कोमल को रंडी बनाने का सफर!

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपका दोस्त राजा हूँ। आज मैं आपको अपनी एक असली कहानी सुनाने वाला हूँ।

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ पार्क में बैठा था। बातें चल रही थीं। तभी मेरी दोस्त पूजा ने मुझसे कहा, “राजा, तू कब अपनी रानी बनाएगा?” मैंने हँसते हुए कहा, “मुझे मिल ही नहीं रही। तू मेरी मदद कर। अपनी किसी फ्रेंड से बात करवा।” पूजा बोली, “क्यों नहीं। सोचती हूँ।”

दो दिन बाद पूजा का फोन आया। “राजा, तू कहाँ है?” मैंने कहा, “घर पर हूँ।” उसने कहा, “अभी पार्क आ सकता है?” मैंने हाँ कहा। दस मिनट में पहुँच गया। पूजा एक लड़की के साथ खड़ी थी। उसने मुझे मिलाया। “ये कोमल है। मेरी कॉलेज फ्रेंड।”

कोमल गोरी थी, लंबे बाल, हल्की मुस्कान। हम बात करने लगे। उसने बताया कि उसका ब्रेकअप हो गया है। मैंने कहा, “मेरी तो अभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।” वो मुस्कुरा दी। थोड़ी देर बाद हम सब अपने-अपने घर चले गए।

अगले दिन फिर पूजा का फोन आया। “तू कहाँ है?” मैंने कहा, “घर पर। कोई नहीं है।” पूजा बोली, “मैं आ रही हूँ।” मैंने ठीक कहा। आधे घंटे बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। पूजा अकेली नहीं थी। कोमल भी साथ थी। मैंने दोनों को अंदर बुलाया।

पूजा मुझे किचन में ले गई और धीमी आवाज में बोली, “राजा, कोमल तुझे पसंद करती है। मैंने उससे बात की थी।” मैं थोड़ा चौंक गया। “सच?” पूजा सिर हिलाकर बोली, “हाँ। तू भी अच्छा लड़का है। बस शर्म मत करना।”

हम तीनों सोफे पर बैठे। थोड़ी देर बातें हुईं। फिर पूजा बोली, “मेरा काम है। मैं चलती हूँ।” वो जल्दी से चली गई। घर में सिर्फ मैं और कोमल रह गए।

थोड़ी देर चुप रहे। फिर मैंने पूछा, “पूजा ने कहा कि तू मुझे पसंद करती है। सच है?” कोमल ने आँखें झुका लीं।

फिर धीरे से बोली, “हाँ… पसंद करती हूँ।” मैं कुछ नहीं बोला। वो मेरे पास आ गई और मुझे हग कर लिया। मेरा लंड पैंट में खड़ा हो गया। मैंने भी उसे बाँहों में भर लिया। उसकी कमर नरम थी।

हमने टीवी ऑन किया। एक फिल्म चल रही थी। बीच में रोमांटिक सीन आया। कोमल ने मेरी तरफ देखा। फिर अचानक मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं चौंक गया, लेकिन जोश में आ गया। मैंने भी गहरा किस किया। उसकी जीभ मेरे मुँह में आ गई।

मेरा हाथ उसके ब्लाउज के अंदर चला गया। ब्रा के ऊपर से स्तन दबाए। कोमल सिसकी।

“आह… राजा…” मैंने ब्रा के हुक खोले। स्तन बाहर आ गए। नरम और गोल। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। कोमल के हाथ मेरे बालों में चले गए। “आह्ह… राजा… अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसके कपड़े उतार दिए। वो पूरी नंगी हो गई। मैंने उसके स्तनों को चाटा, चूसा, हल्के से काटा। कोमल कराह रही थी।

“आह… और जोर से… आह्ह…” मैं नीचे गया। उसकी चूत के पास मुँह ले गया। पहले थोड़ी झिझक हुई, फिर जीभ फेरी। कोमल काँप उठी।

“आह्ह्ह… राजा… वहाँ… आह्ह…”

मैंने चूत चाटना जारी रखा। कोमल पागल हो रही थी।

“फक मी… प्लीज… चोदो मुझे… मैं मर जाऊँगी…” मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। वो मचलने लगी।

“आह्ह… हाँ… ऐसे ही… आह्ह…” मैं उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रहा था और उसके स्तन दबा रहा था।

कोमल ने मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला। “चूसने दो…” उसने कहा।

मैंने सिर हिलाया। वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगी।

“गप… गप…” की आवाज आ रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर थोड़ा गहरा किया। वो खांसने लगी, लेकिन रुकी नहीं।

मैंने सोचा अब चोदना चाहिए। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। लंड उसकी चूत पर रखा।

“अब क्या करूँ?” कोमल हाँफते हुए बोली, “चोदो मुझे… रंडी की तरह चोदो… प्लीज…” मैंने पूरा लंड एक ही झटके में अंदर डाल दिया। कोमल चीख उठी।

“आह्ह्ह्ह… दर्द… आह्ह…” उसकी आँखें बंद हो गईं। मैं रुक गया। “निकाल दूँ?” वो सिर हिलाकर बोली, “नहीं… चोदो… लेकिन धीरे…”

मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। कोमल की साँसें सामान्य होने लगीं। थोड़ी देर बाद वो खुद कमर हिलाने लगी।

“अब अच्छा लग रहा है… और जोर से… आह्ह… राजा…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। “फच… फच…” की आवाज कमरे में गूँज रही थी।

कोमल मेरे गले से लिपट गई। “चोदो… मुझे चोदो… आह्ह्ह…” मैंने उसके स्तनों को मुँह में लिया और जोर-जोर से ठोकने लगा। वो बार-बार झड़ रही थी। “आह्ह… मैं झड़ गई… लेकिन मत रुक… आह्ह…”

लगभग एक घंटे तक मैंने उसे चोदा। कभी मिशनरी में, कभी साइड से।

आखिर में मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में डाल दिया। कोमल ने मुँह खोल दिया। मैंने सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया। वो जितना बन पड़ा निगल गई। बाकी होंठों से चाट लिया।

मैं उसके बगल में लेट गया। दोनों हाँफ रहे थे।

मैंने कहा, “थैंक्यू कोमल।” वो मुस्कुराई। “थैंक्यू राजा। बहुत अच्छा लगा।” हम थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। बाहर अंधेरा हो चुका था।

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दोनों थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। कोमल ने मेरी छाती पर सिर रखा। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। मैंने उसके बाल सहलाए।

“कोमल… सच में बहुत अच्छा लगा।” वो मुस्कुराई। “मुझे भी। बहुत दिनों बाद किसी ने इतना प्यार से चोदा।”

थोड़ी देर बाद कोमल उठी। बाथरूम गई और नहाकर आई। तौलिया लपेटे हुए।

मेरे पास आकर बोली, “राजा… अभी और करना है?” मैंने सिर हिलाया। “अगर तू चाहे तो।” वो तौलिया गिराकर मेरे ऊपर चढ़ गई। लंड को हाथ में लेकर अपनी चूत पर रगड़ा।

“आह… अभी भी खड़ा है…”

उसने खुद लंड को चूत में सेट किया और धीरे-धीरे नीचे बैठी। पूरा लंड अंदर चला गया।

“आह्ह… राजा…” वो ऊपर-नीचे कूदने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने हिल रहे थे। मैंने दोनों को मुँह में लिया और चूसने लगा। कोमल कराह रही थी। “आह… चूसो… और जोर से… आह्ह…”

मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से धक्के मारे। कोमल की स्पीड और बढ़ गई।

“चोदो… मुझे चोदो… आह्ह्ह… मैं फिर झड़ने वाली हूँ…” उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी। वो जोर से काँपी और झड़ गई। “आह्ह्ह्ह… आ गया…” मैंने भी स्पीड बढ़ाई और उसकी चूत में ही झड़ गया।

कोमल मेरे ऊपर गिर पड़ी। दोनों पसीने से तर थे। वो मेरे कान में बोली, “राजा… अगली बार और गंदा करना। मुझे पसंद है।” मैंने उसके होंठ चूमे। “करूँगा।”

रात को कोमल घर चली गई। अगले दिन उसने मैसेज किया। “आज फिर आऊँ?” मैंने हाँ लिख दिया। शाम को वो आई। इस बार बिना पूजा के। दरवाजा बंद होते ही उसने मुझे किस किया। “आज कोई शर्म नहीं।”

हम सीधे बेडरूम में गए। कोमल ने खुद कपड़े उतारे। “आज मुझे पीछे से चोदना।” मैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने थूक लगाया और लंड चूत में डाला। कोमल सिसकी। “आह… हाँ… ऐसे ही…”

मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया।

“फच… फच…” की आवाज आ रही थी। कोमल पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी जाँघ पकड़ रही थी।

 “और जोर से… आह्ह… राजा… मेरी चूत फाड़ दे…” मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। वो चीख उठी। “आह्ह… और मार…”

मैंने बाल पकड़कर खींचे और और तेज चोदने लगा। कोमल पागल हो रही थी।

“चोदो… रंडी की तरह चोदो… आह्ह्ह…” वो झड़ गई। मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में डाल दिया। कोमल ने गले तक ले लिया। मैंने उसके मुँह में झाड़ दिया। वो सारा माल निगल गई।

बाद में हम नंगे ही लेटे रहे। कोमल बोली, “राजा… मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” मैंने उसे गले लगाया। “मुझे भी।” वो मुस्कुराई। “तो अब रोज मिलेंगे?”

मैंने कहा, “हाँ। जब चाहे आ जाना।”

उसके बाद हम कई बार मिले। कभी मेरे घर, कभी उसके घर जब उसके घर वाले नहीं होते। हर बार कोमल और खुलकर बोलती।

“आज गांड में डालना… आह्ह… चोदो मुझे…” मैं उसकी हर फरमाइश पूरी करता।

एक शाम वो मेरे ऊपर बैठी थी। लंड उसकी चूत में था। 

वो कूदते हुए बोली, “राजा… मैं तेरी रंडी बनना चाहती हूँ… रोज चोदो…” मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। “बन गई है। अब जब चाहूँगा चोदूँगा।” वो हँसी और और तेज कूदने लगी।

उसकी चूत से पानी टपक रहा था। मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से जोरदार धक्के मारे। कोमल चीख उठी।

“आह्ह्ह… राजा… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह…” उसके स्तन मेरे चेहरे पर टकरा रहे थे। मैंने एक निप्पल दाँतों से हल्का काटा। कोमल काँप गई। “आह… दर्द… लेकिन अच्छा लग रहा है… और काटो…”

मैंने स्पीड और बढ़ा दी। बिस्तर जोर से हिल रहा था। कोमल की साँसें टूट रही थीं।

 “मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह… राजा… अंदर छोड़ देना… आह्ह…” उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैंने भी रुकने की कोशिश नहीं की।

तीन-चार गहरे धक्के मारे और सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। कोमल मेरे ऊपर गिर पड़ी।

“आह्ह… भर गया… आह्ह…”

थोड़ी देर बाद वो उठी और बाथरूम चली गई। जब वापस आई तो नंगी ही थी। मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी। “अभी और है क्या?” मैंने कहा, “थोड़ा आराम कर।” वो मुस्कुराई। “मैं आराम नहीं करना चाहती। आज पूरी रात चोदना है।”

उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा। मैं लेट गया। कोमल मेरे ऊपर उल्टी बैठ गई। अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी।

“चाट… अच्छे से चाट…” मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया। वो मेरे लंड को मुँह में ले रही थी। दोनों तरफ से “गप… गप…” और सिसकारियाँ आ रही थीं। कोमल बीच-बीच में बोल रही थी,

“आह… जीभ अंदर डाल… आह्ह… मेरी चूत चाट…”

पंद्रह मिनट बाद वो पलट गई। मेरे लंड पर बैठकर फिर से कूदने लगी। इस बार और जोर से।

“चोदो… अपनी रंडी को चोदो… आह्ह्ह…” मैंने उसकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। कोमल चीख रही थी लेकिन रुक नहीं रही थी। “और मार… आह्ह… मुझे पसंद है…”

जब वो तीसरी बार झड़ने वाली थी तो मैंने उसे नीचे लिटा दिया। टाँगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। कोमल के नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।

“आह्ह्ह… राजा… बहुत गहरा… आह्ह… मैं फिर झड़ गई…” मैंने आखिरी जोरदार झटके मारे और फिर से उसकी चूत में झाड़ दिया।

रात के दो बज चुके थे। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। कोमल मेरे सीने पर सिर रखकर बोली,

“राजा… आज से मैं सच में तेरी रंडी हूँ। जब चाहे बुला लेना। मैं आ जाऊँगी।” मैंने उसके बाल सहलाए। “रोज नहीं आ पाऊँगा। लेकिन जब मौका मिलेगा, चोदूँगा।” वो मुस्कुराई। “बस इतना काफी है।”

अगले कुछ दिनों में कोमल तीन-चार बार और आई। हर बार वो और खुलकर बोलने लगी। एक बार उसने खुद कहा, “आज गांड में डालना।” मैंने तेल लगाया। पहले उँगली से खोला। कोमल सिसकी।

“आह… धीरे… दर्द हो रहा है…” फिर लंड का सिरा अंदर किया। वो चीख उठी। “आह्ह्ह… बहुत मोटा है…” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में डाला। थोड़ी देर बाद वो खुद गांड पीछे धकेलने लगी। “अब अच्छा लग रहा है… चोदो… आह्ह…”

मैंने उसकी गांड मारते हुए चूत में उँगलियाँ डाल दीं। कोमल पागल हो गई। “दोनों तरफ से… आह्ह्ह… राजा… मैं मर जाऊँगी…” जब मैं झड़ने वाला था तो उसने कहा, “गांड में ही छोड़…” मैंने उसकी गांड में माल भर दिया। वो काँपते हुए झड़ गई।

दोस्तों, मेरी और कोमल की कहानी यहीं खत्म होती है। आगे और स्टोरीज लाता रहूँगा। आपका अपना राजा।

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