मम्मी की चूत के बाल 3

Maa Beta Kamukta Hindi Sex Story:- दोस्तों नेक्स्ट डे मैं उठा, तो मम्मी फिर भी मुझसे नहीं बोल रही थीं। पर आज उन्होंने मेरे लिए खाना बनाया था, मम्मी एकदम नहा-धो कर सजी-धजी हुई थीं।

Agar is story ka pichla part nhi padha to yahan padhen ==> मम्मी की चूत के बाल 2

मम्मी की गांड देखने लायक थी, और वो अपना काम कर रही थीं। मैं मम्मी को देख रहा था, और वो गुस्से में थीं। पर आज बार-बार मुझे मम्मी की गांड देखने का मौका मिल रहा था।

क्योंकि वो बार-बार मेरे सामने झुक रही थीं, जिस वजह से उनकी साड़ी ऊपर होती और मुझे उनकी गांड दिख जाती थी। धीरे-धीरे माँ अपना सारा काम करने लग गईं, फिर रात हो गई।

दोस्तों मैं मम्मी का वेट करने लग गया, कि आज कुछ और होगा। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, उस रात मम्मी मेरे रूम में आई ही नहीं। और मैं अपना लंड हिला कर सो गया, उसके बाद 2 दिन तक मम्मी मेरे रूम में नहीं आईं।

और आज तीसरा दिन था, और आज करवा चौथ का दिन था, मम्मी के हाथों में मेहंदी और पैरों में पायल और गले में मंगलसूत्र डाला हुआ था। उनके माथे पर लाल सिंदूर और हाथों में उन्होंने बहुत सारी लाल चूड़ियां और कंगना डाला हुआ था।

आज मम्मी ने सितारों वाली ब्लैक स्लीवलेस साड़ी पहनी हुई थी, जो कि बैकलेस थी। मम्मी की गांड की फांक अलग ही लग रही थी, मम्मी की हाइट इतनी नहीं थी। पर फिर भी मम्मी गदराई हुई औरत लग रही थीं।

मम्मी आज बहुत खुश लग रही थीं, जब पापा नाश्ता कर रहे थे, तब वो भी आज मम्मी को देखते ही रह गए। फिर वो नाश्ता करके अपने काम पर चले गए।

मम्मी – आज जल्दी आ जाना।
पापा – ठीक है।

मुझे पता था, कि हर साल की तरह आज मम्मी-पापा की चुदाई होने वाली है। आज के दिन हर औरत अपनी टांगें फैलाती है, आज तो मेरा कोई चांस ही नहीं लग रहा था।

उसके बाद मैं घर से बाहर दोस्तों के साथ खेलने चला गया। उसके बाद मैं शाम को घर आया, तो जब तक पापा घर आ चुके थे। मम्मी किचन में पकवान बना रही थीं।

मम्मी ने अब अपनी साड़ी चेंज कर ली थी, मम्मी ने और एक खूबसूरत साड़ी पहन ली थी। मम्मी ने पूजा करी और करवा चौथ की कहानी पढ़ी, मम्मी आज बला की खूबसूरत गदराई हुई लग रही थीं।

फिर पापा रूम में गए और फिर मम्मी और फिर मुझे रूम बंद होने की आवाज आई। मैं समझ गया कि अब गेम शुरू हो गई है, कुछ देर बाद मैं भी अपने रूम से उठा और बाहर गया।

मैं मम्मी-पापा के रूम के डोर पर पहुंचा तो उनका डोर बंद था। मैंने डोर पर अपना कान लगाया और मैं ध्यान से अंदर की आवाज सुनने लग गया। मुझे माँ की चूड़ियों की खन-खन की आवाज आ रही थी।

मैं समझ गया कि पापा मम्मी की चुदाई कर रहे हैं, और कुछ 10 मिनट तक मैं वहां खड़ा रहा। फिर मैं अपने रूम में आ गया, और अपना लंड निकाल कर मैं हिलाने लग गया।

मैं अपने माइंड में इमेजिन करने लग गया, कि माँ किस पोजीशन में चुदाई करवा रही होंगी। दोस्तों मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी, इसलिए मैं फिर से उठा और उनके रूम के पास गया और अपने कान उनके डोर से लगा लिए।

अभी मुझे वो आवाज आ रही थी, मुझे लगा कि आज तो दबा कर चुदाई हो रही है। शायद ये उनका दूसरा राउंड होगा, मैं वहीं दरवाजे पर खड़ा हो कर अपना लंड हिलाने लग गया।

फिर मैं अपने रूम में आ गया, अब मुझे 15 मिनट अपने रूम में आए हुए हो गए थे। तभी बाहर से रूम खुलने की आवाज आई और मुझे लगा कि अब उनका प्रोग्राम खत्म हो गया है।

मम्मी शायद वॉशरूम में गई होंगी, मैं ये सब सोच रहा था। पर अब तक 15 मिनट उनका रूम खुले हुए हो चुके थे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, इसलिए मैं बाथरूम के बहाने अपने रूम से बाहर गया।

और मैं जाते हुए उनके रूम पर नजर डाली, मैंने देखा उनका डोर खुला हुआ था। और मम्मी एक साइड में लेटी हुई थीं, और पापा दूसरी साइड खर्राटे मार रहे थे।

फिर मैं रूम में आ गया और वेट करने लग गया। दोस्तों अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था, और मैंने हिम्मत करके आज डिसाइड किया। फिर मैं बेड से उठा और सीधा धीरे-धीरे बाहर से मम्मी के रूम में देखने लग गया।

पापा अभी भी खर्राटे ले रहे थे, मम्मी साइड में लेटी हुई थीं। फिर मैं धीरे से रूम में गया, और मम्मी को देखने लग गया। मम्मी चूत चुदा कर सोई हुई थीं, मम्मी की साड़ी उनके घुटनों तक थी।

मैंने कुछ देर मम्मी को ऐसे ही देखा और फिर मैंने हिम्मत करी। और मैंने मम्मी की साड़ी को थोड़ा और ऊपर कर दिया। करीब 15 मिनट हो गए थे, अब मुझसे और मेरे लंड से और काबू नहीं हो रहा था।

दोस्तों अब मैं फिर से उठा और फिर से धीरे से मम्मी के रूम में गया, और मैंने मम्मी की साड़ी उनकी जांघों पर कर दी। मैंने अपना हाथ मम्मी की जांघों पर चलाना शुरू कर दिया।

मम्मी ने एकदम से हरकत करी और वो चौंक गईं, और फिर मैं जल्दी से वहां से भाग आया। अब मेरा दिल धक-धक करने लग गया, फिर 20 मिनट बाद मुझे फिर से बेचैनी होने लग गई।

मैं फिर से उठा और फिर से मॉम के रूम में गया। अभी भी मम्मी की साड़ी वहीं पर थी, फिर मैंने इस बार हाथ साड़ी के अंदर डाला और उनकी साड़ी को मैं ऊपर तक ले गया।

अब मैं मम्मी की चूत को जोर-जोर से रगड़ रहा था, मम्मी एकदम से उठ गईं। उन्होंने पापा की तरफ देखा, तो वो दूसरी साइड आराम से सो रहे थे। अब मैं जब भागने वाला था, तो मम्मी ने मेरे गाल पर चांटा मारा।

मैं जल्दी से वहां से भाग आया और डरने लग गया। अब सोचने लग गया कि अब मेरे साथ क्या होगा, करीब 10 मिनट बाद मुझे मेरे रूम में पायल और चूड़ियों की आवाज आई।

मेरा दिल अब जोर-जोर से धक-धक करने लग गया, मम्मी एकदम से रूम में आईं और उसने अंदर से रूम बंद कर लिया। फिर वो मेरे साइड में मेरे पास आ कर मेरे कान खींच कर मुझे घूंसे मारने लग गईं।

दोस्तों इस टाइम मैं एकदम नंगा था और मैंने अपना अंडरवियर भी उतार रखा था। मम्मी ने कुछ देर मुझे बजाया और फिर वो मेरी बगल में बेड पर लेट गईं।

फिर मम्मी का एक हाथ मेरी जांघ से होता हुआ मेरे लंड पर आ गया। और वो मेरे खड़े लंड को पकड़ने लग गईं। दोस्तों जब मैंने आंख खोली तो मैंने मम्मी को ध्यान से देखा।

मम्मी मेरे पास साड़ी उतार कर आई थीं, और उसने ऊपर ब्लाउज और नीचे पेटीकोट डाला हुआ था। दोस्तों आखिरकार अब मैं कामयाब हो रहा था, क्योंकि माँ मुझसे अपना करवा चौथ मनाने आई थीं।

मम्मी के हाथ में मेरा लंड था, और वो मुझे गाली देते हुए बोलीं – जो करना है करले कुत्ते, बड़ी आग लगी है ना तुझमें, हरामजादे मरेगा तू कुत्ते। अपनी ही माँ भी नहीं छोड़ा तूने तो।

फिर मम्मी मेरे खड़े लंड को हिलाती रहीं, और मैं कुछ नहीं बोला। फिर मैं अपना हाथ उनकी जांघ पर ले गया, और मैं उसको सहलाने लग गया। फिर मैं धीरे-धीरे ऊपर चूत तक पहुंच गया।

मैं मम्मी की झांट के बाल सहलाने लग गया, मम्मी ने कुछ नहीं कहा। मम्मी का हाथ अभी भी मेरे लंड पर चल रहा था। मैं खड़ा हुआ और मैं अब मम्मी के ऊपर आ गया।

फिर मैं अपना मुंह मम्मी के मुंह में डालने लग गया। मम्मी ने विरोध किया और वो अपना मुंह इधर-उधर करने लग गईं। पर मैंने अपना मुंह उनके मुंह में दे दिया, और मैं उनके होंठों को चूसने लग गया।

मम्मी भी अब मेरा साथ दे रही थीं, तभी भी मेरा एक हाथ मम्मी की चूत को सहला रहा था। मैंने अपनी 2 उंगलियां उनकी चूत में डाल दीं और मम्मी की सिसकारियां निकलने लग गईं।

अब मैं भी अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लग गया, जिससे मम्मी भी उत्तेजित हो गईं और वो मेरा पूरा साथ देने लग गईं। अब मम्मी और मैं एक-दूसरे में समाए हुए थे।

एक हाथ मैंने अब उनके बूब्स पर रखा और मैं उनके बूब्स को फुटबॉल की तरह मसलने लग गया। मम्मी अब जोर-जोर से सिसकारियां लेने लग गईं, फिर मैं मम्मी के ऊपर बैठ गया।

अब मेरा लंड उनके बड़े-बड़े दो बूब्स के बीच में था। अब मैं अपना लंड बीच में रगड़ते हुए आगे-पीछे करने लग गया।

मैं – मम्मी अब इसे मुंह में ले लो।

मम्मी अपने ड्रामे करने लग गईं, और मैं बोला – मुझे पता है जब तुम मेरे रूम में आती थीं।

ये सुन कर मम्मी शर्मा गईं और हंसते हुए मेरे गाल खींचने लग गईं। फिर मैं बेड पर खड़ा हुआ और मम्मी भी बैठ गईं। उसके हाथ में मेरा लंड था, और एक ही बार में उसने अपना पूरा मुंह खोल कर मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया।

मैं अब जिंदगी की मौज में था, और ये रात मेरी लाइफ की सबसे खूबसूरत रात थी। मम्मी बड़े मजे से मेरा लंड चूस रही थीं, उसके मुंह से थूक गिर रहा था।

कुछ देर बाद मम्मी ने लंड बाहर निकाला और वो बेड पर अपनी टांगें फैला कर लेट गईं। अब मेरे सामने मम्मी का भोसड़ा था, मुझे उसे चाटने का बहुत मन हो रहा था।

तभी मैं नीचे बैठा और एकदम से बाहर से पापा की आवाज आई। पापा मम्मी का नाम ले कर पुकार रहे थे, और तभी ये सुन कर मेरी और मम्मी की गांड फट गई।

मम्मी थोड़ी देर बाद बोलीं – आ रही हूँ मैं अमित के रूम में हूँ, उसे बुखार चढ़ गया है मैं उसको दवाई देने आई थी।

फिर मैं भी खर्राटे लेने लग गया, जैसे मुझे सच में बुखार हो गया हो। फिर मुझमें और मम्मी में आगे कुछ करने की हिम्मत नहीं बची थी। फिर कुछ देर बाद मम्मी ने मेरे रूम का डोर खोला और वो मेरे रूम में से नंगी ही बाहर चली गईं।

क्योंकि अंधेरा था और पापा को अंधेरे में क्या पता चलना था, कि मेरी माँ नंगी हैं या उसने कपड़े डाले हुए हैं। फिर कुछ देर बेडरूम का दरवाजा बंद हुआ और तब पापा जागे हुए थे।

शायद पापा ने एक बार फिर से माँ को चोदा होगा। दोस्तों अभी कहानी जारी है, अगले पार्ट में आपको और भी मजा आएगा।

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