माँ बनी क्लाससमेट 2

Maa bete ki GF bankar chut chudai:- हॉस्टल के रूम में, रात के सन्नाटे में, त्रिप्ती अपने बेड पर लेटी हुई थीं। उनकी आँखों के सामने आज की हर घटना घूम रही थी। विक्की और अभय का जुनून, उनकी बेशर्मी, और उनके जिस्म पर उन दोनों की छुअन का एहसास।

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Maa bete ki GF bankar chut chudai hindi sex story

वो सोच रही थीं: ये दोनों तो मेरे पीछे ही पड़ गए हैं। पता नहीं, अगर किसी मौक़े पर मैं उनके हाथ लग गई तो वो मेरी चुदाई ही कर दें! मुझे इन दोनों से बचने का कोई रास्ता ढूँढना होगा, जिससे राहुल मेरे साथ ज़्यादातर रह सके। हाँ, राहुल! अगर वो मेरे साथ रहेगा तो कोई भी लड़का मुझे छेड़ने की हिम्मत नहीं करेगा।

तभी अभय का फ़ोन आया। त्रिप्ती ने स्क्रीन पर नाम देखा और एक गहरी साँस ली। उन्होंने कॉल उठाया। अभय तुरंत सॉरी बोलने लगा, अपनी ग़लती की माफ़ी माँग रहा था। लेकिन त्रिप्ती आज मानी नहीं। उनका ग़ुस्सा और डर अभी भी ताज़ा था। उन्होंने बिना कुछ सुने फ़ोन काट दिया। रात के दस बज चुके थे, और त्रिप्ती एक लंबी साँस लेकर सो गईं, कल की नई सुबह और नए चैलेंजेस का इंतज़ार करते हुए।

अगले दिन सुबह, त्रिप्ती और कृति तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल गए। त्रिप्ती आज भी कमाल लग रही थीं, उनकी ख़ूबसूरती वक़्त के हर सितम को झुठला रही थी।

क्लास में बैठे अभय की नज़र त्रिप्ती पर पड़ी, जो अपनी बेंच पर बैठी बेहद सेक्सी दिखी दे रही थीं। त्रिप्ती को देखकर तो अभय का लंड तुरंत खड़ा हो गया था। उसने जैसे-तैसे अपने आप को सँभाला और त्रिप्ती के बग़ल में जाकर बैठ गया।

अभय: सॉरी त्रिप्ती। पिछली बार के लिए। प्लीज़।

त्रिप्ती ने तेज़ आवाज़ में कहा—

त्रिप्ती: मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी। जाओ यहाँ से तुम!

अभय गिड़गिड़ाने लगा। उसके चेहरे पर मायूसी थी।

अभय: सॉरी यार। मैं बहुत प्यार करता हूँ, इसलिए ग़ुस्से में वो हरकत की। मुझे माफ़ कर दो।

कृति भी अभय का साथ देने लगी।

कृति: छोड़ ना यार। उससे ग़लती हो गई। वो सच में परेशान है। एक बार उसे माफ़ कर दे।

आख़िर थक-हारकर, त्रिप्ती का दिल नरम पड़ गया। उनका ग़ुस्सा उस जवान लड़के की मोहब्बत के सामने पिघल गया।

त्रिप्ती: ठीक है। लेकिन ध्यान रखना। दोबारा ऐसी कोई हरकत मत करना।

अभय ख़ुशी से बोला—

अभय: नहीं करूँगा! थैंक यू त्रिप्ती!

कृति: चलो! ये ख़ुशी में आइसक्रीम खाते हैं। कैंटीन चल के!

तीनों कैंटीन जाते हैं। अभय तीन आइसक्रीम लेकर आता है। कुछ देर बाद कृति किसी काम से चली जाती है, और त्रिप्ती और अभय वहाँ अकेले रह जाते हैं।

अभय: आज बहुत बोर हो रहे हैं ना?

त्रिप्ती: हाँ, बोर तो हो रहे हैं।

अभय: क्यों न कोई मूवी देखने चलें? बड़ा मज़ा आएगा!

त्रिप्ती: नहीं यार। मुझे नहीं देखनी मूवी।

अभय उसे मनाने लगा। उसके हाथ त्रिप्ती के कंधे पर रखे। आख़िर त्रिप्ती मान गईं। उनकी अंदर की हवस और जवानी की तड़प उनको रोक नहीं पाई।

त्रिप्ती: ठीक है। तुम तैयार होकर हॉस्टल के बाहर वेट करना।

अभय: ओके!

त्रिप्ती हॉस्टल चली गईं। आधे घंटे बाद, अभय अपनी कार के पास हॉस्टल के बाहर त्रिप्ती का इंतज़ार कर रहा था। थोड़ी देर बाद त्रिप्ती भी आ गईं। आज उन्होंने अपने फ़िगर को फ्लॉलेसली डिस्प्ले करने के लिए एक व्हाइट टॉप और एक पिंक स्कर्ट पहना था। वो स्कर्ट उनके घुटनों से काफ़ी ऊपर थी, जिससे उनकी नंगी जाँघें साफ़ दिख रही थीं। वो बेपनाह सेक्सी लग रही थीं।

अभय: यू आर लुकिंग गॉडेस त्रिप्ती। आपको देखकर तो होश उड़ जाते हैं।

त्रिप्ती: थैंक यू अभय।

दोनों अभय की कार से थिएटर के लिए निकल गए। थिएटर पहुँचकर अभय ने दो कॉर्नर टिकट्स लिए—एक ऐसी जगह जहाँ उनको कोई परेशान नहीं कर सकता था।

मूवी स्टार्ट हो गई। वो एक हॉलीवुड रोमांटिक मूवी थी, जिसमें बेहद रोमांटिक और इरोटिक सीन्स थे। अँधेरा था, और माहौल एकदम गरम हो चुका था। हर कोई अपने पार्टनर के साथ रोमांस करने में बिज़ी था।

त्रिप्ती भी पूरी गरम हो चुकी थीं। उनकी साँस तेज़ हो गई थी। उनका जिस्म मदहोश हो रहा था। उनके दिमाग़ के पीछे एक आवाज़ थी: “मैं अपने पति को धोखा दे रही हूँ। मैं ग़लती कर रही हूँ…” लेकिन उनके जिस्म की तड़प उस आवाज़ को दबा रही थी।

तभी अभय ने त्रिप्ती की नंगी जाँघ पर हाथ रखा और उसे सहलाने लगा। उसकी उँगलियाँ उनका गरम जिस्म महसूस कर रही थीं। उसकी छुअन से त्रिप्ती और मदहोश होने लगीं।

दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। उनकी आँखों में मोहब्बत नहीं, शुद्ध हवस थी। उनको पता ही नहीं चला कि उनके होठ कब मिल गए। दोनों किस करने लगे। एक पैशनेट, मदहोश कर देने वाला किस। दोनों एक-दूसरे के होठ पैशनेटली चूस रहे थे।

अभय ने त्रिप्ती की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी गोद में उठाकर बिठा लिया। अब वो दोनों एक कपल की तरह मस्त किस कर रहे थे। अभय त्रिप्ती का निचला होठ चूस रहा था, और त्रिप्ती अभय का अपर होठ चूस रही थीं। दोनों बिल्कुल मदहोश हो चुके थे।

उनके जिस्म में आग लग चुकी थी। “मैं ये क्यों कर रही हूँ?” उनकी आत्मा चीख रही थी, लेकिन उनके अंदर की प्यासी औरत इस रोमांस में डूबी हुई थी। ये चीटिंग नहीं थी, ये तो लस्ट था, एक ऐसी तड़प जिसे वो अपनी शादी की पाबंदी में रोककर रख चुकी थीं।

अभय ने त्रिप्ती के टॉप के अंदर अपने दोनों हाथ डाले। उसने उनकी ब्रा के ऊपर से उनके बड़े बूब्स को कसकर मसलना शुरू कर दिया। त्रिप्ती के बूब्स बड़े मुलायम और नरम थे, उनके जिस्म की ख़ूबसूरती का एक जीवंत हिस्सा। अभय कसके त्रिप्ती के बूब्स मसलने लगा, जिससे त्रिप्ती और एक्साइट हुईं और अपना मुँह खोल दिया। “म्मम… अभय…” एक हल्की सी आवाज़ निकली।

अभय ने त्रिप्ती के मुँह में मुँह डाला और फ़्रेंच किस करने लगा। दोनों एक-दूसरे की ज़बान अपने मुँह में लेकर एग्रेसिवली चूस रहे थे। उनके बीच एक डीप किस चल रही थी।

अभय और त्रिप्ती दोनों होश में नहीं थे, एक-दूसरे में खोए हुए थे। तभी अभय ने त्रिप्ती की स्कर्ट में हाथ घुसाके पैंटी के अंदर डाला।

जैसे उसका हाथ त्रिप्ती की पसी को टच हुआ, त्रिप्ती होश में आ गईं। उनको एकदम से हक़ीक़त का एहसास हुआ। उनका सारा जिस्म काँप गया। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो कैसे बहक गईं। वो तुरंत अभय की गोद से उठकर खड़ी हो गईं।

अभय: ओह! सॉरी त्रिप्ती!

उसने घबराहट में बोला।

लेकिन त्रिप्ती ने अभय की एक नहीं सुनी और थिएटर के बाहर निकल गईं।

अभय को बहुत ग़ुस्सा आ रहा था कि उसने एक मौक़ा गँवाया। अगर थोड़ी देर त्रिप्ती होश में नहीं आतीं तो शायद वो आज त्रिप्ती को यहीं थिएटर में चोद देता। उसने हवस और शिकार को अपने हाथों से छोड़ दिया था। उसका लंड दर्द कर रहा था और वो अपनी हार पर ग़ुस्से में था।

थिएटर के बाहर, त्रिप्ती ज़िंदगी और खुद से भाग रही थीं। उनकी साँस फूल चुकी थी। उनका दिमाग़ चीख रहा था: मैं ये क्या कर रही हूँ? मैं शादीशुदा हूँ! एक बेटे की माँ हूँ! और मैं एक जवान लड़के के साथ उस अँधेरे में क्या कर आई? क्या मेरे अंदर सिर्फ़ लस्ट बचा है? क्यों मेरा जिस्म मेरे कंट्रोल में नहीं है?

वो खुद को कोस रही थीं जब तक कि एक तेज़ बाइक की आवाज़ उनके क़रीब नहीं आई।

वहाँ राहुल था। उसका दुश्मन नहीं, उसका अपना खून।

राहुल की नज़र जैसे ही त्रिप्ती पर पड़ी, उसे अभय से पहले की जेलसी याद आई और वो तुरंत अपनी माँ के पास आया। लेकिन आज त्रिप्ती उसकी माँ नहीं थीं। पिंक स्कर्ट और व्हाइट टॉप में, जिसमें उनकी नंगी जाँघें बेहद ख़ूबसूरत लग रही थीं, वो उसके लिए एक बेहतरीन औरत थीं। एक हसीन पटाखा।

राहुल की आँखों में हवस साफ़ दिख रही थी। उसका लंड तुरंत पैंट में खड़ा हो गया था, एक बड़ा टेंट बना रहा था। वो अपनी आँखों से त्रिप्ती के कपड़े फाड़ रहा था, उनकी चुदाई अपने ख़यालों में कर रहा था।

राहुल त्रिप्ती के पास गया, और एकदम अपना हाथ त्रिप्ती की गोल गाँड पर रखा। उसने धीरे से अपनी उँगलियाँ मसली।

मै: अरे मम्मी! आप यहाँ?

त्रिप्ती पलटीं। उनके दिमाग़ में अभय की छुअन अभी भी ताज़ा थी, तो राहुल की छुअन को उन्होंने ज़्यादा माइंड नहीं किया। उन्होंने सोचा शायद वो भी बचपन की तरह प्यार से छू रहा है।

त्रिप्ती: हाँ बेटा, बस बोर हो रही थी, इसलिए मूवी देखने चली आई।

राहुल की नज़र त्रिप्ती के बड़े-बड़े बूब्स पर थी, जो टॉप में कसके बंद थे।

मै: तो कैसी लगी मूवी?

त्रिप्ती: बोर थी, इसलिए उठके चली आई।

तभी राहुल के कुछ दोस्त अपनी गर्लफ़्रेंड्स के साथ वहाँ आए। राहुल को उनके सामने इज़्ज़त बनानी थी।

साहिल: हाई राहुल।

मै: हाई साहिल।

साहिल: ये ब्यूटीफ़ुल लड़की तेरी GF है क्या?

राहुल का दिमाग़ तेज़ चला। उसने बिना देरी किए अपनी हवस को अपनी ज़रूरत बना दिया।

मै: हाँ, ये मेरी GF है।

त्रिप्ती शॉक में खड़ी रहीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बोला। उनका दिमाग़ तेज़ रफ़्तार से सोच रहा था: हाँ, राहुल की GF बनना ही सही है। राहुल मेरे क़रीब रह पाएगा, और मुझे अभय और विक्की से छुटकारा मिलेगा। एक माँ के लिए ये सुरक्षा थी, लेकिन एक औरत के लिए ये एक नया रिश्ता था।

साहिल: यार, तूने इतना मस्त पटाखा पटाया और बताया भी नहीं!

राहुल ने त्रिप्ती की कमर में हाथ डाला और उसे अपने से सटाते हुए बोला। उसकी उँगलियाँ उनके कपड़ों के ऊपर से त्रिप्ती की नरम स्किन को छू रही थीं।

मै: बस अभी दो दिन ही हुए हैं पटाए हुए।

साहिल: यार, हम लोग नंदा फ़ोर्ट लेक जा रहे हैं। तुम भी अपनी GF के साथ चलो ना।

मै: क्यों नहीं? चलो!

राहुल बाइक पर बैठा और त्रिप्ती को अपने पीछे बैठने बोला। त्रिप्ती चुपचाप बैठ गईं। थोड़ी दूर बैठी थीं, एक रिस्पेक्टेबल फ़ासला रखते हुए।

मै: सॉरी मम्मी! वो दोस्तों के सामने अपनी इज़्ज़त रखने के लिए आपको अपनी GF बताया।

त्रिप्ती: कोई बात नहीं। मैं समझ सकती हूँ।

मै: ओह थैंक यू मुझे समझने के लिए।

त्रिप्ती का दिल एक पल के लिए नरम हो गया।

मै: मम्मी, थोड़ा GF जैसे चिपक के बैठो ना। ताकि मेरे दोस्तों को शक़ न हो।

त्रिप्ती: ठीक है।

त्रिप्ती थोड़ा राहुल से चिपक के बैठीं, लेकिन राहुल को अभी वो GF वाली फ़ीलिंग महसूस नहीं हुई।

मै: क्या मम्मी! मुझे अभी GF वाली कोई फ़ीलिंग महसूस नहीं हो रही।

त्रिप्ती: चिपक के तो बैठी हूँ।

मै: हाँ, लेकिन GF की तरह नहीं।

फिर त्रिप्ती थोड़ी और चिपक गईं, लेकिन राहुल को पूरी तरह चिपकना चाहिए था।

त्रिप्ती: अब ठीक है?

मै: नहीं, अभी वो बात नहीं है।

तभी राहुल ने सडनली ज़ोर से ब्रेक मारा। जिससे त्रिप्ती पूरी तरह राहुल से चिपक गईं। दोनों के बीच बिल्कुल हवा पास नहीं हो सकती थी। त्रिप्ती के भरे हुए बूब्स (जो सफ़ेद टॉप में कसके बंद थे) राहुल की पीठ पर ज़ोर से दब गए। राहुल को एक अलग ही ख़ुशी का एहसास हुआ। उसका लंड और ज़्यादा सख्त हो गया।

मै: अब फ़ीलिंग आ रही है GF की तरह!

त्रिप्ती मुस्कुरा देती हैं और राहुल की पीठ पर हल्के से थप्पड़ मारते हुए बोलती हैं।

त्रिप्ती: बड़े बदमाश हो तुम।

मै: जब इतनी ख़ूबसूरत GF साथ हो तो नॉटी बनना पड़ेगा।

त्रिप्ती: बदमाश, अभी अपनी बदमाशी देखी कहाँ है? किसी दिन मौक़ा मिलेगा तो दिखा दूँगा।

मै: नो चांस बेटा! ऐसा कोई मौक़ा मिलने से रहा!

लेकिन उसके दिल में एक आग जल रही थी।

दोनों नंदा फ़ोर्ट लेक पहुँच चुके थे। राहुल ने बाइक पार्क की। उसके पैंट में बना तंबू त्रिप्ती ने देख लिया, लेकिन उन्होंने ये सब नैचुरल है सोचकर नेग्लेक्ट किया। उनकी आँखों में अभय की छुअन का ख़ौफ़ था, जो राहुल की ग़ैरत से ज़्यादा इंपॉर्टेंट था।

त्रिप्ती आगे लेक की तरफ़ चलने लगीं। राहुल त्रिप्ती के पीछे चल रहा था। पिंक स्कर्ट में त्रिप्ती की गाँड मस्त यहाँ से वहाँ लहरा रही थी। राहुल बड़ी ग़ौर से देख रहा था।

राहुल अपने मन में सोच रहा था: वाओ! क्या गाँड है मम्मी की! दिल तो कर रहा है साली को यहीं घोड़ी बनाके गाँड में लंड डालकर मार लूँ! उसकी हवस और जवानी उसकी ममता पर हावी हो गई थी। वो पैंट के ऊपर से अपने लंड को मसल रहा था।

तभी राहुल दौड़कर त्रिप्ती के पास गया और त्रिप्ती की कमर में हाथ डालकर अपने से सटाते हुए बोला।

मै: अरे मम्मी, आप भूल गईं! आप यहाँ मेरी GF बनकर आई हो! आपको मुझसे लिपटना-जिपटना होगा, ताकि मेरे फ्रेंड्स को शक़ न हो।

त्रिप्ती: ठीक है बाबा, लिपटूँगी।

राहुल के सारे फ्रेंड्स भी लेक पर पहुँच चुके थे। राहुल और त्रिप्ती एक-दूसरे से सटके चलने लगे। राहुल ने त्रिप्ती की गाँड पर हाथ रखा और त्रिप्ती की गाँड को सहलाने लगा। त्रिप्ती ने सोचा कि राहुल सिर्फ़ एक्टिंग कर रहा है, तो नेग्लेक्ट किया।

सब लोग लेक के पास पहुँच गए। राहुल के सारे फ्रेंड्स अपनी GF को बाँहों में भरे खड़े होकर नेचर का मज़ा ले रहे थे।

राहुल ने सोचा: ये सबसे बेस्ट मौक़ा है त्रिप्ती के बदन को फ़ील करने का।

और फिर, एकदम से राहुल ने त्रिप्ती को पीछे से दबोच लिया। त्रिप्ती को लगा राहुल सिर्फ़ एक्टिंग कर रहा है। लेकिन राहुल ने त्रिप्ती को पूरी तरह बाँहों में जकड़ लिया। उसका तना हुआ लंड त्रिप्ती की गाँड के दरार में घुस गया, जिसे त्रिप्ती महसूस कर रही थीं।

त्रिप्ती का मुँह खुला का खुला रह गया। उनका पूरा जिस्म झनझना उठा। वो सोच रही थीं: ओह माय गॉड! राहुल का लंड मेरी गाँड की दरार में घुस गया! फ़ीलिंग से पता लग रहा है कि राहुल का लंड बड़ा और मोटा है!

त्रिप्ती ये सब सोच ही रही थीं कि राहुल ने त्रिप्ती की गर्दन पर किस करना शुरू किया। जिससे त्रिप्ती अपने होश खोने लगीं और अपनी आँखें बंद कर लीं।

राहुल अब पूरे पैशन के साथ त्रिप्ती की गर्दन को चूम और चाट रहा था। उसकी ज़बान त्रिप्ती के कान पर फेर रहा था, उनके गाल को चूम और चाट रहा था। अब राहुल भी एक्साइट होने लगा था। उसने त्रिप्ती की गाँड पर बैक स्ट्रोक देने लगा और अपना लंड त्रिप्ती की गाँड पर मसलने लगा।

त्रिप्ती इतनी मदहोश हो गई थीं कि वो एक अलग ही दुनिया में मज़े कर रही थीं। उनके मुँह से हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं: “इस… आह्ह्ह… उम्मन्न… आह्ह्ह… राहुल…” वो अपने बेटे का नाम नहीं, अपने नए प्रेमी का नाम ले रही थीं। राहुल तो जैसे त्रिप्ती की गाँड ही मार रहा था।

कुछ देर बाद राहुल ने पीछे से ही जकड़कर त्रिप्ती को गोद में उठाया और ले जाकर पास वाले बेंच पर त्रिप्ती को गोद में लेकर बैठ गया। राहुल का लंड अभी भी त्रिप्ती की गाँड की दरार में घुसा हुआ था।

राहुल त्रिप्ती की गर्दन को चूम और चाट रहा था। तभी राहुल ने त्रिप्ती के बूब्स टॉप के ऊपर से अपने हाथों से दबोचे और मसलने लगा। राहुल पागलों की तरह त्रिप्ती को चूम और चाट रहा था, साथ में बूब्स भी बेरहमी से मसल रहा था।

त्रिप्ती एकदम गरम हो चुकी थीं और उनके मुँह से तेज़ सेक्सी सिसकारियाँ भर रही थीं: “ईईस्स… आह्ह्ह… उम्मम… राहुल… और… आह्ह्ह…”

त्रिप्ती को पूरी तरह मदहोश देखकर राहुल ने त्रिप्ती को झाड़ियों में ले जाकर मज़े करने का सोचा। राहुल ने त्रिप्ती को गोद में उठाया और झाड़ियों के पास ले जाकर खड़ी किया।

त्रिप्ती राहुल की आँखों में देख रही थीं। दोनों की आँखों में एक अलग ही नशा था—प्योर लस्ट का नशा।

तभी राहुल अपने हाथ त्रिप्ती की गाँड पर ले गया और स्कर्ट के ऊपर से त्रिप्ती की गाँड को सहलाने लगा। त्रिप्ती आँखें बंद करते हुए सिसकने लगीं।

फिर राहुल ने त्रिप्ती की गाँड अपने हाथों से दबोचा और मसलने लगा। उसने त्रिप्ती के होठों पर होठ जड़ दिए और किस करने लगा। राहुल त्रिप्ती के होठ चूस रहा था पूरे पैशन के साथ। त्रिप्ती पूरी मदहोशी में डूबी हुई थीं।

कुछ देर बाद त्रिप्ती भी राहुल का साथ देने लगीं और राहुल के होठ चूसने लगीं। दोनों पागल प्रेमियों जैसे एक-दूसरे के होठ चूस रहे थे।

तभी राहुल ने त्रिप्ती के स्कर्ट में हाथ डाला और त्रिप्ती की गाँड पर हाथ फेरने लगा। त्रिप्ती की गाँड बड़ी मुलायम और नरम थी। जैसे ही राहुल ने त्रिप्ती की गाँड अपने हाथों से दबोची, त्रिप्ती ने अपना मुँह खोल दिया। राहुल ने अपना मुँह त्रिप्ती के मुँह में डाला और फ़्रेंच किस करने लगा। राहुल त्रिप्ती की ज़बान अपने मुँह में लेकर चूसने लगा, साथ में त्रिप्ती की नंगी गाँड भी मसल रहा था। दोनों की ज़बान आपस में टकरा रही थीं। दोनों एक-दूसरे का सलाइवा पी रहे थे।

एक लंबी, स्ट्रॉन्ग, पैशनेट किस के बाद, त्रिप्ती और राहुल होश में आए और एक-दूसरे के होठ छोड़ दिए। त्रिप्ती ने शर्म से अपनी निगाहें झुका लीं। त्रिप्ती इतनी गरम हो चुकी थीं कि अगर राहुल उसे अभी वहाँ चोद भी देता तो वो चुद जातीं।

लेकिन राहुल ने डर के मारे आगे नहीं बढ़ा। दोनों झाड़ियों से निकलकर अपने फ्रेंड्स के पास चले गए। त्रिप्ती अब पूरी तरह होश में आ चुकी थीं। वो खुद पर शर्मिंदा थीं कि उन्होंने अपने बेटे के साथ ही ऐसी हरकतें कीं जैसे कोई GF अपने बीएफ़ के साथ करती है।

साहिल: क्यों राहुल, एन्जॉय तो किया ना?

मै: हाँ यार, इतनी ख़ूबसूरत GF के साथ कौन एन्जॉय नहीं करेगा?

और राहुल ने त्रिप्ती की कमर में हाथ डालकर खुद से सटा लिया। फिर सब लोग जाने के लिए निकले। राहुल त्रिप्ती की कमर में हाथ डालकर चल रहा था। फिर राहुल ने बाइक निकाली और त्रिप्ती इस बार खुद ही पूरी तरह राहुल से चिपक के बैठ गईं। फिर वो लोग हॉस्टल के लिए निकल गए। आज त्रिप्ती को अपने बेटे के साथ सुरक्षा और सुख दोनों मिल चुके थे।

पूरे कॉलेज में त्रिप्ती और राहुल के अफ़ेयर के ही चर्चे थे। हर छात्र और टीचर की ज़ुबान पर यही बात थी कि त्रिप्ती राहुल की GF है और दोनों के बीच में घना अफ़ेयर चल रहा है। ये बात अभय और विक्की दोनों के लिए ज़हर थी। दोनों की बुरी तरह जली पड़ी थी। त्रिप्ती को पाने के जुनून में दोनों ही पागल हो चुके थे।

आज कॉलेज की तरफ़ से पिकनिक थी—एक जंगल सफ़ारी। सबको नेचर के बारे में पढ़ना था, लेकिन जवान दिलों के लिए ये मौक़ा किसी रोमांस से कम नहीं था। कॉलेज में बस पिकनिक जाने के लिए तैयार खड़ी थी।

उधर त्रिप्ती और कृति हॉस्टल के रूम में तैयार हो रहे थे।

कृति: चल ना त्रिप्ती! और कितनी देर लगाएगी? ऐसे तो हमारी बस छूट जाएगी!

त्रिप्ती: बस हो ही गया है कृति।

कृति हाथ झटकते हुए बोली—

कृति: अरे! पहले से ही तो इतनी सुंदर हो। और कितना मेकअप करोगी त्रिप्ती!

त्रिप्ती: बस हो ही गया!

कृति: वैसे ही कॉलेज के सारे लड़के तुझपे लट्टू हैं, और कितनों को करोगी?

त्रिप्ती मुस्कुराईं—

त्रिप्ती: किसीको नहीं करूँगी।

तभी त्रिप्ती तैयार होकर बाहर आईं। आज उन्होंने एक ब्राइट येलो टॉप और एक व्हाइट जींस पहना था। उनका फ़िगर 38-28-38 इस आउटफ़िट में और भी ज़्यादा सेक्सी और कसावदार लग रहा था। उनके जवान बूब्स टॉप में कसके बंद थे, और उनकी गाँड जींस में एकदम गोल दिखी दे रही थी।

कृति उसे देखती रह गईं।

कृति: माय गॉड! तुम तो बहुत सेक्सी लग रही हो त्रिप्ती!

त्रिप्ती: थैंक यू फ़ॉर कॉम्प्लिमेंट्स।

कृति: आज पता नहीं कितने लड़कों की जान जाने वाली है।

त्रिप्ती: क्यों?

कृति: तुम जो उनपे बिजलीयाँ गिराओगी!

त्रिप्ती हल्के से मुस्कुराईं और बोलीं—

त्रिप्ती: चल, देर हो रही है।

बरामदे पर अभय की हवस

त्रिप्ती और कृति कॉलेज के लिए निकल गए। जैसे ही दोनों कॉलेज पहुँचीं, सारे लड़के त्रिप्ती को ही देखने लगे। उनकी निगाहें त्रिप्ती के जिस्म पर भटक रही थीं।

त्रिप्ती: बस को निकलने में अभी टाइम है कृति। चलो ऊपर बरामदे में चलते हैं। थोड़ी हवा खाते हैं।

कृति: ठीक है, चलो।

दोनों बरामदे में गए और रेलिंग के पास खड़े हो गए, ठंडी हवा खाने लगे। उनकी पीठ बरामदे के अंदर की तरफ़ थी। इस तरह खड़े होने से त्रिप्ती की उभरी हुई गाँड जो जींस में थी, और ज़्यादा प्रॉमिनेंट हो गई।

तभी उधर से अभय आया। उसकी नज़र त्रिप्ती और कृति पर पड़ी। उसने धीरे से अपने क़दम आगे बढ़ाए।

अभय अपनी आँखों से त्रिप्ती की ख़ूबसूरती मेज़र करने लगा। उसकी आँखें त्रिप्ती के जिस्म पर आहिस्ता-आहिस्ता सफ़र कर रही थीं।

अभय मन ही मन में सोच रहा था: वाओ! त्रिप्ती को तो भगवान ने फ़ुरसत से बनाया है। जिसे शायद भगवान ने अपने हाथों से तराशा होगा। कितनी सेक्सी मुस्कान है त्रिप्ती की। कितना ख़ूबसूरत चेहरा है, और उस पर सेक्सी गुलाबी होठ! कितने रसीले हैं! दिल तो कर रहा है त्रिप्ती के होठों को चूसके सारा रस पी लूँ!

और ये सेक्सी उभरी हुई गाँड तो लाजवाब है त्रिप्ती की! ये व्हाइट जींस उसके लिए ही बनी है। दिल तो कर रहा है पीछे से जाकर पैंट फाड़के त्रिप्ती के गाँड में लंड डालकर यहीं त्रिप्ती की गाँड मार लूँ! उसका लंड तेज़ हो गया था।

अभय धीरे से त्रिप्ती के क़रीब बढ़ा और हल्के से बोला—

अभय: हाई त्रिप्ती।

त्रिप्ती अभय से ग़ुस्सा थीं क्योंकि पिछली बार उसने ज़बरदस्ती की थी। वो अभय को बिल्कुल जवाब नहीं दिया और बिना कुछ बोले वहाँ से चली गईं, कृति और अभय को छोड़कर। उनके क़दमों में ग़ुस्सा और शर्म थी।

जैसे ही त्रिप्ती सीढ़ियों से नीचे उतरीं, सामने से राहुल आया। राहुल ने त्रिप्ती को देखा तो उसकी आँखें बड़ी हो गईं। उसके होश ही उड़ गए। उसकी GF, उसकी मम्मी, आज उसकी सोच से ज़्यादा सेक्सी लग रही थीं।

राहुल तुरंत त्रिप्ती के पास आया और त्रिप्ती की कमर में हाथ डालकर उसे अपने से सटाते हुए बोला।

मै: यू आर लुकिंग सेक्सी त्रिप्ती!

त्रिप्ती अपने बेटे की बाँहों में थीं। और उनका बेटा उन्हें सेक्सी जैसे वर्ड्स इस्तेमाल कर रहा था। इससे त्रिप्ती शर्मा जाती हैं और अपनी निगाहें झुका लेती हैं। उनका जिस्म गरम हो गया।

राहुल का हाथ अपने आप त्रिप्ती की गाँड पर चला गया। वो धीरे से त्रिप्ती की गाँड पर हाथ फेरने लगा। त्रिप्ती का बेटा उनकी गाँड पर हाथ फेर रहा था, और वो उसको रोक भी नहीं सकती थीं क्योंकि अगर वो रोकेंगी तो राहुल को बुरा लगेगा और उनकी ‘GF’ वाली कहानी पर सवाल उठेंगे।

तभी राहुल त्रिप्ती की गाँड व्हाइट जींस के ऊपर से अपने हाथों से दबोचता है और मसलने लगता है। उसकी मुट्ठी कस गई थी। त्रिप्ती को उनके बेटे के हाथ का दबाव अपनी गाँड पर महसूस हो रहा था। ये एक अजीब सा मज़ा था—फ़ॉरबिडन और शर्मनाक।

कुछ देर तक राहुल जमके त्रिप्ती की गाँड मसलता है। उसकी साँस तेज़ हो गई थी।

फिर बस निकलने का टाइम हो जाता है।

मै: चलो त्रिप्ती, बस निकलने वाली है।

त्रिप्ती: हाँ चलो।

फिर त्रिप्ती राहुल के आगे चलने लगती हैं—बल्कि ये कहो कि राहुल त्रिप्ती के पीछे चलने लगता है। वो त्रिप्ती की यहाँ से वहाँ लहराती हुई गाँड को देखता है।

राहुल अपने मन में सोचता है: वाह! क्या गाँड है मम्मी की! इतनी सेक्सी गाँड तो किसी हीरोइन की भी नहीं होगी! बस मम्मी एक बार मान जाएँ, फिर तो रोज़ ही मम्मी की गाँड में लंड डालकर मम्मी की गाँड मारूँगा!

इस तरह त्रिप्ती उसकी GF बनते हुए, और ज़्यादा अपने बेटे की हवस का शिकार बन चुकी थीं। फिर सब लोग बस में चढ़ जाते हैं, एक नए जंगल सफ़र के लिए तैयार थे। ये सफ़र सिर्फ़ नेचर का नहीं, त्रिप्ती के जिस्म का भी होने वाला था।

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