खेत में बूढ़े बाबा से चुदवाई चूत!

Village Sex Antarvasna : खेत में झोपड़ी वाले बूढ़े बाबा का चूसा मोटा लंड! चूत में घुसवाकर फड़वाई अपनी नाजुक चुत! और डालवाई अपने चुत में बीज! चार दिनों तक चुदवाई!

हमारे घर से थोड़ी दूर खेतों में एक झोपड़ी में एक बूढ़ा रहता था। जब भी मैं अपनी सहेलियों के साथ घूमने जाती तो उसे देखती। बेचारा अकेला रहता था। ठंड का मौसम चल रहा था।

मैं सोचती कि उसका खाना-पीना कौन बनाता होगा। एक दिन मन में आया कि उससे बात करूँ।

मैंने अपनी एक दोस्त से कहा, “चल ना, उस अंकल से बात करते हैं।” उसने मना कर दिया और बोली, “तू ही जा। मैं चलती हूँ।” वो मुझे छोड़कर चली गई।

मैं उसकी झोपड़ी में अंदर गई। बेचारा अंधेरे में अपनी चारपाई पर लेटा था, पतला कंबल ओढ़े हुए।

मैंने कहा, “बाबा, मुझे आपसे बात करनी है। क्या मैं अंदर आऊँ?” उस समय मैंने जींस, टॉप और ऊपर जैकेट पहनी थी, सर्दी की वजह से। उसने कहा, “ठीक है बेटी, आओ। क्या बात करनी है?”

मैं अंदर गई और उसकी चारपाई पर बगल में बैठ गई। मैंने कहा, “बाबा, आपका कोई नहीं है क्या जो आप अकेले रहते हो?” उसने कहा, “मेरा कोई नहीं है। एक बेटी थी, उसकी शादी हो गई। अब मैं अकेला ही हूँ।”

मैंने पूछा, “तो आपका खाना-पीना कौन बनाता है बाबा?” उसने कहा, “बेटी, पहले तू बता कि तू यहाँ किसके यहाँ रहती है। मैंने पहले कभी नहीं देखा तुझे।”

मैंने कहा, “बाबा, मैं रमेश की बेटी हूँ। शहर में रहती हूँ। यहाँ कुछ दिनों के लिए आई हूँ। दादाजी की तबियत खराब है।”

वह बोला, “ओह… तो तू रमेश की बेटी है। मैंने तुझे बहुत छोटी देखा था बेटी।”

मैंने फिर पूछा, “बाबा, बताओ ना आपका खाना-पीना कौन बनाता है?” बाबा ने कहा, “बेटी, मैं खुद बनाता हूँ। मुझे कौन बनाकर देगा?” फिर उसने पूछा, “तू मेरे पास क्यों आई है?”

मैंने कहा, “बाबा, मैं तीन दिन से देख रही हूँ कि आप अकेले रहते हो। मुझे आप पर तरस आता है। आप इतने बुजुर्ग हो गए हैं।” वह मुस्कुराया और मेरे सिर पर हाथ फेरा।

“ओह बेटी, तू कितनी अच्छी है जो मुझ जैसे बूढ़े पर तरस खाकर मेरे हाल-चाल पूछने आई।” मैंने कहा, “धन्यवाद बाबा।”

फिर मैंने कहा, “बाबा, आपको ठंड नहीं लगती? ये कंबल कितना पतला है। ऐसी ठंड में कैसे रहते हो?” वह बोला, “बेटी, अब क्या करूँ। मैं गरीब इंसान हूँ। कहाँ तेरे पापा जितने पैसे हैं कि नया कंबल लूँ। जो है सो यही है।”

मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने कहा, “बाबा, मैं कल नया कंबल लाकर दूँगी। अब मैं चलती हूँ।” जैसे ही मैं उठी,

बाबा ने कहा, “बेटी रुक। क्या तू मुझे उठाकर वहाँ ले जा सकती है? मुझे पेशाब करना है। दो दिन से तबियत ठीक नहीं है। अगर तू मदद कर दे तो अच्छा होगा। भगवान तुझे दुआ देगा।”

मैंने कहा, “हाँ बाबा, क्यों नहीं।” मैंने हाथ आगे बढ़ाया। “आओ बाबा, मैं ले चलती हूँ।” बाबा ने भी हाथ बढ़ाया।

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मैंने उसे खड़ा किया और पास की खुली जगह की तरफ ले गई। उसने इशारा किया, “वहाँ चल।” मैंने कहा, “बाबा, यहाँ कहाँ पेशाब करने की जगह है?” वह बोला, “बेटी, मैं यहीं खुले में कर लूँगा। तू चली जा।”

मैंने कहा, “बाबा, मैं तो चली जाऊँगी, लेकिन आप कैसे वापस जाओगे?” वह बोला, “मैं चला जाऊँगा बेटी।” मैंने कहा, “नहीं बाबा, मैं यहीं रुकती हूँ। आप कर लो पेशाब। मैं आपको वापस चारपाई पर छोड़कर ही जाऊँगी।”

बाबा ने कहा, “ठीक है बेटी।” मैं वहीं खड़ी रही। उसने कहा, “बेटी, तू उधर मुँह कर ले।”

मैंने पीछे मुँह किया। बाबा ने लुंगी खोली होगी। पेशाब करने की आवाज आई। मेरी न चाहते हुए भी नजर उधर चली गई। मैंने देखा बाबा का लंड। सोया हुआ था लेकिन कितना बड़ा लग रहा था। मेरी आँखें फटी रह गईं। मैं मुड़कर देखने लगी।

बाबा ने देखा और कहा, “बेटी, पीछे मत देख। उधर ही रह।”

मैंने कहा, “बाबा, माफ करना।” फिर पीछे देखने लगी। बाबा ने पेशाब किया, लुंगी सही की और कहा, “चल बेटी।” मैंने उसे चारपाई पर बैठाया। बाबा कंबल लेकर लेट गया। मैं भी बगल में बैठ गई।

मैंने कहा, “बाबा, आपको रात में अकेले यहाँ डर नहीं लगता?” वह बोला, “बेटी, मुझ बूढ़े को कैसा डर। मुझसे कोई क्या ले जाएगा। मैं तो गरीब हूँ।”

मैंने कहा, “बाबा, आप बहुत अच्छे इंसान हो।” वह बोला, “बेटी, तू जैसी लड़की भगवान सबको दे। तूने मुझ जैसे गरीब के बारे में सोचा, मेरे पास आई, बातें कीं, मदद करने को कहा।”

मैंने जानबूझकर कहा, “बाबा, मुझे भी बहुत ठंड लग रही है। आपसे बात करना अच्छा लग रहा है। क्या मैं आपके कंबल में लेट जाऊँ?” इतना सुनते ही बाबा अजीब नजर से मुझे देखने लगा।

मैंने कहा, “बाबा, क्या देख रहे हो?” वह बोला, “कुछ नहीं बेटी। लेट जा अगर तुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।”

मुझे बाबा का लंड हाथ में लेकर देखना था। मैंने बहाना लगाया था।

बाबा ने कहा, “जब तुझे कोई एतराज नहीं तो लेट जा बेटी।” मैं बिना देर किए कंबल में लेट गई। मैंने कहा, “बाबा, आप कब से यहाँ अकेले रहते हो?” वह बोला, “बेटी, मैं तो चार साल से यहाँ अकेला हूँ।”

मैंने पूछा, “बाबा, आप कहीं और क्यों नहीं रहते? आपका कहीं घर होगा ना जहाँ पहले रहते थे?” उसने बताया, “बेटी, जब बेटी की शादी की तो वो बेचकर शादी की। अब मेरा सब कुछ यही है।”

बातों-बातों में मैंने हाथ बाबा के लंड पर रख दिया। बाबा ने कुछ नहीं कहा।

मैंने कहा, “बाबा, मेरा भी यहाँ आकर मन नहीं लगता। जब तक यहाँ हूँ रोज आपके पास आ जाया करूँगी। आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?” बाबा ने कहा, “नहीं बेटी। जब तेरा मन करे आ जाना।”

मैंने कहा, “धन्यवाद बाबा।” और बाबा का लंड पकड़ लिया।

बाबा बोला, “बेटी, ये क्या कर रही हो?” मैंने कहा, “बाबा, कुछ भी तो। मैंने क्या किया?” वह बोला, “अपना हाथ हटाओ वहाँ से। ये अच्छी बात नहीं है बेटी।”

मैंने कहा, “बाबा, कुछ नहीं होता। रहने दो ना।” बाबा ने कहा, “बेटी, मैं तुझसे बहुत बड़ा हूँ उम्र में। ये मत करो। तुम परेशान हो जाओगी।” मैंने कहा, “बाबा, मैं कैसे परेशान हो जाऊँगी? मैं आपकी बात नहीं समझी।”

बाबा ने मेरी तरफ देखा और कहा, “बेटी, तू नहीं समझेगी।” मैंने कहा, “बाबा, प्लीज समझाओ ना।” और बाबा का लंड पकड़कर मसल दिया। बाबा का लंड खड़ा होने लगा था। बाबा ने कहा, “बेटी, रहने दो।”

मैंने कहा, “बाबा, मुझे आपका लंड देखना है।” बाबा ने कहा, “बेटी, कोई आ जाएगा। यहाँ खुला है। कैसे देखोगे?” मैंने कहा, “बाबा, आपके पास कोई जगह होगी। वहाँ चलो। बस मुझे देखना है आपका लंड।”

बाबा ने कहा, “अच्छा, एक जगह है बेटी। लेकिन अभी रात होने वाली है। तू घर चली जा। नहीं तो तेरे घर वाले फिक्र करेंगे।” मैंने कहा, “बाबा, आप उसका मत सोचो। मुझे फोन आएगा तो कह दूँगी कि सहेली के घर हूँ।”

बाबा ने कहा, “अच्छा ठीक है। मेरे पीछे-पीछे आ जा।” बाबा ने मुझे कंबल से बाहर जाने को कहा। मैं बाहर आई। बाबा भी बाहर आया। मैंने देखा बाबा का लंड पूरा खड़ा था, तना हुआ।

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बाबा झोपड़ी के पीछे की तरफ चलने लगा। मैं भी पीछे-पीछे चली। थोड़ी दूर जाने के बाद एक खेत के अंदर ले गया। कहा, “बेटी, यहाँ कोई नहीं आएगा।”

मैंने कहा, “अच्छा बाबा।” वह बोला, “हाँ बेटी।” मैं बाबा के पास आई और कहा, “बाबा, मुझे आपका लंड दिखाओ ना।”

बाबा ने कहा, “बेटी, कभी किसी को कहना मत। नहीं तो तेरा पापा मुझे मार डालेगा।” मैंने कहा, “नहीं बाबा, मैं कभी किसी को नहीं कहूँगी।”

बाबा ने लुंगी खोल दी। बस चड्डी में आ गया। मैंने चड्डी के ऊपर से लंड देखा। पूरा फूला हुआ दिख रहा था। मैंने बाबा के कंधे पर एक हाथ रखा और दूसरे हाथ से चड्डी के ऊपर से लंड दबाया। बाबा ने कहा, “बेटी, लेट मत कर। जो करना है, देखना है जल्दी देख ले।”

मैंने कहा, “हाँ बाबा।” और चड्डी में हाथ डाल दिया। लंड पकड़ लिया। बाबा ने हाथ मेरे सिर पर रखा और मुझे घुटनों के बल बैठा दिया। मैं समझ गई कि बाबा मेरे मुँह में लंड देना चाहता है। मैं पहले भी तीन लोगों से चुदवा चुकी थी।

जब मैं घुटनों के बल बैठी तो बिना देर किए बाबा की चड्डी नीचे की। लंड तना हुआ आजाद हो गया। मैंने हाथ में पकड़कर देखा और होंठों से किस किया। बाबा के मुँह से “स्स्स…” की आवाज निकली।

मैंने लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। पूरा नहीं आ रहा था। आधे से थोड़ा ज्यादा ही मुँह में जा रहा था। मैं उतना ही चूस रही थी। चूस-चूसकर गीला कर दिया। बाबा का लंड पूरा खड़ा हो चुका था।

बाबा ने कहा, “बेटी, खड़ी हो जा।” मैं खड़ी हो गई। बाबा ने लुंगी को चादर बनाकर खेत में बिछा दिया। कहा, “नंगी हो जा।” मैंने सिर हिलाया और सारे कपड़े उतारकर ब्रा-पैंटी में आ गई। बाबा भी पूरा नंगा हो गया। कुर्ता उतार दिया।

बाबा ने ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाना शुरू किया। किसी जानवर की तरह दबा रहा था। मैंने कहा, “बाबा, आराम से करो। मैं कहीं भागी नहीं जा रही।”

बाबा ने कहा, “बेटी, तेरी जैसी जवान चूत मुझे मिली है। मुझ पर काबू नहीं हो रहा।” उसने जल्दी से ब्रा उतार दी और मेरे बूब्स पर टूट पड़ा। एक-एक करके चूसने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं जन्नत के सपने देखने लगी।

बाबा बूब्स चूसते-चूसते धीरे-धीरे मेरे पेट पर आ गया और चाटने लगा।

मेरे मुँह से “आह्ह… आह्ह…” की सिसकारियाँ निकल रही थीं।

मैं अपने बूब्स पर हाथ फेरती हुई पेट चटवा रही थी। बाबा मेरी नाभि चाटने लगा। मुझे कुछ होश नहीं रहा। आँखें बंद करके मजा ले रही थी।

बाबा ने धीरे-धीरे मेरी पैंटी उतार दी। मुझे पता ही नहीं चला। उसने एक उँगली मेरी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। मैंने कहा, “रुको बाबा।” बाबा ने कहा, “बेटी, अब लेट जाओ।”

मैंने लुंगी पर लेट गई। बाबा का लंड मेरी नजर में आया। काला नाग लग रहा था। मेरी चूत के लिए सलामी दे रहा था। बाबा ने मुझे लिटाया। मेरी टाँगें खोलीं। मुँह मेरी चूत के पास लाया। ज्यादा थूक दिया और कहा,

“बेटी, चिल्लाना नहीं। कोई आ जाएगा तो सब मिलकर मुझे मार देंगे।”

मैंने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। बाबा ने फिर थूक दिया। लंड हाथ में लेकर मेरे ऊपर आ गया। चूत पर लगाया। सुपारा चूत पर रगड़ने लगा।

मेरी चूत गीली हो चुकी थी, उसके थूक से और मेरे पानी से भी। बाबा ने एक बार लंड हटाया, फिर थूक दिया और चूत के पास लाया। कहा, “बेटी, चिल्लाना नहीं बस।”

मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया। बाबा ने एक धक्का मारा। लंड फिसल गया। फिर से लगाया और हाथ से पकड़े हुए एक और धक्का मारा। लंड मेरी चूत में घुस गया। मेरी जान निकल गई। चीख निकल गई।

“ओह्ह्ह… मम्मी… मर गई…” बाबा ने जल्दी से मेरे मुँह पर हाथ रखा और रुक गया। कहा, “बेटी, मत चिल्लाओ। सारा मजा खराब करेगी।”

मैंने सिर हिलाया। कहा, “अब नहीं होगा।” बाबा ने फिर एक धक्का दिया। लंड और अंदर जा रहा था। मेरी जान निकल रही थी। धीरे-धीरे बाबा ने पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

मुँह से हाथ हटाया और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। जब दर्द कम हुआ तो स्पीड बढ़ा दी। मेरी चुदाई करने लगा। धक्के पर धक्के दे रहा था।

मैं “आह्ह… आह्ह… उआआह… आह्ह…” की आवाजें निकाल रही थी।

बाबा के सिर पर हाथ फेर रही थी। बाबा एक हाथ से मेरे बूब्स दबा रहा था। मुझे आज चुदाई का पूरा मजा आ रहा था। बाबा मेरे होंठों को चूमने लगा। चुदाई करते जा रहा था।

कुछ देर बाद बाबा ने लंड बाहर निकाला और मेरे मुँह के पास लाया। इशारा किया चूसने को। मैंने हाथ में पकड़ा और चूसने लगी।

“मुआआह… मुआआह… आह्ह… चुप्प…” करके चूस रही थी। एक हाथ से लेटी-लेटी अपनी चूत सहला रही थी। मेरी चूत एक बार मान छोड़ चुकी थी।

बाबा ने लंड मेरे मुँह से निकाला और चूत के पास ले आया। फिर चूत में पेल दिया और चुदाई में लग गया। धक्के पर धक्के लगा रहा था।

सात-आठ मिनट चुदाई के बाद अपना सारा माल मेरी चूत में छोड़ दिया। लंड बाहर निकाला और माल से लिपटा हुआ लंड मेरे मुँह के पास लाया। होंठों पर रखा।

पहले मैंने मना किया मुँह में लेने से।

वह कहने लगा, “बेटी, इतना किया तो इसे भी ले ले। मेरे दिल को खुशी मिलेगी।” मैंने सुना और लंड मुँह में ले लिया। चूस-चूसकर साफ किया। वह खड़ा हुआ। चड्डी पहनी, कुर्ता पहना और मुझे खड़ी होने को कहा।

मैं खड़ी हुई। उसने कहा, “जल्दी कपड़े पहन और चलो यहाँ से।”

मैंने कपड़े पहने। बाबा ने लुंगी पहनी। हम वहाँ से चलने लगे। बाबा आगे, मैं पीछे। मैंने कहा, “बाबा, मैं कल भी आ जाऊँ? आपके साथ पास चलेगा ना?” बाबा ने कहा, “हाँ बेटी। जब-जब तेरा मन करे आ जाना मेरे पास।”

मैं अपने घर चली गई। बाबा अपनी झोपड़ी में चला गया।

अगले दिन भी मैं उसके पास गई। ऐसे मैंने उसके साथ पूरे चार दिन चुदाई की जब तक मैं वापस नहीं लौटी।

दोस्तों, कैसी लगी मेरी चुदाई की कहानी बूढ़े बाबा के साथ? ये मेरी सच्ची दास्तान है। मुझे बाबा से चुदवाकर बहुत मजा आया था। अब जब भी मौका मिलेगा मैं उनसे फिर चुदवाऊँगी।

जिसको मेरी कहानी अच्छी लगी हो मुझे ईमेल करके बताना जरूर।

मेरा ईमेल आईडी है: Chandanii2808@gmail.com

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