Family Sex Stories : ट्रुथ & डेयर गेम में माँ के सामने ही बेटे ने फाड़ी अनन्या बहन की कुंवारी चूत! झटके मार कर अंदर ही झड़ाया लंड! और माँ देखती रही पूरी चुदाई!
दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। उम्र इक्कीस साल। मैं दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ। मेरे पापा का नाम सुरेश है। उनकी उम्र पचास के आसपास है। वे एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और अक्सर विदेश की ट्रिप पर जाते रहते हैं।
मेरी माँ का नाम मीरा है। उम्र सैंतालीस साल। गोरी त्वचा, लंबे काले बाल, और शरीर अभी भी भरा-भरा है। उनके स्तन बड़े और भारी हैं। गांड मोटी और गोल। जब वो घर में साड़ी पहनकर चलती हैं तो उनकी कमर और पीछे का हिस्सा साफ नजर आता है।
मेरी बड़ी बहन अनन्या है। उम्र तेईस साल। कॉलेज खत्म करके अभी घर पर ही है। अनन्या भी माँ जैसी ही है। थोड़ी पतली कमर, लेकिन स्तन और गांड दोनों अच्छी-खासी भरे हुए। वो घर में अक्सर टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनती है।
पापा को अचानक अठारह दिन के लिए दुबई जाना पड़ा। कंपनी का कुछ काम था। घर में सिर्फ तीन लोग बचे। मैं, माँ और अनन्या।
पापा के जाने के दिन से ही घर का माहौल थोड़ा ढीला हो गया था। माँ ने उस दिन हल्की सी मुस्कान के साथ नाश्ता परोसा।
अनन्या ने कहा, “पापा के बिना घर खाली-खाली सा लगता है।” माँ ने सिर हिलाया और बोलीं, “है तो। पर कुछ दिन तो ऐसे ही निकल जाएंगे।”
मैंने देखा माँ की साड़ी का पल्लू थोड़ा ढीला था। उनके स्तन का उभार साफ दिख रहा था। अनन्या के टी-शर्ट के अंदर ब्रा की डोरी नजर आ रही थी। मैंने कुछ नहीं कहा। बस खाना खाता रहा।
शाम को अनन्या ने कहा, “रोहन, आज फिल्म देखते हैं। तीनों मिलकर।” माँ भी मान गईं। लिविंग रूम में सोफे पर तीनों बैठ गए। अनन्या मेरे बगल में बैठी। माँ दूसरी तरफ। फिल्म शुरू हुई।
कुछ देर बाद अनन्या ने अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसके बाल मेरे गाल को छू रहे थे। मैंने महसूस किया उसके स्तन हल्के से मेरे हाथ से छू रहे हैं। वो कुछ नहीं बोली। मैं भी चुप रहा।
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फिल्म के बीच में एक सीन आया जिसमें आदमी औरत को चूम रहा था। अनन्या ने हल्की सी हँसी दी। माँ ने कहा, “ये लोग तो हद से आगे बढ़ जाते हैं।”
अनन्या ने जवाब दिया, “माँ, अब जमाना बदल गया है। सब खुला है।” माँ ने कुछ नहीं कहा। बस टीवी की तरफ देखती रहीं।
रात को खाने के समय अनन्या ने शॉर्ट्स पहनी हुई थी। जब वो उठकर पानी लाने गई तो उसके पीछे का हिस्सा साफ दिख रहा था। शॉर्ट्स के अंदर पैंटी की लाइन भी नहीं थी। मैंने नजर फेर ली। लेकिन मन में कुछ गड़बड़ हो गया था।
खाने के बाद अनन्या बोली, “चलो, कोई गेम खेलते हैं। बोर हो रहे हैं।” माँ ने पूछा, “क्या गेम?” अनन्या ने कहा, “ट्रुथ एंड डेयर। लेकिन सिर्फ घर के अंदर वाले डेयर। बाहर कुछ नहीं।”
मैंने कहा, “ठीक है। लेकिन एक बार ट्रुथ लेने के बाद सिर्फ डेयर ही चलेंगे।” अनन्या हँसी। “तू तो शुरू से ही शरारती है।” माँ ने कहा, “चलो, खेलते हैं। कुछ मजा आ जाए।”
गेम शुरू हुआ। अनन्या ने माँ को डेयर दिया। “माँ, तुम्हारी पैंट पसीने से भीग गई है। मेरी कोई शॉर्ट्स पहन लो। यहीं। हम दोनों आँखें बंद कर लेंगे।”
माँ थोड़ा झिझकीं। “बाथरूम में कर लूँगी।” अनन्या ने जोर दिया। “नहीं माँ। यहीं। जल्दी।” माँ ने आँखें बंद करने को कहा। हमने बंद कर लीं।
लेकिन मैंने थोड़ी सी खोल रखी थी। अनन्या भी दूसरी तरफ देख रही थी। उसकी आँखें भी आधी खुली थीं।
माँ ने अपनी पैंट उतारी। उनके नीचे कोई पैंटी नहीं थी। उनकी चूत साँवली थी और ऊपर हल्के बाल थे। मैंने देखा। अनन्या ने भी देखा। दोनों ने कुछ नहीं कहा। माँ ने शॉर्ट्स पहन लीं।
जब उन्होंने आँखें खोलीं तो मैंने देखा उनकी टी-शर्ट भी थोड़ी गीली थी। निप्पल का उभार साफ था।
अब मेरी बारी आई। माँ ने कहा, “रोहन, तौलिया पहन और ऊपर से नंगा हो जा।” अनन्या हँसी। “जल्दी कर।” मैंने टी-शर्ट उतारी। फिर पैंट और अंडरवियर। मेरा लंड खड़ा हो चुका था।
तौलिया लपेटते हुए भी उभार साफ दिख रहा था। माँ और अनन्या दोनों ने देखा और हल्की हँसी दी। कोई कुछ नहीं बोला।
अनन्या की बारी आई। मैंने कहा, “अनन्या, हमारे सामने सारे कपड़े उतार और नंगी हो जा। कोई तौलिया नहीं।” अनन्या शर्मा गई। “तू मेरा भाई है। कैसे?” मैंने कहा, “मैंने तो दिखा दिया। अब तेरी बारी।”
अनन्या ने धीरे से टी-शर्ट उतारी। उसके स्तन बाहर आ गए। निप्पल हल्के तने हुए थे। फिर शॉर्ट्स उतारी। उसकी चूत पर बाल थे। कमरे में हल्की सी गंध फैल गई।
माँ ने कहा, “अनन्या, तू ट्रिम नहीं करती?” अनन्या ने जवाब दिया, “सुना है लड़कों को ऐसा ही पसंद आता है।” माँ ने मेरी तरफ देखा। “रोहन, सच में?” मैंने कहा, “हाँ… ठीक ही है।”
माँ ने अपनी टी-शर्ट उतारी। उनके स्तन अनन्या से बड़े थे। निप्पल बड़े और गहरे रंग के। उन्होंने भी शॉर्ट्स उतारी। उनकी चूत पर बाल अनन्या से ज्यादा थे। उन्होंने एसी चालू किया और नंगी लेट गईं। अनन्या का मुँह खुला रह गया।
गेम आगे बढ़ा। माँ ने कहा, “रोहन, अनन्या को सीधा लिटा और उसके ऊपर लेट जा। स्तन दबाते हुए किस कर। और अपना लंड उसकी चूत पर रख।”
अनन्या ने कहा, “माँ, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा।” माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “डेयर है। करना पड़ेगा।”
मैंने अनन्या को माँ के ऊपर लिटाया। उसके होंठों पर मुँह रखा। एक हाथ उसके स्तन पर था। दूसरा हाथ माँ की जांघों के बीच चला गया। मेरा लंड अनन्या की चूत पर टिका हुआ था। दोनों ने एक साथ आह भरी। “आह्ह…”
माँ की चूत गीली हो चुकी थी। अनन्या की भी। मैंने दोनों की टांगें फैलाईं। उनकी चूतें एक-दूसरे से छू रही थीं। मैंने थूक लगाया और दोनों को चाटना शुरू किया। अनन्या कराह उठी।
“आह्ह… रोहन… आह्ह…” माँ ने कुछ नहीं कहा। बस आँखें बंद कर लीं। ये Parivarik Threesome Free Sex Stories in Hindi आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
अनन्या ने माँ के स्तन चूसने शुरू कर दिए। माँ ने अनन्या के बाल सहलाए। मैं नीचे से दोनों को चाट रहा था। अनन्या की चूत से पानी निकल आया। मैंने उसे मुँह में लिया और ऊपर आकर दोनों को किस करते हुए पिला दिया।
माँ ने मेरा लंड हाथ में लिया। “कितना मोटा है।” अनन्या ने भी हाथ बढ़ाया। दोनों ने बारी-बारी से चूसना शुरू किया। माँ के होंठ गर्म थे। अनन्या की जीभ नरम। कमरे में सिर्फ चूसने की आवाज और हल्की सिसकारियाँ थीं।
रात अभी शुरू हुई थी। पापा दुबई में थे। घर में तीन लोग नंगे थे। और कोई रुकने वाला नहीं था।
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माँ ने लंड मुँह से निकाला और धीरे से कहा, “रोहन, तू पहले अपनी बहन को संभाल। वो बहुत दिनों से अकेली है। मुझे अभी सिर्फ देखना है। मैं कहीं नहीं जा रही।”
अनन्या की साँसें तेज चल रही थीं। उसने माँ की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ। “माँ… तुम सच में यहीं रहोगी?” माँ ने सिर हिलाया।
“हाँ। तुम दोनों को अकेला नहीं छोड़ूँगी। लेकिन आज रात मैं सिर्फ देखूँगी। जो होना है, वो धीरे-धीरे होगा।”
मैंने अनन्या को सोफे पर सीधा लिटाया। उसके बाल बिखरे हुए थे। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने उसके एक स्तन को मुँह में लिया और धीरे से चूसा। अनन्या ने आँखें बंद कर लीं और हल्की सी आह भरी।
“आह्ह… रोहन… धीरे…” मैंने दूसरे स्तन को हाथ से मसला। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। माँ सोफे के दूसरे सिरे पर बैठी थीं। उनके हाथ अपनी जांघों पर थे। वो कुछ नहीं बोल रही थीं। बस देख रही थीं।
अनन्या ने मेरा हाथ पकड़ा और नीचे की तरफ ले गई। “रोहन… अगर तू सच में करना चाहता है… तो पहले धीरे से। मुझे दर्द मत देना।” मैंने उसकी चूत पर उँगली फेरी। वो पहले से गीली थी।
मैंने एक उँगली अंदर डाली। अनन्या ने कमर थोड़ी ऊपर उठाई।
“आह्ह… हाँ… ऐसे ही…” मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अनन्या की चूत कस रही थी। वो मेरी कलाई पकड़कर और गहरा करने को कह रही थी।
माँ ने धीरे से कहा, “अनन्या, अगर दर्द हो तो बोल देना। रोहन, तू जल्दी मत करना।” अनन्या ने आँखें खोलीं और माँ को देखा। “माँ… मुझे अच्छा लग रहा है। तुम देखो। मुझे शर्म नहीं आ रही।”
माँ ने कुछ नहीं कहा। बस अपनी साँसें नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थीं।
मैंने लंड अनन्या की चूत पर रखा। टोपा गीला हो चुका था। अनन्या ने टाँगें और फैलाईं। “रोहन… धीरे से डाल। एक बार में पूरा मत घुसाना।” मैंने थोड़ा सा अंदर डाला। अनन्या ने दाँत भींच लिए।
“आह्ह… रुको… थोड़ा रुक…” मैं रुका। उसने गहरी साँस ली और फिर बोली, “अब और डाल। लेकिन धीरे।”
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मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर किया। अनन्या की आँखें भींच गईं। उसके मुँह से लंबी आह निकली।
“आह्ह्ह… रोहन… पूरा आ गया…” मैंने कुछ देर बिना हिले अंदर ही रखा। अनन्या ने मेरी पीठ पर हाथ फेरे। “अब हिला। धीरे-धीरे।”
मैंने धीमे धक्के शुरू किए। अनन्या हर धक्के पर हल्की सिसकी भर रही थी। “आह्ह… हाँ… ऐसे ही… आह्ह…” माँ ने सोफे से उठकर पास आकर बैठ गईं। उन्होंने अनन्या के बाल सहलाए।
“बेटा, अगर ज्यादा हो रहा हो तो बोल देना।” अनन्या ने माँ का हाथ पकड़ा। “माँ… मुझे अच्छा लग रहा है। तुम मेरा हाथ पकड़े रहो।”
मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ाई। अनन्या की चूत से “फच-फच” की आवाज आने लगी। वो अब खुद भी कमर हिला रही थी।
“रोहन… और गहरा… लेकिन तेज मत करना… आह्ह…” माँ अनन्या के स्तन को हल्के से सहला रही थीं। अनन्या ने माँ की तरफ मुड़कर कहा, “माँ… तुम्हें भी अच्छा लग रहा है ना ये देखकर?” माँ ने आँखें झुका लीं।
“अनन्या… अभी मत पूछ। बस तू आराम से ले।”
अनन्या ने मुझे अपनी तरफ खींचा और होंठों पर किस किया। उसका किस गहरा था। जबान मेरे मुँह में घुस गई। मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया और धक्के जारी रखे। अनन्या कराह रही थी।
“आह्ह… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ… मत रुक…”
मैंने उसकी कमर पकड़कर थोड़े गहरे धक्के मारे। अनन्या का शरीर तन गया। उसने माँ का हाथ जोर से दबाया और जोर से आह भरी।
“आह्ह्ह्ह… रोहन… आ गया… आह्ह…” उसकी चूत ने लंड को कस लिया। वो काँपते हुए झड़ गई।
मैंने अंदर ही रखा। अनन्या हाँफ रही थी। माँ ने उसके माथे से पसीना पोंछा। “अनन्या, ठीक है?” अनन्या ने आँखें खोलीं और मुस्कुराई। “हाँ माँ… बहुत अच्छा लगा।” फिर उसने मेरी तरफ देखा।
“रोहन… तू अभी मत निकाल। थोड़ी देर ऐसे ही रह।”
माँ ने कुछ नहीं कहा। बस अनन्या के बाल सहलाती रहीं। कमरे में सिर्फ तीनों की साँसें सुनाई दे रही थीं। अनन्या की चूत अभी भी लंड को जकड़े हुए थी। वो धीरे-धीरे साँस ले रही थी और माँ का हाथ नहीं छोड़ रही थी।
रात अभी बाकी थी। लेकिन आज की रात अनन्या के साथ ही खत्म हुई। माँ ने सिर्फ देखा। कुछ और नहीं किया।
आगे की कहानी : “ट्रुथ-डेयर से बाथरूम में फाड़ी माँ की चूत!”