Maa ki college bus me chudai kahani:- बस कॉलेज के कैंपस से निकल चुकी थी। अंदर का माहौल किसी बंद भट्ठी की तरह गरमा-गरमी का था। कॉलेज बस, जिसके हर कोने-कोने स्टूडेंट्स से ठसा हुआ था, तेज़ी से आगे बढ़ रही थी। भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि हवा को भी साँस लेने की जगह मुश्किल से मिल रही थी। कुछ नए और बेचारे स्टूडेंट्स को खड़ा रहना पड़ा था, और उन्हीं में एक थीं त्रुप्ति खन्ना—जिनकी ख़ूबसूरती और उम्र का राज़ (कि वो 42 साल की हैं और 21 साल के राहुल की माँ हैं) सिर्फ़ दो ही लोग जानते थे।
kahana ka pichla part yaha padhen ==> माँ बनी क्लाससमेट 2
Maa ki college bus me chudai hindi sex story
त्रुप्ति, एक सफ़ेद जींस और टाइट टॉप में, सबसे पिछले हिस्से में खड़ी थीं। उनका ध्यान अपनी सामने खड़ी शीतल से हो रही हल्की-फुल्की बात-चीत में था। उनके चेहरे पर अभी भी एक मासूमियत भरी मुस्कान थी, कॉलेज के नए माहौल में घुल-मिल जाने की बेचैनी और ख़ुशी। मगर उन्हें बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि उनकी खड़ी होने की पोज़िशन उनके लिए एक नया ख़तरा खड़ा कर रही थी।
उनके ठीक पीछे, बस की आख़िरी सीट पर, शैतानी और हवस का केंद्र—विक्की अपने दोस्तों के साथ बैठा था। भीड़ की वजह से त्रुप्ति और विक्की के बीच का फ़ासला नगण्य हो चुका था। और इस फ़ासले का फ़ायदा उठा रहा था विक्की। उसकी आँखें त्रुप्ति की गाँड पर टिकी हुई थीं। त्रुप्ति की गोल, सुडौल गाँड, जो उस सफ़ेद जींस में और भी ज़्यादा कस कर उभर के बाहर निकली हुई थी, सीधे विक्की की नज़रों की रेंज में थी। हर झटके पर त्रुप्ति का जिस्म हिलता, और उनकी गाँड का शेप और भी ज़्यादा आकर्षक लगता।
विक्की के दिमाग़ में अश्लील ख़यालों की आँधी चल रही थी। वो त्रुप्ति की गाँड की गहराइयों को ग़ौर से घूर रहा था, उसके मन में सिर्फ़ एक ही बात गूँज रही थी:
विक्की (मन में): क्या लाजवाब गाँड है साली त्रुप्ति की! भगवान ने इसे फ़ुरसत में और बड़े प्यार से तराशा है। मैंने आज तक ऐसी सेक्सी, उभरी हुई गाँड किसी भी कॉलेज की लड़की की नहीं देखी है। इसकी गाँड में अपना कड़क लंड डालकर मारने में कितना बड़ा मज़ा आएगा! लेकिन ये साली, जिसको राहुल अपनी गर्लफ्रेंड बताता है, इतनी आसानी से तो मुझे अपना जिस्म छूने नहीं देगी। मुझे इसे भी बाक़ी शिकारों की तरह अपनी हवस का निशाना बनाना होगा, इसे मजबूर करना होगा। फिर तो जाकर, ज़बरदस्ती, इसे अपने नीचे दबोचके गाँड मारूँगा! पर अभी… अभी तो त्रुप्ति की गाँड के मज़े ले लेने चाहिए—क्या पता दोबारा इतना सुनहरा चांस मिले न मिले!
ये सोचकर, जुनून से भरा हुआ और हवस में डूबा हुआ विक्की तुरंत अपनी सीट से उठा। उसने अपने दोस्तों को आँख से इशारा किया और चुपके से त्रुप्ति के ठीक पीछे जाकर खड़ा हो गया। बस के हल्के घूमने और झटके लेने का बहाना बनाते हुए, उसने नज़दीक से त्रुप्ति की उभरी हुई गाँड को ग़ौर से देखा। और फिर, बिना किसी सोच-विचार के, उसने धीरे से अपना गरम हाथ त्रुप्ति की गाँड पर रख दिया। वो अपने पंजे से उनकी गाँड के सॉफ्ट-कर्व को सहलाने लगा, उसकी हवस की आग और तेज़ हो चुकी थी।
उसी पल, त्रुप्ति को पीठ पर किसी का अनचाहा स्पर्श महसूस हुआ। एक पल के लिए उनके जिस्म में करंट दौड़ गया। वो तुरंत मुड़कर देखती हैं और विक्की को अपने इतने क़रीब देखकर चौंक जाती हैं। उनका चेहरा गुस्से और डर के मिश्रण से लाल हो गया। उन्होंने तेज़ी से विक्की का हाथ हटाया और गुस्से से अपनी आवाज़ को कंट्रोल करते हुए बोलीं:
त्रुप्ति: क्या बदतमीज़ी है! दूर रहो! सीधे खड़े रहो!
विक्की ने त्रुप्ति के गुस्से को नज़रअंदाज़ किया। उसके चेहरे पर एक शैतानी, विश्वास से भरी मुस्कान थी, जबकि उसकी आँखों में सिर्फ़ हवस और जीत का भाव था।
विक्की: अरे डार्लिंग, हमारे हाथ में क्या काँटे हैं जो तुम छूने नहीं देतीं? और राहुल और अभय के हाथ क्या घी से बने हैं जो तुम्हें छूते हैं तो मज़ा आता है? जब वो दोनों इसे सहला सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?
बिना त्रुप्ति को मौका दिए, विक्की ने उनके पीछे से त्रुप्ति को अपनी मज़बूत बाँहों में भर लिया। त्रुप्ति उसके ग्रिप में फँस गईं, वो घबराहट और अकेलापन महसूस कर रही थीं। उनका जिस्म, उनकी आत्मा का हर अंश प्रोटेस्ट कर रहा था, पर विक्की की पकड़ मज़बूत थी। उसकी ये हरकत देखकर उनके सामने खड़ी शीतल हड़बड़ाकर पीछे मुड़कर देखती हैं।
विक्की ने शीतल को घूरा, उसकी आँखों में निरा धमकी थी। उसने धीरे से, शीतल को सुनाते हुए बोला:
विक्की (धीरे से): क्या देख रही है? जो मैंने तेरे साथ किया है, आज उसका अनुभव त्रुप्ति लेगी! और याद रहे, आगे ध्यान रख! कोई हमें देख न पाए, वरना तू भी मरेगी, और त्रुप्ति की बदनामी भी होगी!
शीतल, विक्की के पिछले अत्याचारों से डरकर, तुरंत अपनी आँखें फेर लीं। उसकी आँखों में बेबसी और डर साफ़ दिख रहा था, उसने चुपचाप आगे देखना शुरू कर दिया।
त्रुप्ति, फँसावट महसूस करते हुए, धीरे से और घबराहट भरी आवाज़ में बोलीं:
त्रुप्ति: विक्की, छोड़ो मुझे! तुम्हारे मन में क्या चल रहा है! वरना मैं चिल्लाऊँगी!
विक्की हँसा। उसकी हँसी में घृणित जीत का एहसास था।
विक्की: तो चिल्ला! तेरी ही बदनामी होगी, डार्लिंग! सबको पता चल जाएगा कि तेरा बेटा (जिसको वो राहुल की गर्लफ्रेंड समझता है) और उसका दोस्त तुझे कैसे छू चुके हैं! ये कॉलेज है, यहाँ सबको सच का पता चला तो शेम-शेम हो जाएगा! और राहुल क्या सोचेगा कि उसकी गर्लफ्रेंड बस में चिल्ला रही है!
त्रुप्ति की गहरी सोच ने उन्हें एक पल के लिए रोक दिया। उनके दिमाग़ में तीव्र संघर्ष शुरू हो गया। “विक्की सही कह रहा है,” उन्होंने सोचा। “मैं चिल्लाऊँगी तो ये लोग मदर-सन की बदनामी नहीं करेंगे, पर ये तो राहुल की गर्लफ्रेंड की बदनामी करेंगे, वो भी बस में। और अगर किसी तरह सच (कि मैं उसकी माँ हूँ) सामने आया तो मैं अपने पति और बेटे को क्या जवाब दूँगी? क्या यही मेरे अधूरे सपने पूरे करना था?”
उनका गुस्सा, उनके आदर्श और मजबूरी के आगे दब गया। उन्होंने अपनी हार मान ली।
विक्की ने उनकी चुप्पी से अपनी जीत महसूस की। उसने धीरे से, शैतान की तरह उन्हें धमकाया:
विक्की: अब सीधी तरह मुझे कोऑपरेट कर। वरना मैं तेरा पैंट नीचे करके, यहीं बस में तेरी गाँड मार लूँगा! और अगर तू कोऑपरेट करेगी तो… सिर्फ़ तेरी गाँड से खेलूँगा। तेरी इज़्ज़त बच जाएगी। फ़ैसला तेरा!
त्रुप्ति का डर अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। उनके पूरे जिस्म में ठंडक सी दौड़ गई। उनकी आँखों के सामने विक्की की गंदी हरकतें घूम गईं। अगर उन्होंने कोई हरकत की तो विक्की यहीं बस में उनकी गाँड मारेगा, और उनकी बदनामी पूरे कॉलेज में फैल जाएगी। उनके पास और कोई रास्ता नहीं बचा था।
एक मजबूर, बेबस, और हारा हुआ स्वर उनके गले से निकला।
त्रुप्ति: ठीक है, खेलो… पर ध्यान से, कोई देख न पाए।
इस इजाज़त के बाद, विक्की के चेहरे पर हवस की एक बुरी मुस्कान फैल गई। उसने अपने हाथ को त्रुप्ति की गाँड पर और कस कर दबा दिया। वो अब अपने लंड की गर्मी त्रुप्ति की गाँड के बीच महसूस कर रहा था। त्रुप्ति आँखें बंद करके खड़ी रहीं, अपने जिस्म और अपने माँ होने की इज़्ज़त की हार को चुपचाप से सह रही थीं।
विक्की के हुक्म और त्रुप्ति की बेबस इजाज़त सुनते ही, विक्की के अंदर की हवस एकदम से उफान मार गई। उसके चेहरे पर अब ख़ुशी और दरिंदे की मुस्कान थी। उसने देर न करते हुए, त्रुप्ति को और कस कर अपनी तरफ़ खींच लिया।
विक्की ने तुरंत त्रुप्ति की गर्दन को चूमने और चाटने लगा। उसका गरम साँस त्रुप्ति की नरम स्किन पर पड़ रहा था, जिससे त्रुप्ति की रूह में सिहरन दौड़ गई। वो त्रुप्ति के कान और गाल को भी बुरी तरह से चूम और चाट रहा था, जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार को चाट रहा हो। त्रुप्ति ने अपनी आँखें भींच ली थीं, चुपचाप, बेबसी से, ये सब करवा रही थीं, उनकी ज़ुबान पर उनकी बदनामी का ताला लगा हुआ था।
विक्की के हाथ भी शांत नहीं थे। उसने त्रुप्ति की नंगी पीठ (जो टॉप और जींस के ऊपर से आराम से अवेलेबल थी) को चूमने और चाटने लगा। उसकी गरम ज़ुबान त्रुप्ति की सॉफ्ट स्किन को छू रही थी। साथ ही, विक्की त्रुप्ति की गाँड पर लंड भी मसलने लगा—पैंट के ऊपर से। त्रुप्ति ने होंठ दाँतों में दबोच लिए, उनके दिमाग़ में सिर्फ़ घीन और डर का माहौल था।
विक्की (बड़े हवस-भरे स्वर में): बड़ा टेस्टी बदन है तेरा त्रुप्ति! और बड़ी मादक ख़ुशबू है तेरे जिस्म की, डार्लिंग। तुझे तो बस नंगा करके चाटने का दिल करता है।
विक्की ने त्रुप्ति की पीठ को अच्छी तरह चूम और चाट कर अपनी पीठ की हवस शांत की। फिर वो नीचे घुटनों पर बैठता है (बस में भीड़ का फ़ायदा उठाते हुए) और त्रुप्ति की गाँड पर हाथ फेरने लगता है, उनकी गाँड की गोलाई को महसूस करता है।
विक्की: वाह! क्या गाँड है तेरी त्रुप्ति! किसी हीरोइन की तरह है ये चूतड़!
और फिर, बिना किसी शर्म के, उसने त्रुप्ति की गाँड को अपने हाथों से दबोचके मसलने लगा। उसने पैंट के ऊपर से ही त्रुप्ति की गाँड को चूमने लगा—एकदम बेशर्म, खुलेआम की तरह। त्रुप्ति ने अपने जिस्म को सख़्त कर लिया, वो चाहती थीं कि ये पल जल्दी से ख़त्म हो जाए।
विक्की खड़ा हुआ और अपने हाथ आगे बढ़ाकर त्रुप्ति के बड़े, भरे हुए बूब्स (जो येलो टॉप में कस के बंद थे) को अपने हाथों से दबोचके मसलने लगा। उसका एक हाथ त्रुप्ति के राइट बूब्स पर था, और दूसरा लेफ्ट बूब्स पर। साथ में, उसने अपने कड़क लंड को त्रुप्ति की गाँड पर बेरहमी से मसलना जारी रखा। त्रुप्ति, इस डबल असॉल्ट से, अपनी आँखें बंद करके अपने होंठ दाँतों में दबा देती हैं, उनकी सिसकारी उनके होंठों में ही घुटकर रह गई।
विक्की बेरहमी के साथ सख़्ती से त्रुप्ति के बूब्स मसलने लगा और त्रुप्ति की गाँड पर बैक स्ट्रोक लगा रहा था।
विक्की: ओह्ह त्रुप्ति! कितने बड़े, नरम बूब्स हैं तेरे डार्लिंग! ऐसा लगता है दूध से भरे हुए हैं!
विक्की जमके त्रुप्ति के बूब्स मसल रहा था, जैसे वो एक फल हो और वो उसे कचरा रहा हो।
कुछ देर बाद, विक्की ने त्रुप्ति को अपनी तरफ़ घुमाया (अब उनका चेहरा विक्की के सामने था)। उसने त्रुप्ति की नशीली आँखों में देखा और त्रुप्ति के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने त्रुप्ति को किस करना शुरू कर दिया। विक्की त्रुप्ति के होंठ भूखे की तरह चूस रहा था।
तभी विक्की अपने हाथ त्रुप्ति की गाँड पर ले जाता है और त्रुप्ति की गाँड पर हाथ फेरते हुए हल्का-हल्का मसलने लगता है। इस आग और नरम एहसास के मिलन से, त्रुप्ति मदहोशी में अपनी आँखें बंद करके विक्की का साथ देने लगती हैं, उनकी माँ-बेटी की पहचान धुँधली पड़ने लगी थी।
अब दोनों, विक्की और त्रुप्ति, एक-दूसरे के होंठ पूरे पैशन के साथ चूस रहे थे। त्रुप्ति, अपने होश खोकर, अपनी बाँहें विक्की की कमर में डालके विक्की को एग्रेसिवली किस कर रही थीं। दोनों एक-दूसरे को ज़ोर-ज़ोर से, हवस में डूबकर किस कर रहे थे। उनकी बदनामी का डर अब उनकी वासना के आगे झुक चुका था।
तभी विक्की त्रुप्ति की गाँड कसके मसलने लगा, जिससे त्रुप्ति का मुँह किस के बीच में खुल गया। विक्की ने इसका फ़ायदा उठाकर त्रुप्ति के मुँह में मुँह डाला और फ्रेंच किस करने लगा। दोनों एक-दूसरे के मुँह में ज़ुबान डालके चूस रहे थे, मानो दोनों की ज़ुबान लड़ रही हो। और दोनों एक-दूसरे का लार भी पी रहे थे।
एक सेक्सी, लंबी, और स्ट्रॉन्ग किस के बाद, विक्की त्रुप्ति के होंठ छोड़ता है। त्रुप्ति हाँफ रही थीं।
विक्की: त्रुप्ति! तुझे जितना किस करने में मज़ा आता है, उतना आज तक किसी लड़की को किस करने में नहीं आया। तू मेरे जिस्म को आग लगा देती है।
त्रुप्ति शर्म और हल्के से गिल्टी-प्लेज़र से अपनी आँखें झुका लेती हैं।
विक्की फिर से त्रुप्ति को पलटा देता है। अब त्रुप्ति की गाँड फिर से विक्की के सामने थी। तभी विक्की ने अपनी ज़िप खोली और अपना 9 इंच का लंबा, तगड़ा लंड बाहर निकालता है।
विक्की त्रुप्ति की कमर पकड़के, अपना नंगा लंड त्रुप्ति की गाँड पर, पैंट के ऊपर से, टच करता है। त्रुप्ति तुरंत समझ जाती हैं कि विक्की अब त्रुप्ति की गाँड पर नंगा लंड मसलने वाला है—ये अगला लेवल था। उनकी आख़िरी हद अब टूट चुकी थी।
और विक्की ने त्रुप्ति की गाँड पर बैक स्ट्रोक देने लगा। जिससे विक्की का लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार में कसके घुस जाता है। विक्की त्रुप्ति की गाँड पर बेरहमी से लंड मसलने लगा, जैसे कि वो सचमुच त्रुप्ति की गाँड ही मार रहा हो। विक्की के दिमाग़ में सिर्फ़ यही था: “त्रुप्ति की गाँड मार रहा हूँ!”
त्रुप्ति विक्की के तगड़े और गरम लंड को अपनी गाँड की दरार में फील कर रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं। उन्हें बस इतना ही मालूम था कि विक्की का लंड बड़ा और तगड़ा है। विक्की अब ज़ोर-ज़ोर से त्रुप्ति को बैक स्ट्रोक देने लगा था, जिससे त्रुप्ति तेज़ी से हिल रही थीं।
त्रुप्ति की जींस ने ही उनकी आख़िरी मर्यादा को बचाया था। अगर त्रुप्ति ने जींस पहनके नहीं रखा होता तो विक्की का पूरा लंड त्रुप्ति की गाँड में घुस जाता। कुछ और तगड़े स्ट्रोक्स के साथ, विक्की त्रुप्ति की गाँड पर ही झड़ जाता है। उसका गरम वीर्य त्रुप्ति की जींस पर गिरता है।
विक्की कुछ देर त्रुप्ति को ऐसे ही बाँहों में जकड़े, अपना लंड उनकी गाँड की दरार में डाले खड़ा रहता है, उसकी ठंडी साँसें त्रुप्ति की गर्दन पर पड़ रही थीं।
विक्की: ओह्ह त्रुप्ति! बाक़ी लड़कियों को चोदने में जितना मज़ा नहीं आया, उतना तेरी गाँड पर लंड मसलने में आया! तू आग है, त्रुप्ति!
कुछ देर बाद, विक्की अपना लंड पैंट के अंदर करता है। त्रुप्ति की सफ़ेद जींस पर विक्की का वीर्य लगा हुआ था, लेकिन सफ़ेद पैंट होने के कारण, और भीड़ के कारण कोई देख नहीं पा रहा था। फिर सब लोग नीचे उतर गए। त्रुप्ति एक नए डर और नई मजबूरी में डूबी हुई थीं, अपने जिस्म और इज़्ज़त के हारे हुए एहसास के साथ।
बस अब जंगल के उस कोने में रुक चुकी थी, जहाँ आगे के एडवेंचर के लिए स्टूडेंट्स को कैंप लगाना था। दरवाज़ा खुलते ही, त्रुप्ति एक भारी दिल और थकी हुई जिस्म के साथ बेबसी से बस से नीचे उतरीं। उनके सफ़ेद जींस पर, विक्की के गरम वीर्य के निशान अभी भी ताज़ा थे, चिपचिपाहट उनकी गाँड की दरार में थी, जिससे उन्हें एक घीन का एहसास हो रहा था।
उनकी तेज़ धड़कनें अभी भी शांत नहीं हुई थीं। एक तरफ़ घोर ग्लानि का बोझ था—कि वो एक शादीशुदा औरत और एक बेटे की माँ होकर बस में एक लड़के से अपने जिस्म की बेइज़्ज़ती करवा चुकी थीं। पर उनके जिस्म का दूसरा हिस्सा एक विषम सुख की छोटी सी चिंगारी महसूस कर रहा था। विक्की के तगड़े लंड का स्पर्श, उनकी गाँड पर वो बेरहमी भरा घर्षण, उनकी सारी शर्म को कुछ देर के लिए भुला चुका था। उनके मन में हल्का सा आनंद का भाव था, जिसे वो ज़बरदस्ती दबा रही थीं: “क्या मुझे इसमें मज़ा आया?”
जब त्रुप्ति नीचे उतरीं, तो शीतल, जो खुद विक्की के डर से सहमी हुई थी, तुरंत उनके क़रीब आई। उसकी आँखों में फ़िकर और गुस्सा दोनों थे।
शीतल: त्रुप्ति, तुम ठीक हो? उफ़्फ़, कितना घटिया इंसान है ये विक्की! मैंने खुद देखा, उसने तुम्हारे साथ क्या किया। बड़ी हिम्मत चाहिए तुम्हारी! तुम चुप क्यों हो? अभय को बता दो! वो उसे टुकड़े-टुकड़े कर देगा! ये साले हरामी को मसल देगा! वरना ये तुम्हें चैन से जीने नहीं देगा।
त्रुप्ति ने एक लंबी, ठंडी साँस ली। उनके पास जवाब था, पर उनकी मजबूरी उनके गले में फँस गई थी। अगर वो सच बतातीं तो कॉलेज में हंगामा हो जाता, और सबसे बड़ी बात—राहुल की गर्लफ्रेंड होने की उनकी कहानी टूट जाती। और अगर राहुल या अभय उन्हें बचाने के लिए विक्की से लड़ते, तो त्रुप्ति को पता था कि उनके साथ और क्या-क्या हो सकता है।
त्रुप्ति (अपने होंठ काटते हुए, हल्की घबराहट से): चुप हो जाओ शीतल। चिल्लाओ मत। ये सब… हो गया है। अभी मैं किसी से कोई बात नहीं करना चाहती। मुझे वॉशरूम जाना है। बस अभी चुप रहो।
और बिना शीतल का जवाब सुने, त्रुप्ति तेज़ी से अपने कसमसाते जिस्म को लेकर जंगल की तरफ़ बने टेम्पररी वॉशरूम की दिशा में चल दीं। उनका ध्यान सिर्फ़ अपनी पैंट की गंदगी को साफ़ करने पर था, पर उनके दिमाग़ में विक्की के लंड का एहसास अभी भी ताज़ा था।
वहीं, बस से थोड़ी ही दूर राहुल खड़ा था। वो अभी भी विक्की और दूसरे दोस्तों से हँसी-मज़ाक में लगा हुआ था। राहुल को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि जिस दोस्त से वो हँसके बात कर रहा है, उसने कुछ ही देर पहले उसकी माँ के साथ क्या किया है। राहुल तो अभी भी त्रुप्ति को अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ मानकर अपने ईगो की जीत में डूबा हुआ था।
राहुल: हाँ, बस मस्त प्लानिंग होनी चाहिए। कैंप-फ़ायर पे माहौल अच्छा होना चाहिए। अभय को हमेशा नीचा दिखाना है।
विक्की ने राहुल की बात सुनी, पर उसके चेहरे पर एक घिनौनी मुस्कान थी। उसकी आँखों में शैतानी थी। वो अपने मन में त्रुप्ति के नंगे जिस्म को सोच रहा था, और राहुल की अनजानपना पर हँस रहा था।
विक्की (अपने मन में): अरे बेचारे राहुल! तुझे क्या पता, तेरी ‘गर्लफ्रेंड’ का सारा रस तो हमारी पैंट पर निकल गया। और तू अभी भी अभय को नीचा दिखाने की बात कर रहा है? असली जीत तो मैंने अभी-अभी बस के पिछले हिस्से में हासिल की है! अब तो बस पूरा मज़ा लेना बाक़ी है!
विक्की ने हल्का सा मुस्कुराकर राहुल की पीठ थपथपाई। उसकी ये मुस्कान त्रुप्ति के प्रति उसकी जीत और राहुल के प्रति उसकी धोखेबाज़ी का खुला प्रदर्शन थी।
विक्की (राहुल से): हाँ हाँ, बिल्कुल सही कह रहा है! आज तो माहौल सच में गरम होने वाला है! तू बस देख।