्से में रूम में घुसी। उसका चेहरा लाल था और आँखों में आँसू थे।

कृति ने फ़िक्र से पूछा—

कृति: क्या हुआ, शीतल? तू इतने ग़ुस्से में क्यों है? कोई प्रॉब्लम?

शीतल ने अपनी साँस को क़ाबू करते हुए दर्द में बताया—

शीतल: यार, वो चंडाल चौकड़ी ने परेशान कर रखा है। बड़े गंदे-गंदे कमेंट मार रहे थे मेरे ऊपर। आज तो हद ही कर दी।

त्रिप्ती और सब लड़कियाँ चिंता में डूब गईं।

कृति: क्या हद कर दी?

शीतल अपने होठों को दबा गई।

शीतल: उन्होंने… उन्होंने हद ही कर दी यार। उस विक्की ने, उस घटिया लड़के ने मुझे पकड़ के मेरे होठों पे ज़बरदस्ती किस कर लिया। और बोला कि मुझे हॉस्टल में ले जाकर सारी रात चुदाई करेगा। मैं किसी तरह वहाँ से भाग आई।

पूरे रूम में सन्नाटा छा गया। हर लड़की के चेहरे पर नफ़रत और डर था।

कृति ने ग़ुस्से में अपने दाँत पीस लिए।

कृति: चलो, प्रिंसिपल को कंप्लेंट करते हैं! अभी!

शीतल: नहीं, यार! कोई फ़ायदा नहीं। वो लोग फिर से कोई बहाना कर लेंगे। ऊपर से मेरी बदनामी होगी पूरे कॉलेज में।

कृति ने एक पल सोचा, और फिर फ़ोन निकाला।

कृति: ठीक है, अगर ये फ़ॉर्मल तरीक़ा काम नहीं करेगा, तो उसका एक ही इलाज है—स्ट्रीट जस्टिस।

उसने तुरंत ही अपने बॉयफ़्रेंड प्रणय को फ़ोन किया और सारी बात सनसनी में बता दी।

उधर बॉयज़ हॉस्टल में, प्रणय और उसकी गैंग के दोस्त—जिनमें अभय भी शामिल था—कैरम खेल रहे थे। प्रणय ने फ़ोन रखा और एकदम से ग़ुस्से में आग-बबूला हो गया।

प्रणय: अभय! सुना तूने? शीतल के साथ विक्की और उसकी घटिया गैंग ने बदतमीज़ी की है! ज़बरदस्ती किस किया!

अभय, जो एकदम शांत दिखता था, उसका चेहरा पलट गया। उसकी आँखों में ग़ुस्सा और बदला लेने की आग थी।

अभय: चलो! सालों के हाथ-पाँव तोड़ते हैं! आज उनको सबक़ सिखाना पड़ेगा कि लड़कियों की इज़्ज़त कैसे करते हैं!

अभय और उसकी पूरी टीम विक्की और उसकी गैंग के पास जा पहुँची। विक्की अपने दोस्तों के साथ हँस रहा था, शायद शीतल को परेशान करने की जीत मना रहा था।

अभय ने बिना एक पल गँवाए, विक्की का कॉलर पकड़ लिया। उसकी मुट्ठी कस गई थी।

अभय: साले! तेरी हिम्मत कैसे हुई शीतल को किस करने की? बोल!

विक्की अपनी ईगो में चूर था। उसने ज़ोर से अपने कॉलर को छुड़ाया।

विक्की: अबे! तू किस की बात कर रहा है? मैं तो सोच रहा था कि शीतल की आज सारी रात मेरे रूम में चुदाई कर लूँ। लेकिन साली भाग गई!

ये सुनते ही अभय की आँखों में खून उतर आया। उसने एक ज़ोर का हाथ विक्की के चेहरे पर उठाया। थप्पड़ की गूँज से पूरा कॉरिडोर गूँज उठा।

और फिर एक ज़ोरदार मार-पीट शुरू हो गई। दोनों गैंग्स जंगली जानवर की तरह एक-दूसरे पर टूट पड़े। लातों, घूँसों और गालियों का शोर था। सिक्योरिटी को आख़िर में बीच-बचाव करना पड़ा और दोनों ग्रुप्स को उनके रूम्स में बंद कर दिया गया। कॉलेज में इन दो ग्रुप्स के झगड़े अब आम बात हो गई थी।

विक्की, हारा हुआ और चोट खाए अपने रूम में बैठा था। उसका चेहरा सूजा हुआ था। राहुल, जो उससे अलग रूम में था लेकिन उसका जिगरी दोस्त था, उससे मिलने आया।

विक्की ने ग़ुस्से में अपने हाथ ज़मीन पर मारे।

विक्की: इन सालों हिजड़ों के ग्रुप की सारी लड़कियों को चोद दूँगा! एक-एक को देखता हूँ!

राहुल ने शांति से उसका ग़ुस्सा ठंडा करने की कोशिश की—

मै: जाने देना भाई। ग़ुस्सा छोड़ अभी। दिमाग़ ठंडा कर।

विक्की का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था।

विक्की: नहीं! तू देखना, राहुल! मैं कसम खाता हूँ। इन सालों के ग्रुप की सबसे ख़ूबसूरत लड़की को पटा के चोदूँगा और सालों को जलाऊँगा! उनकी इज़्ज़त को तार-तार करूँगा पब्लिकली!

राहुल, अपने दोस्त की बातें सुनकर, अपने अंदर के ईगो और शरारत को रोक नहीं पाया। उसको ये एक चैलेंज लगा।

मै: अगर तूने नहीं पटाई, तो मैं पटा के जलाऊँगा सालों की!

राहुल ने मुस्कुराते हुए ज़िद की। अनजाने में उसने अपनी ही माँ को एक गंदी बाज़ी का शिकार बना दिया था।

विक्की ख़ुश हो गया। उसकी आँखों में शैतानी चमक थी। उसने हँसते हुए राहुल को गले लगा लिया।

विक्की: तू ही मेरा भाई है! सही बात!

राहुल ने अपने गले से दोस्त को अलग किया।

मै: चल, बीयर पीते हैं। आज का दिन भूलना है।

और दोनों दोस्त इस घटिया सोच और नई चुनौती को अपने दिल में दबाए हुए, हॉस्टल की रात में डूब गए। उन्हें ये ख़बर नहीं थी कि जिस निशाने की वो बात कर रहे थे, वो निशाना उनके पास ही उनकी क्लास में आज रात से शुरुआत कर रहा है।

सुबह का वक़्त था। हॉस्टल के रूम में कमाल की चहल-पहल थी। आज त्रिप्ती की ज़िंदगी का पहला कॉलेज डे था। कृति और त्रिप्ती तैयार हो रही थीं, एक नया सूरज उनका इंतज़ार कर रहा था।

त्रिप्ती धीरे-धीरे तैयार हो रही थीं, हर अंग कमाल का नज़र आ रहा था। 42 साल की होने के बावजूद उनकी स्किन में एक अनोखी चमक थी। उनका फ़िगर 38-28-38 बेहद कसाव में था।

कृति इंपेशंस में बोल पड़ी—

कृति: चल ना त्रिप्ती! कितना टाइम लगाएगी? पूरा कॉलेज कैंपस तीन किलोमीटर लंबा है, देख कहीं लेट न हो जाएँ!

त्रिप्ती मुस्कुराईं—

त्रिप्ती: बस थोड़ी देर रुक जा, कृति। थोड़ा नर्वस फ़ील हो रहा है।

तभी शीतल रूम में आई। उसकी आँखों में आज भी पिछले दिन के झगड़े का ग़ुस्सा था।

शीतल: चलो कृति! हमें जल्दी जाना है। वो अस्ताना मैम से मिलना है ज़रूरी काम से।

कृति: अरे हाँ यार! मैं तो भूल ही गई थी। त्रिप्ती, तुम पीछे से आ जाना। मैं तुम्हें कॉलेज बिल्डिंग में मिलूँगी।

त्रिप्ती: ठीक है।

कृति और शीतल अपनी स्कूटी से कैंपस की लंबी रोड पर निकल गए।

त्रिप्ती ने कुछ देर बाद अपना मेकअप चेक किया और तैयार हो गईं। उन्होंने एक स्टनिंग ग्रे कलर का चमकीला गाउन पहना था, जो उनके फ़िगर को कसके पकड़े हुए था। आँखों पर लार्ज गॉगल्स लगाए और वो अपनी कार से कॉलेज की तरफ़ निकल पड़ीं।

कॉलेज कैंपस का माहौल एकदम बेहतरीन था। बड़ी हॉस्टल बिल्डिंग के बाद घने पेड़ों का इलाक़ा था, फिर बड़ी कॉलेज बिल्डिंग, पीछे शानदार गार्डन और बग़ल में लाइब्रेरी।

त्रिप्ती ने अपनी इंपोर्टेड कार पार्किंग एरिया में पार्क की। वहीं अभय और प्रणय बैठे थे, सुबह की धूप में गपशप कर रहे थे।

जैसे ही त्रिप्ती कार से उतरीं, एक पल के लिए वक़्त रुक गया। अभय और प्रणय दोनों की नज़रें त्रिप्ती पर जम गई थीं। वो गॉगल्स में बेहद हॉट और एकदम प्रोफ़ेशनल लग रही थीं—एक अप्सरा जो ज़मीन पर उतर आई थी।

अभय की आँखें चौड़ी हो गईं। उसके मुँह से सराहट में निकला—

अभय: वाओ! क्या माल है!

प्रणय ने अपना सिर हिलाया, अपनी बात को तस्दीक़ करते हुए।

प्रणय: हाँ भाई! ऐसा माल तो एक भी नहीं है पूरे कॉलेज में। ये तो नेक्स्ट लेवल है!

त्रिप्ती कार को लॉक करके आगे बढ़ने लगीं। उन्होंने हाई हील्स पहन रखी थीं, और जिस तरह वो चलती थीं, उनकी गाँड मस्त थिरक रही थी। हर क़दम एक रिदम में था, जो दोनों लड़कों के दिमाग़ में एक आग लगा रहा था।

अभय और प्रणय की नज़र त्रिप्ती की गाँड से हट ही नहीं रही थी। दोनों के पैंट में तुरंत ही टेंट बन गए थे। ये जवानी का गरम जोश असर था।

अभय: क्या गाँड है साली की! एकदम टाइट और गोल।

प्रणय: हाँ भाई! ऐसी गाँड तो मेरी जीएफ़ की भी नहीं है। गज़ब की हाय तौबा है!

अभय तुरंत पज़ैसिव हो गया।

अभय: तू मत देख भाई! ये तेरी भाभी है। ये जल्दी ही मेरी जीएफ़ बनेगी। पक्का!

प्रणय: अगर तू इस पटाखे को पटाने में कामयाब हो गया तो तेरे मज़े ही मज़े हैं, अभय!

अभय की आँखों में हवस थी।

अभय: हाँ भाई! मैं पहले तो इसके बड़े-बड़े बूब्स जमके चूसूँगा। और फिर इसकी सेक्सी गाँड मारूँगा! शुरुआत तो होनी चाहिए!

प्रणय: तो चल फिर। कोई और चांस न मार ले!

दोनों उठकर तुरंत कॉलेज बिल्डिंग के अंदर की तरफ़ चल दिए।

कॉलेज के बरामदे में त्रिप्ती अंदर पहुँच चुकी थीं और कृति से मिल रही थीं। उनके आसपास और भी कुछ फ्रेंड्स खड़े थे।

वहीं रुहान नाम का एक लड़का खड़ा था, जिसकी नज़र त्रिप्ती से हट नहीं रही थी। वो दौड़ता हुआ विक्की और उसके दोस्तों के पास गया, जो बास्केटबॉल कोर्ट में थे।

मै: क्या हुआ रोहन? इतना भागता हुआ क्यों आ रहा है?

रोहन: यार! तुम लोग यहाँ बास्केटबॉल खेल रहे हो! और वहाँ कॉलेज में एक मस्त माल आई है! वो तो स्वर्ग की अप्सरा से भी ज़्यादा सुंदर है!

विक्की: क्या बोल रहा है? हवा में है क्या?

रोहन: हाँ भाई! वो किसी हीरोइन से कम नहीं है। एक बार देखते ही दीवाना हो जाओगे।

विक्की की आँखों में शिकार की चमक आई।

विक्की: तो चलो! चल के साली को लाइन मारते हैं! अपना चैलेंज शुरू करते हैं!

मै: हाँ हाँ! चलो!

राहुल और उसकी पूरी गैंग कॉलेज के अंदर गई। बरामदे में त्रिप्ती, कृति और उसकी फ्रेंड्स से बात कर रही थीं। राहुल और उसके दोस्त वहीं खड़े होकर लाइन मारने लगे। सब की नज़रें त्रिप्ती की गाँड को ही घूर रही थीं।

विक्की: क्या गाँड है बाप! दिल तो कर रहा है साली को नंगी करके यहीं गाँड मार लूँ!

मै: सच में यार! साली की गाँड बहुत सेक्सी है। अगर पट गई तो पहला काम इसकी गाँड मारूँगा।

राहुल, बेख़बर, अपनी ही माँ के हुस्न और जिस्म पर गंदी कमेंट कर रहा था।

तभी कृति की नज़र राहुल और उसके दोस्तों पर जाती है। वो ग़ुस्से से देखने लगती है।

कृति: साले हरामी कहीं के!

त्रिप्ती: किसको गाली दे रही हो, कृति?

कृति: उस चंडाल चौकड़ी को! इनको शर्म नहीं आती।

त्रिप्ती मुड़कर देखती हैं।

और ये वो पल था। जिस पल राहुल ने अपनी माँ को हॉस्टल की ज़िद पर अलग किया था, उसी पल उसने अपनी माँ को कॉलेज में देखा।

राहुल हक्का-बक्का रह गया। उसका सारा खून ठंडा पड़ गया। उसकी आँखें चौड़ी हो गई थीं। उसके दोस्त उसकी ही माँ पर लाइन मार रहे थे, और वो खुद भी अपनी ही माँ पर लाइन मार रहा था।

शॉक के बाद, एक नया जज़्बात उसमें उठा। उसने अपनी माँ की ख़ूबसूरती को आज तक ग़ौर से नहीं देखा था, लेकिन आज वो उसकी आँखों में, उसके दिल में उतर गई थीं। वो तो आँखों से ही अपनी माँ को चोद रहा था, सिर्फ़ उनकी ख़ूबसूरती देखकर।

कृति: त्रिप्ती, इस चंडाल चौकड़ी से दूर रहना। ये सारे के सारे लोफ़र लड़के हैं।

त्रिप्ती: ठीक है कृति।

सब लोग क्लास में जाते हैं। अभी भी राहुल और उसके दोस्त त्रिप्ती पर लाइन मार रहे थे। उनकी हर हरकत पर उनकी गंदी नज़र थी।

तभी अभय और उसके दोस्त क्लास में आते हैं। अभय त्रिप्ती को कृति के साथ देखकर ख़ुश हो जाता है—अब तो ये उसके टारगेट के ग्रुप की फ्रेंड बन चुकी थीं।

अभय: हाई कृति!

कृति: हाई अभय!

कृति उठकर अभय के गले लग जाती है।

अभय त्रिप्ती की तरफ़ देखता है।

अभय: ये कौन है?

कृति: अरे, ये हमारी नई फ्रेंड त्रिप्ती है। और त्रिप्ती, ये हमारा फ्रेंड अभय है।

अभय: हाई त्रिप्ती!

त्रिप्ती: हाई अभय!

और अभय तुरंत त्रिप्ती के गले लग जाता है। एक लंबा त्रिप्ती हैरान हुईं, फिर उन्होंने भी धीरे से अभय को हग किया।

ये देखकर राहुल की जल गई। उसका दिमाग़ ग़ुस्से से फट रहा था कि अभय उसकी माँ के गले लगा हुआ था। राहुल, जो अभय को बिल्कुल पसंद नहीं करता था, उसके अंदर एक आग लग गई।

त्रिप्ती और अभय एक ही बेंच पर बैठे थे। ये देखकर राहुल के अंदर आग लगी हुई थी। वो अंदर से जल रहा था, और ये उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था। उसका क्लास में ध्यान नहीं था, उसकी नज़रें त्रिप्ती और अभय पर थीं। तभी लेक्चरर का ध्यान उस पर गया, वो ग़ुस्सा हो गए और उसे क्लास से बाहर निकाल दिया।

त्रिप्ती को बुरा लगा कि लेक्चरर ने उनके बेटे को क्लास से बाहर निकाल दिया। ये एक अजीब मजबूरी थी।

कॉलेज शुरू हुए एक हफ़्ता हो गया था, और त्रिप्ती के तो कॉलेज में कई दीवाने हो गए थे। ये त्रिप्ती अच्छे से जानती थीं, और उनका सबसे क़रीबी दीवाना अभय था।

त्रिप्ती और कृति हॉस्टल में बैठे थे।

कृति: त्रिप्ती, मुझे लगता है अभय तेरा दीवाना हो गया है।

त्रिप्ती: हाँ, मुझे मालूम है।

कृति: तेरी तो लॉटरी लग गई! जिस लड़के की कॉलेज की हर लड़की दीवानी है, वो तेरा दीवाना है। क्या तू भी उससे पसंद करती है?

त्रिप्ती: हाँ, लेकिन एक दोस्त की तरह। बाक़ी कुछ नहीं है।

कृति: तू पागल हो गई है! तुझे अभय जैसे लड़के को बीएफ़ नहीं बनाना?

त्रिप्ती: मुझे अभय को ही नहीं, बल्कि किसी का बीएफ़ नहीं बनाना।

कृति: बिना बीएफ़ के भी क्या मज़ा है, त्रिप्ती?

त्रिप्ती: मुझे ऐसे कुछ पसंद नहीं है। चलो, अब कॉलेज चलते हैं।

और दोनों कॉलेज के लिए निकल जाते हैं।

उधर अभय और उसका एक दोस्त अतुल कॉलेज गार्डन में बैठे थे।

अभय: यार, इस त्रिप्ती ने तो मेरी नींद उड़ा रखी है। साली अब तो सपनों में भी नंगी ही आती है।

अतुल: यार, तेरी तो कॉलेज की हर लड़की दीवानी है। और मुझे लगता है त्रिप्ती भी तेरी दीवानी है।

अभय: हाँ यार, त्रिप्ती को चोदने के लिए मरा जा रहा हूँ।

अतुल: एक बार प्रपोज़ कर दे, फिर रात-दिन त्रिप्ती को चोदते ही रहना।

अभय: लेकिन कैसे प्रपोज़ करूँ? उसके साथ कोई न कोई रहता ही है।

अतुल: आज हम लोग एग्ज़िबिशन के लिए एसवीआर कॉलेज जा रहे हैं। वहीं तू त्रिप्ती को प्रपोज़ कर दे। और मौक़ा मिले तो चोद भी देना।

अभय: हाँ यार! जब तक इसे चोदूँगा नहीं, मज़ा नहीं आएगा।

तभी विक्की, राहुल और उसके दोस्त गार्डन में आते हैं।

विक्की: मेरेको पता है अभय, तू उस सेक्सी त्रिप्ती का दीवाना है। और हो भी क्यों न, साली है भी मस्त माल! क्यों, राहुल?

राहुल के सामने ही उसकी मम्मी की गंदी-गंदी बातें हो रही थीं, लेकिन राहुल कुछ नहीं बोल सकता था।

मै: हाँ यार।

अभय ग़ुस्से से—

अभय: सालो! त्रिप्ती के बारे कुछ भी मत बोलो!

विक्की: बोलेंगे तो क्या कर लेगा बे? तू कौन होता है बोलने वाला?

अभय: साले, तुझे जान से मार दूँगा!

विक्की: तू मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाएगा। तेरे से पहले मैं उस त्रिप्ती को पटा के चोद भी डालूँगा!

अभय हँसकर—

अभय: तू पटाएगा त्रिप्ती जैसा माल? चैलेंज एक्सेप्टेड!

विक्की और अभय एक-दूसरे को गाली देने लगे। राहुल ने विक्की को और अतुल ने अभय को खींचकर अलग कर दिया।

राहुल के सामने ही दो लोगों ने चैलेंज लिया था कि उसे पटा के चोदेंगे। राहुल इससे बहुत परेशान हो गया था। उसने सोचा कि उसे त्रिप्ती से बात करनी चाहिए। वो चुप नहीं रह सकता था।

त्रिप्ती कृति और बाक़ी फ्रेंड्स के साथ बस के पास थी। राहुल तुरंत त्रिप्ती के पास गया।

मै: त्रिप्ती, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

कृति: लेकिन इससे तुम जैसे आवारा लड़के से कोई बात नहीं करनी!

त्रिप्ती: छोड़ो कृति। बोलने दो उससे। बोलो राहुल, क्या बात है?

मै: मुझे अकेले में बात करनी है। तो क्या तुम बस में मेरे साथ बैठोगी?

त्रिप्ती: क्यों नहीं? ठीक है।

राहुल बस में घुस गया। कृति, ग़ुस्से और हैरानी से त्रिप्ती को बोलने लगी।

कृति: तू पागल हो गई है क्या? इस आवारा लड़के के साथ बैठेगी क्या तू?

त्रिप्ती: तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा? वो मुझे कुछ थोड़ी कर देगा?

कृति: यार, सोचा कि अभय को कैसा लगेगा? वो तुमसे प्यार करता है!

त्रिप्ती: मुझे किसी की क्यों परवाह होनी चाहिए?

त्रिप्ती ने एक गहरा साँस लिया और बस में चढ़ गईं… वही बस जिसमें उनका बेटा उनका इंतज़ार कर रहा था। वो अनजान थीं कि जिस बेटे से वो चुपके मिली थीं, उसी बेटे के दोस्त और दुश्मन उसी पर अपनी गंदी नज़रें गड़ाए थे।

त्रिप्ती भी बस में घुस गईं और सीधा राहुल के बग़ल में जाके बैठ गईं। बस के अंदर का माहौल एकदम गरम हो गया। त्रिप्ती का हुस्न आज येलो टॉप और व्हाइट जींस में एक अलग ही बिजली गिरा रहा था।

ये देख विक्की ने तुरंत राहुल को आँखों से इशारे किए, जैसे मज़े लेने को कह रहा हो। विक्की को लग रहा था कि राहुल सिर्फ़ एक्टिंग कर रहा है। वहीं, अभय बस में खड़ा था, त्रिप्ती को राहुल के साथ देखकर उसकी जलन बुरी तरह बढ़ गई थी। उसका ग़ुस्सा और प्यार दोनों एक साथ उसे तड़पा रहे थे।

पिछली सीट पर शीतल परेशान खड़ी थी। विक्की ने उसको देखा और अपने दोस्तों से बोला: क्यों न शीतल के मज़े लिए जाएँ? वो और उसके दोस्त सब पीछे चले गए। ये सब देख शीतल घबरा गई, उसे पिछले दिन बस की चुदाई याद आई।

इधर राहुल और त्रिप्ती आपस में धीरे-धीरे बात करने लगे। त्रिप्ती का जिस्म उनकी ममता और एक औरत की तड़प के बीच फँस चुका था।

त्रिप्ती: बोलो बेटा, क्या बात है?

मै: कुछ नहीं, बस ऐसे ही आपके साथ समय बिताना था। पता नहीं क्यों, आपके पास आकर एक अलग सा शांति मिलता है।

त्रिप्ती प्यार से मुस्कुराईं—

त्रिप्ती: ओह्ह।

उनको अपने बेटे का ये नज़दीकी प्यार बहुत अच्छा लग रहा था। उनको लग रहा था कि कम से कम राहुल उनके क़रीब तो है, जिससे वो सुरक्षित हैं।

त्रिप्ती को राहुल के साथ प्यार से बात करता देखकर अभय की गाँड और ज़्यादा जलने लगी थी। उसकी आँखों में आग थी।

मै: आप कॉलेज के लड़कों से दूर रहा करो। साले सब आप पर लाइन मारते हैं!

त्रिप्ती मुस्कुरा के अपनी आँखें चौड़ी कीं—

त्रिप्ती: तो क्या तुम्हें जलन होती है?

राहुल ने अपनी पीठ सीधी की। उसके मन में अब कोई शर्म नहीं थी।

मै: हाँ मम्मी, ये भी कोई पूछने की बात है? अब तो आप मेरी जीएफ़ हो!

त्रिप्ती प्यार और नज़रअंदाज़ी से बोलीं—

त्रिप्ती: ओह्ह, मेरा बेटा।

मै: अब तक मैं जला हूँ। अब देखो, सबको जलाता हूँ!

ये बोलकर, राहुल ने त्रिप्ती के कमर में हाथ डाला और एक तेज़ झटके से उसे अपनी तरफ़ खींच लिया। अब राहुल और त्रिप्ती एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे। त्रिप्ती के नरम बूब्स राहुल की छाती पर ज़ोर से दब गए। उन दोनों के बीच अब कोई फ़ासला नहीं था।

त्रिप्ती एकदम से होश में आईं—

त्रिप्ती: ये क्या कर रहे हो तुम!

उनकी आवाज़ धीमी थी ताकि कोई और न सुन पाए।

राहुल ने अपनी आवाज़ धीमी और शैतानी की—

मै: मम्मी, आपके दीवानों के मुँह तो देखो! इनको जलाना कितना मज़ेदार है!

राहुल की बात सच थी। सब के चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि उन्हें कितनी जलन हो रही है। और सबसे ज़्यादा अभय के चेहरे पर दिख रहा था। उसका चेहरा ग़ुस्से और नफ़रत से लाल हो चुका था।

अब तो राहुल ने सारे रास्ते सबको ऐसे ही जलाने का सोचा। उसने अपना दोनों हाथ त्रिप्ती की कमर और गाँड पर रखा और उसे कसके पकड़ लिया। त्रिप्ती अपने बेटे की बाँहों में एक औरत की तरह क़ैद थीं। उनका जिस्म मदहोश हो रहा था, उनके बेटे की गर्मी उन्हें एक अजीब सा सुख दे रही थी। ये एक ख़तरनाक खेल था, जहाँ एक बेटा अपनी माँ को दुनिया के सामने अपनी रखैल बना रहा था।

एसवीआर कॉलेज की कैंपस कमाल की थी। हमारे कॉलेज से कुछ दूर, लेकिन उतनी ही शान-ओ-शौकत में डूबा हुआ। बस अपनी मंज़िल तक पहुँच चुकी थी। दरवाज़ा खुला और स्टूडेंट्स का हुजूम एक साथ उतरा।

राहुल और त्रिप्ती, एक अनोखा जोड़ा, बस से साथ उतरे। त्रिप्ती ने अपनी हाई हील्स को ज़मीन पर रखा और उनके हर क़दम से एक नई तरंग पैदा हो रही थी। ग्रे गाउन में उनका फ़िगर 38-28-38 एकदम परफ़ेक्ट दिखी दे रहा था। उनकी कमर की लचक और गाँड की थिरक ने वहाँ मौजूद हर लड़के की साँसें रोक दी थीं।

वो दोनों बातें करते हुए चलने लगे। त्रिप्ती की आवाज़ में एक सॉफ्टनेस थी, और राहुल अपने ही सोच में डूबा हुआ था—क्या उसे अपनी माँ को सच्चाई बता देनी चाहिए?

उनके ठीक पीछे अभय चल रहा था। उसका चेहरा ग़ुस्से और जलन से लाल हो रहा था। ये लड़का, जो त्रिप्ती के साथ इतनी दोस्ती बढ़ा रहा था, वो कौन था? अभय को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था कि उसकी टारगेट किसी और के साथ इतनी क्लोज़ हो।

उसकी हालत देखकर, विक्की अपनी जगह पर बड़ा ख़ुश हो रहा था। उसने मन ही मन में सोचा: अच्छा है, दोनों आपस में लड़ेंगे। मेरा काम आसान हो जाएगा।

इधर कृति ने देखा कि शीतल कुछ परेशान दिखी। उसका चेहरा उतरा हुआ था और आँखों में शर्म और ख़ौफ़ साफ़ नज़र आ रहा था। कृति तुरंत शीतल के पास गई।

कृति: क्या हुआ शीतल? इतनी परेशान क्यों है? वहाँ से जब से उतरी है, तू ठीक नहीं लग रही।

शीतल: कुछ नहीं कृति। बस ऐसे ही। थोड़ा हेडेक है।

कृति: झूठ मत बोल। बता ना, क्या बात है? अभी तक वो विक्की की घटिया हरकत से परेशान है?

शीतल ने चारों तरफ़ देखा, अपने दोस्तों को नज़दीक आते देखा। वो कृति को एक तरफ़ खींचकर ले गई। उसकी आवाज़ काँप रही थी।

शीतल: यार… उससे भी ज़्यादा। बस की लास्ट सीट पे… उस विक्की ने ज़बरदस्ती मेरी चुदाई की। मेरा मुँह दबोच के… और मेरा वीडियो भी बनाया।

कृति की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसका खून खौल उठा।

कृति: क्या बोल रही है! उसकी इतनी हिम्मत! चल, हम कंप्लेंट करते हैं! अभी के अभी!

शीतल ने डर से अपना हाथ कृति के हाथ पर रख दिया।

शीतल: नहीं कृति! प्लीज़। अगर उसको पता चला, वो वीडियो वायरल कर देगा! मेरी इज़्ज़त… मेरा परिवार…

कृति एक पल के लिए सारी दुनिया भूल गई। उसने शीतल को ज़ोर से गले लगा लिया। उसने हिम्मत देते हुए कहा—

कृति: तू टेंशन मत ले। हम लोग सिमरन मैम से बात करेंगे। वो हमारी मदद करेंगी। वो बहुत स्ट्रिक्ट हैं ऐसे मामलों में। ये बात सीक्रेट रहेगी।

इधर राहुल और त्रिप्ती बातें करते हुए एग्ज़िबिशन हॉल की तरफ़ बढ़ रहे थे। राहुल को अभय की जलन साफ़ नज़र आ रही थी, और उसके दिमाग़ में एक शरारत आई—क्यों न अभय को और जलाया जाए? वो जानता था कि अभय उसकी माँ को पसंद करता है।

और फिर, एक अजीब मजबूरी में डूबा हुआ बेटा, अपनी ही माँ की गाँड पर हल्के से हाथ रख दिया।

त्रिप्ती एकदम से झिझक गईं। उन्होंने धीरे से अपने बेटे को देखकर कान में बोला—

त्रिप्ती: राहुल, ये क्या है अब? कॉलेज में हो तुम!

राहुल ने मुस्कुराकर कहा—

मै: अरे मम्मी! थोड़ा जलाने तो दो अभय को! देखो कैसे घूर रहा है। उसको लगने दो कि हम दोनों बहुत क्लोज़ हैं।

त्रिप्ती थोड़ी देर शांत रहीं। उनको शर्म भी आई, लेकिन अपने बेटे की शरारत पर एक हल्की स्माइल दे दी। ये स्माइल एक तरह से परमिशन थी।

और फिर, राहुल बेशर्मी और जोश से त्रिप्ती के फ़िगर की सबसे हसीन जगह—उनका गोल और कसावदार हिस्सा—उस गाँड पर हाथ फेरते हुए चलने लगा। उसकी उँगलियाँ उस ग्रे गाउन के कपड़े के ऊपर से त्रिप्ती की गरम स्किन को महसूस कर रही थीं।

त्रिप्ती को एक अजीब सी सेंसेशन महसूस हुई। सालों बाद किसी जवान हाथ की छुअन उनके जिस्म पर महसूस हुई थी। उनका दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उनको याद नहीं था कि आख़िरी बार कब उन्होंने इतना एक्साइटमेंट महसूस किया था।

पीछे अभय ये सब देखते ही और ज़्यादा इरिटेट हो गया। उसका ग़ुस्सा आग में बदल रहा था। वो मन ही मन में सोच रहा था, ये कौन है जो इतनी हॉट लड़की को इस तरह छू रहा है?

विक्की भी ये सब देखकर हैरान था। उसका दिमाग़ ख़राब हो रहा था। साला राहुल इतनी सेक्सी गाँड पर हाथ फेर रहा है! विक्की ने अपनी पैंट के अंदर हुए टेंट को एडजस्ट किया। बस एक बार त्रिप्ती की गाँड मारने मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा। उनका फ़िगर… उनके कर्व्स… सब कुछ उसकी सोच में डूब चुका था।

सब लोग कॉलेज के अंदर चले गए और लेक्चरर सबको लैब के अंदर ले गए। एग्ज़िबिशन शुरू हो गया।

लैब के अंदर कुछ देर बाद, कृति त्रिप्ती से बोला ही नहीं रह पाई।

कृति: अरे यार! वो राहुल क्या बोल रहा था? अभय को देखा! कितनी जेलसी फ़ील हो रही थी!

त्रिप्ती को समझ में नहीं आया कि कृति को क्या जवाब दें। वो हड़बड़ाहट में झूठ बोल गईं—एक ऐसा झूठ जिसने उनकी कहानी को एक नया मोड़ दे दिया।

त्रिप्ती: वो… राहुल ने मुझे प्रपोज़ किया है।

कृति चौंक गई। उसकी आँखें बड़ी हो गई थीं।

कृति: क्या! त्रिप्ती, तूने हाँ तो नहीं बोला?

त्रिप्ती: नहीं, अभी तक तो नहीं।

कृति ग़ुस्से में बोली—

कृति: उस आवारा लड़के को हाँ बोलने की ज़रूरत नहीं है! वो लोफ़र है! तू सिर्फ़ अभय से ही प्यार करना। अभय कितना अच्छा है, केयरिंग है! वो तुझे ख़ुश रखेगा। राहुल तो सिर्फ़ टाइम पास करेगा!

त्रिप्ती अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थीं। उन्हें अच्छा लग रहा था कि उनकी नई दोस्त उन्हें प्रोटेक्ट कर रही है। लेकिन वो जानती थीं कि उनके लिए किसी को चुनना कितना मुश्किल होने वाला है। एक तरफ़ उनका बेटा, जो उन्हें अपनी माँ से ज़्यादा एक औरत की तरह ट्रीट कर रहा था। दूसरी तरफ़ अभय, जो बेपनाह मोहब्बत का दावा कर रहा था। और बीच में वो खुद—एडल्टरी के ख़तरनाक रास्ते पर चलने को मजबूर।

एग्ज़िबिशन हॉल में सब स्टूडेंट्स अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थे। त्रिप्ती अपने झूठे प्रपोज़ और अभय की जेलसी पर कृति की बातें सुनकर एक अजीब डिलेमा में घिरी थीं। उनका दिमाग़ श्री संजीव खन्ना की बीवी था, लेकिन उनका जिस्म आज फिर से जवान हो चुका था।

तभी, अभय ग़ुस्से और जुनून से भरा हुआ सीधा त्रिप्ती के पास आया। उसका चेहरा लाल था, आँखें किसी नशे में डूबी हुई लग रही थीं। उसने बिना कुछ कहे, एकदम से त्रिप्ती को गोद में उठा लिया।

त्रिप्ती एक पल के लिए हैरान हो गईं!

कृति ज़ोर से चिल्लाई—

कृति: अभय! ये क्या कर रहा है! छोड़ उसे!

लेकिन अभय अपने जुनून में इतना डूबा था कि उसे कुछ सुनाई नहीं दिया। सिर्फ़ कृति को छोड़कर, ये हरकत किसी और ने नहीं देखी थी। उसको तो अपने दोस्तों को दिखाकर त्रिप्ती को बताना था कि उसे अभय से दूर रहना चाहिए था।

वो त्रिप्ती को लैब से तुरंत बाहर ले गया, कॉरिडोर के एक कोने में जहाँ शोर कम था। उसने त्रिप्ती को ज़ोर से दीवार से सटा दिया। त्रिप्ती का चमकीला गाउन दीवार और अभय के जिस्म के बीच दबा हुआ था।

अभय ने त्रिप्ती को सामने से दबोचा और अपना गरम लंड (जो टाइट जींस के अंदर तन चुका था) त्रिप्ती की गाँड के दरार में गाउन के ऊपर से घुसा दिया। उसने त्रिप्ती की कमर को पकड़ा और अपना लंड उनकी गाँड पर मसलते हुए अपनी आवाज़ को गहरा किया।

अभय: आई लव यू, त्रिप्ती! डैम! तुम समझती क्यों नहीं हो? मुझे तुम राहुल के साथ देखकर चिढ़ होती है! तुम सिर्फ़ मेरी हो!

ये सब इतनी जल्दी हुआ कि त्रिप्ती सँभल भी नहीं पाईं। उनकी धड़कन ज़ोरों से धड़क रही थी। उनकी गाँड पर एक जवान लड़के के लंड का एहसास उन्हें पागल कर रहा था। उन्होंने घबराहट में कहा—

त्रिप्ती: अभय! छोड़ो मुझे! ये तुम ग़लत कर रहे हो! कोई देख लेगा!

अभय ने उनकी बात अनसुना कर दी। उसका दिमाग़ हवस और जुनून में बंद था। उसने अपना चेहरा त्रिप्ती की गर्दन पर झुकाया और उनकी नरम गर्दन को चूमने लगा, अपने होठों से एक गरम निशान छोड़ रहा था। उसकी एक बड़ी मुट्ठी त्रिप्ती की कमर को पकड़कर उनकी गाँड पर लंड मसल रही थी।

त्रिप्ती की आँखें बंद हो गई थीं। उनके जिस्म में एक अनोखा करंट दौड़ रहा था।

अभय: त्रिप्ती, मैं तुझे इतना प्यार करता हूँ कि मैं तुम्हें किसी और के साथ देख नहीं सकता! तुम्हें पता है तुम कितनी हॉट हो?

फिर अभय ने त्रिप्ती को अपनी तरफ़ घुमाया। उसका लंड अब त्रिप्ती के पेट पर रगड़ रहा था। उसने त्रिप्ती के होठों पर अपने होठ रख दिए। ये एक अजीब सा किस था। ज़िद से भरा और हवस से लबरेज़।

अभय ने एक हाथ से त्रिप्ती के लंबे बाल पकड़े हुए थे ताकि वो हिल न पाएँ, और दूसरे हाथ से उनके कुल्हों को, उनके 38 इंच की गाँड को ज़ोर से मसल रहा था। वो त्रिप्ती के होठ पैशनेटली चूस रहा था। उसकी सारी शक्ति और जवानी उस किस में थी।

फिर अभय ने त्रिप्ती के मुँह में मुँह डाला और उसे फ़्रेंच किस करने लगा। वो त्रिप्ती की ज़बान को अपने मुँह में लेकर एग्रेसिवली चूसने लगा।

उसकी छुअन इतनी गरम थी कि त्रिप्ती भी उस पल में खो गईं। उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं। उन्होंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके जिस्म ने साथ नहीं दिया। वो एक हल्की सी मोनिंग दबा गईं उस किस के बीच—“आह…” सिर्फ़ एक हल्की सी सरगोशी।

अभय ने त्रिप्ती को एक अच्छी सी डीप किस दी, उनके सारे रस चूस लिए, फिर जाकर त्रिप्ती के होठ छोड़ दिए।

त्रिप्ती साँस लेते हुए ग़ुस्से से धक्का दिया अभय को। उनकी आँखों में ग़ुस्सा था, लेकिन जिस्म में जुनून की आग लग चुकी थी। वो तुरंत अंदर चली गईं और अपना एग्ज़िबिशन पूरा करने लगीं।

एग्ज़िबिशन ख़त्म हुआ और सब वापस जाने के लिए निकले। इस बार त्रिप्ती ने सोचा कि वो जाके बस की पिछली सीट पर बैठेंगी, ताकि राहुल उनके पास आकर बैठे और वो अकेले में उससे बात कर पाएँ। और वो भी अभय को और जलाना चाहती थीं, क्योंकि उनके साथ अभय ने जो किया था वो ग़लत था।

लेकिन राहुल उनके पास बैठे, उससे पहले विक्की तुरंत आया और त्रिप्ती के बग़ल में बैठ गया। राहुल को मजबूरन दूसरी सीट पर बैठना पड़ा। अभय आगे की सीट पर बैठा था।

विक्की एक नॉटी स्माइल के साथ बोला—

विक्की: हाई त्रिप्ती।

त्रिप्ती: हाई।

विक्की: तुम बड़ी ख़ूबसूरत हो। ऐसी आइटम कॉलेज में पहले कभी नहीं आई।

त्रिप्ती: थैंक यू।

तभी विक्की ने अपना हाथ त्रिप्ती की नंगी जाँघ (जो गाउन के नीचे से दिखी दे रही थी) पर रखा। त्रिप्ती ने तुरंत उसके हाथ को हटा दिया और ग़ुस्से से बोला—

त्रिप्ती: ढंग से बैठो! ये क्या हरकत है?

विक्की उसी वक़्त त्रिप्ती की कमर पकड़ी और अपनी तरफ़ ज़ोर से खींच लिया। उसकी आँखों में एकदम ग़ुस्सा और हवस था।

विक्की: साली! नखरे कर रही है? जब राहुल ने तेरी गाँड पर हाथ फेरा, तब कुछ नहीं बोली! और साले अभय ने तो तेरी गाँड पर लंड ही मसल दिया, तब भी कुछ नहीं बोली! मुझ में क्या काँटे लगे हुए हैं जो हाथ हटा रही है?

त्रिप्ती शॉक में दरअसल कुछ बोल नहीं पाईं। उनको ये समझ नहीं आया कि विक्की को अभय और उनका किस कैसे पता चला।

विक्की ने ग़ुस्से में त्रिप्ती को उठा के अपनी गोद में बिठा लिया। त्रिप्ती की चीख उस लंबी बस के शोर में दब गई।

बस में बाक़ी स्टूडेंट्स अपने दोस्तों के साथ बिज़ी थे और किसी का ध्यान पीछे नहीं गया। विक्की ने त्रिप्ती के बूब्स (जो 38 इंच के टाइट और भरे हुए थे) पकड़कर मसलना शुरू कर दिया।

त्रिप्ती उसकी गोद में उसकी पैंट के ऊपर से अपना लंड अपनी गाँड की दरार में महसूस कर रही थीं। उनकी साँस तेज़ हो गई थी। विक्की ने अपना मुँह त्रिप्ती की गर्दन पर रखा और उनकी गर्माहट को चूमने लगा।

विक्की: आह, त्रिप्ती… तुझे तो आज छोड़ूँगा नहीं। मज़ा आ रहा है ना?

त्रिप्ती ने अपना मुँह दबा लिया ताकि उनकी आवाज़ न निकल पाए। वो एक मजबूरी में थीं।

सारे रास्ते विक्की ने त्रिप्ती को अपनी गोद में बिठा के उनकी छाती और कमर को मसलता रहा। जब बस कॉलेज पहुँची, त्रिप्ती जल्दी से विक्की की गोद से उठकर अपने रूम की तरफ़ भाग गईं। उनकी साँस फूल रही थी। उनकी धड़कन तेज़ थी। आज उन्होंने एक ही दिन में दो अलग-अलग जवान हाथों की हवस महसूस की थी। वो हॉस्टल में अपने रूम की तरफ़ चली गईं… जहाँ उनकी शांति उनका इंतज़ार कर रही थी।

लेकिन त्रिप्ती जानती थीं कि अब ये खेल शुरू हो चुका था। और इसमें उनके बेटे राहुल का नाम भी शामिल था।

आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।

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