पहली बार ससुराल मे ससुरजी के साथ 2

Sasur bahu ki harcore chudai kahani:- अगले दिन लीला उठकर सुभा को मनाने के तरीक़े सोच रही थी, उसे लगा कि सबसे अच्छा यही होगा कि शक्तिल को यहाँ से शहर भेज दिया जाए।

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किचन में सुभा और लीला जब काम कर रहे थे तब उसने बात छेड़ी।

लीला – बेटा, मुझे बहुत अच्छा लगा कि तुम शहर की होकर भी हमारे झोंपड़े में अच्छे से रह रही हो।

सुभा – आप लोगों का नेचर बहुत अच्छा है माँ। मुझे सबके साथ बहुत अच्छा लग रहा है।

Sasur bahu ki harcore chudai kahani

लीला – बेटा, शक्तिल की छुट्टी के बहुत दिन हो गए। हम 10 दिन बाद शहर जाने वाले ही हैं, तू रुक जा यहाँ और हमारे साथ चलना। अभी शक्तिल को जाके नौकरी करने दे।

यही बात लीला ने कल कही होती तो सुभा सीधे मना कर देती, लेकिन कल रात की घटना के बाद सुभा को उस घर में रुकने में थोड़ा एक्साइटमेंट हो रहा था।

लेकिन अंदर से डर भी लग रहा था कि इनके बेटे के जाने के बाद इनका रवैया मेरे लिए चेंज तो नहीं हो जाएगा। वो थोड़ा सोचकर बोली – आप शक्तिल से एक बार पूछ लो, कहीं उसको तो मुझे ले जाने का मन नहीं है ना?

लीला खुश होते हुए – उसकी चिंता मत कर, वो मेरी बात नहीं टालता। तू थोड़े दिन हम लोगों के साथ रह ले।

सुभा – जैसा आप लोगों को ठीक लगे।

सुभा के अंदर एक दब्बूपन था, वो जल्दी किसी को ना नहीं कह सकती थी। शायद इसकी वजह आदिल भी था — उसे सुभा किसी चीज़ के लिए ना नहीं कहती थी।

लीला ने शक्तिल को समझाया और शक्तिल ने भी सुभा से आके उससे रज़ामंदी ली कि वो रुकने में कंफ़र्टेबल तो है ना। सुभा ने बस शक्तिल को कहा कि अगर मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैं फ़ोन करूँगी, अब आके ले जाना। बाकी वो 10 दिन रुकने को तैयार हो गई।

अगले दिन शक्तिल सुबह का खाना खाकर शहर के लिए निकल गया। अब घर में केवल भूखा रमाकांत, चालाक लीला और सुभा बस थे।

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रमाकांत को शक्तिल के जाने से जैसे खुला मैदान मिल गया था। वो लीला की चाल को समझ गया और उसको अंदाज़ा हो गया कि सुभा बस अब उसके नीचे आने वाली ही है।

रात को तीनों ने साथ खाना खाया। रमाकांत अब सुभा को बिना रोके-टोके घूर रहा था। सुभा और लीला दोनों उसकी नज़रों को समझ रहे थे।

लीला को डर भी लग रहा था कि कहीं ये जल्दबाज़ी में बहू के ऊपर चढ़ाई न कर दे। लेकिन रमाकांत भी माहिर खिलाड़ी था — उसको पता था कि रज़ामंदी से संभोग का आनंद दुगना हो जाता है और वो सुभा के बदन को पूरे आनंद के साथ भोगना चाहता था।

सुभा भी पहले से ज़्यादा इन लोगों के साथ कंफ़र्टेबल थी। आज उसने एक हल्की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज़ पहनी हुई थी। रमाकांत को सुभा जान-बूझकर अपना क्लीवेज खोलके दिखा रही थी।

रमाकांत ने खाते समय जी भर के आँखों से सुभा का रस पिया। पजामे में उसका लंड  तंबू बना चुका था, जिसको वो छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहा था।

लीला और सुभा दोनों ने रमाकांत के खड़े होते ही उसके पजामे के उभार को देख लिया। लीला ने सुभा से नज़रें मिलाईं, सुभा शर्मा कर अपना सर नीचे कर लिया। लीला भी मुस्कुरा दी।

रात में सोने के लिए लीला सुभा के कमरे में आ गई, और बोली कि मैं इसी कमरे में नीचे सो जाती हूँ, तुमको अकेले डर लगेगा।

सुभा – नीचे क्यों माँ? बिस्तर बहुत बड़ा है, आप साथ में सो जाओ यहीं पर।

लीला – अरे तुमको दिक्कत होगी, हम तो गाँव के लोग हैं, कहीं भी सो जाते हैं।

सुभा – नहीं माँ, मुझे अच्छा नहीं लगेगा। प्लीज़ आप यहाँ सो जाइए।

सुभा का सरल व्यवहार लीला को बहुत पसंद आया। वो इससे अंदाज़ा लगा ली कि इसको राज़ी करने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। दोनों बिस्तर पे अपने-अपने जगह में आ गए।

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लीला – बेटी, तू तो बहुत बड़े घर से है, ऊँची जाति से भी है, फिर तूने एक ग़रीब घर के बेटे से शादी क्यों की?

सुभा – शक्तिल एक अच्छा आदमी है। हम साथ में थे तो हमें प्यार था और मेरे घर में जाति में विश्वास नहीं करते, तो शुरू से ऐसा कुछ मैंने सोचा नहीं था।

लीला – वाह! बेटी, मेरे बेटे को तुझ जैसी बीवी मिल गई, उसके तो भाग्य खुल गए। और साथ ही हम लोगों के भी, जो तेरे जैसी बहू मिल गई।

सुभा – आप लोग अपने को कम मत समझिए माँ, आपका बेटा भी अब शहर में अच्छा पैसा कमाता है।

लीला – बस तुम लोग खुशी से जियो! हम अपनी दुनिया में खुश हैं।

सुभा – हाँ, वो तो पता ही है।

सुभा ने लीला को छेड़ते हुए कहा।

लीला चौंकते हुए – क्या बोल रही है और हँस क्यों रही है?

सुभा – माँ! कल आपके और ससुर जी की आवाज़ पूरे कमरे में आ रही थी। मैंने आप लोगों को सुन लिया। अच्छा लगा कि आप लोग इस उम्र में भी एक्टिव हो।

लीला शर्मा गई। फिर तुरंत उसके दिमाग़ में बात आया कि कल तो इसका नाम भी लिया था, और इसने सब सुना है तो पक्का इसको दिक्कत नहीं है।

लीला अब बहुत हल्का फ़ील करने लग गई और उसने खुलकर सुभा से बात करना चालू किया – तेरे ससुर जी जवानी से अब तक चुदाई में बहुत तेज़ हैं। बिना किसी की चूत या गाँड़ मारे उसको नींद नहीं आती है।

सुभा को लीला के मुँह से चूत और गाँड़ सुनके अच्छा लगा — पहली बार किसी गाँव के लोग से वो देहाती अंदाज़ में बात कर रही थी – मज़े तो हैं आपके फिर।

लीला – बेटा, शुरू-शुरू में तो बहुत मज़ा आया। पर हम औरतों पर बच्चों के बोझ पड़ने से ध्यान उसपे नहीं जाता, इसीलिए मैंने तेरे ससुर जी को उस रंडी चंदा के घर भेजने की छूट दे दी। वो अब ज़्यादातर वहीं हल्का होके आता है।

सुभा चौंकते हुए – ससुर जी किसी और को चोदें तो आपको दिक्कत नहीं?

लीला – अरे ये सब दिक्कत जवानी में होता है। अब भोसड़ीका बुढ़ा जाएगा भी कहाँ! कम से कम उसका लंड  ढीला रहता है तो मैं सुकून से सो पाती हूँ।

सुभा – तो कल कैसे?

लीला – अरे कल तो तेरे….

वो बोलते हुए रुक गई। वो सोच रही थी कि अब सुभा को क्या बोले, लेकिन उससे पहले ही सुभा ने बोला – बोलो माँ! मेरे से मत शर्माओ। कल सब सुना मैंने।

लीला – अरे बेटी, इनका लंड  तो देखी ही ना आज कैसे तंबू बनके खड़ा था! जब से तू आई है तेरी सुंदरता का असर इनके लंड  पर हो गया है। कल इनसे रहा नहीं जा रहा था तो मेरे ऊपर ही चढ़ गए।

लेकिन तू डरना मत, बिना तेरी मर्ज़ी के यहाँ कोई तुझे छू भी नहीं सकता है।

सुभा – ससुर जी कल लगातार आपको आधे घंटे तक…?

लीला – अरे उनके लंड  में बड़ी जान है। कोई नई लड़की को चोदें तो चोद-चोद के मार ही डालेंगे। वैसे भी उनका हवस उम्र के साथ कम नहीं हुआ, इसीलिए अभी तक इतना लंबा चलते हैं।

सुभा – बेटे से बिल्कुल अलग हैं।

लीला – इस कमरे की आवाज़ भी बाहर सुनाई देती है। मैंने कल सुना, शक्तिल कुछ ही धक्कों में झड़ गया। बेटी, तेरी प्यास तो बुझा देता है ना मेरा बेटा?

सुभा – अब आपसे क्या छुपाना माँ, वो आदमी बड़े अच्छे हैं लेकिन बिस्तर में औरत की प्यास को नहीं समझते। अक्सर ही मुझे तड़पाकर छोड़ देते हैं।

लीला – ये तो बहुत बड़ी बात है बहू। कल तेरे नाम से तेरे ससुर जी आधा घंटा चोदे हैं मुझे। अगर तू उनको मौका देगी तो वो तुमको खुश कर देंगे।

सुभा को पता था कि लीला ये बात उठा सकती है, लेकिन इतनी जल्दी और इतना स्ट्रेट पूछेगी उसको नहीं पता था। इसीलिए उसने बनते हुए कहा – माँ, ये कैसी बात कर रहे हो! मैं कैसे अपने ही ससुर के साथ…

लीला – हम छोटे लोगों में घर की इज़्ज़त घर में ही रहे, वो ज़्यादा ज़रूरी है बेटा। अगर तेरे ससुर जी तुझे संतुष्ट कर दें तो इसमें बुराई क्या है?

सुभा – लेकिन शक्तिल, उसको क्या जवाब दूँगी?

लीला – शक्तिल को पता नहीं चलेगा, और जब भी चलेगा तो मैं और तेरे ससुर उसको समझा देंगे।

सुभा की चूत अपने ससुर के साथ संभोग का सोचते हुए पानी छोड़ दी। सुभा अपने आप को संतुष्ट करने का अच्छा मौका पाई है।

अगर उसकी सास और ससुर दोनों इसमें राज़ी हैं तो शक्तिल भी ज़्यादा परेशान नहीं कर सकता। वैसे भी शक्तिल को आदिल का पता ही है, फिर भी सुभा के साथ खुश है।

सुभा ने अपना मन बना लिया, लेकिन इतनी जल्दी राज़ी होने से उसकी सास सोचेगी कि ये पक्का चुदक्कड़ है, इसीलिए वो लीला से बोली – माँ, पता नहीं ये सही रहेगा या नहीं। मैं सोचूँगी, लेकिन बस आप ससुर जी को कुछ मत कहना।

लीला – पागल है क्या! जब तक तेरी हाँ नहीं होगी, उनको भनक भी नहीं लगेगी।

रात ज़्यादा हो गई थी और लीला का काम भी लगभग हो चुका था। लीला को पता था कि सुभा अब आसानी से रमाकांत से चुद जाएगी, इसीलिए उसने उसको सोचने के लिए छोड़ दिया और सो गई।

सुभा की चूत भी गीली होकर जल्द से जल्द लंड  माँग रही थी। उसका बस चलता तो अभी जाके रमाकांत पर चढ़ जाती, लेकिन सुभा ने अपने को कंट्रोल करते हुए चुपचाप सोचते हुए सो गई।

इधर रमाकांत अपने लंड  को सुभा के नाम से रगड़-रगड़कर गरम कर डाला था। उसको लगा कि एक-दो दिन में लीला सुभा को तैयार कर लेगी। लेकिन लीला ने उसके उम्मीद से जल्दी काम कर लिया था।

रमाकांत भी अपने हाथ से अपने लंड  का पानी निकालके सो गया। अगले दिन किचन में दोनों ने रात के बारे में कोई बात नहीं की। दिन भर सामान्य गुज़रा, बस रमाकांत का घूरना चालू रहा।

अब सुभा को उससे परेशानी भी नहीं थी क्योंकि उसको रोकने वाला अब घर में कोई था ही नहीं। शाम को लीला ने रमाकांत से मच्छी मँगाया और सुभा के साथ मिलकर बनाया। रात का खाना खाके सब अपनी जगह सोने को आ गए।

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लीला – अरे बेटा, आज तेरे ससुर जी दिन भर बाज़ार में काम कर-करके थक गए हैं। तुझे तकलीफ़ नहीं हो तो ये ले तेल, जाके उनकी मालिश कर दे।

सुभा – नहीं माँ, मैं ऐसे अचानक कैसे उनके पास जाऊँ?

लीला – अरे इसमें क्या है, मैं उसको बोल देती हूँ कि तुम आ रही हो मालिश के लिए।

सुभा – वो ग़लत समझेंगे।

लीला – कुछ नहीं होता बेटी, तू जा। डर मत, मैं तो यहीं हूँ, दरवाज़ा खुला है।

सुभा तेल का डिब्बा लेके बाहर गई। वो ऐसे अपने ससुर से ज़्यादा बात नहीं करती थी, साथ ही उनके इरादों से भी वाक़िफ़ थी, इसीलिए उसके मन में डर और एक्साइटमेंट का मिला-जुला फ़ीलिंग था।

बाहर कमरे में रमाकांत अपना कमीज़ उतारे केवल पजामे में सोया था। कल की तरह ही उसका बड़ा लंड  तंबू बनाये हुए था। वो आँख बंद किये हुए लेटा था।

सुभा उसको उठाते हुए बोली – ससुर जी, माँ ने तेल भेजा है आपके लिए। रमाकांत आँख खोलते हुए, सुभा को सामने देखके कुछ और एक्साइटेड हो जाता है।

उसके सामने हाथ में तेल लिये उसकी बहू साड़ी और ब्लाउज़ में खड़ी थी। उसका बदन का हर कोना धीमी रोशनी में चमक रहा था। पूरी ज़िंदगी में ऐसा मौका रमाकांत को नहीं मिला था।

उसका लंड  तनके लोहे जैसा हो गया और सुभा को सलामी देने लगा।

रमाकांत – हाँ बेटा, मालिश के लिए होगा। लाओ, दो हमको।

सुभा ने तेल रमाकांत को दे दिया। उसकी हिम्मत नहीं हुई पहल करने की। रमाकांत भी चुपचाप तेल लेके बैठ गया। सुभा को कुछ समझ नहीं आया और वो वापस कमरे में चली गई।

लीला – क्या हुआ? कैसे आ गई?

सुभा – जी, वो उन्होंने तेल का डिब्बा ले लिया मेरे हाथों से। मैं कुछ बोल नहीं पाई।

लीला – बड़ा पागल आदमी है। समझता नहीं है।

लीला बड़बड़ाते हुए बाहर गई। उसने चिल्लाकर रमाकांत को डाँटा – जब बहू आई थी मालिश के लिए तो क्यों नहीं करवा रहा है मादरज़ात! बस तेरी सेवा मैं ही करूँगी क्या ज़िंदगी भर!

रमाकांत चौंक गया। उसको समझ नहीं आ रहा था कि बहू के सामने कैसे ये खुलके गाली दे रही है और उससे मालिश की बात कर रही है। उसने खड़े होते हुए इशारे से लीला को पूछा।

लीला उसका इशारा समझ गई और सर हाँ में हिलाते हुए फिर चिल्लाई – “वो मान गई है और तू साला यहाँ गाँड़ फँसाए बैठा है! जा, अंदर जाके मालिश करा ले।”

अंदर जाने की बात सुनते ही सुभा के रोंगटे खड़े हो गए। वो अपने को संभाल पाती इससे पहले ही रमाकांत अंदर आ गया।

सुभा अपने जगह खड़ी थी, रमाकांत सीधे सुभा को जाके बाहों में भर लिया। अचानक हुए हमले से सुभा समझ नहीं पाई कि क्या करूँ।

रमाकांत बुज़ुर्ग था लेकिन उसका शरीर गाँव का गठीला और ताक़तवर शरीर था। साँवले और भरे बदन वाले रमाकांत के आगे सुभा किसी बकरी की तरह चुपचाप खड़ी थी।

उसने रमाकांत को थोड़ा पीछे करने की कोशिश की लेकिन उसकी ताक़त के आगे उसकी एक न चली।

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रमाकांत सुभा के बदन के एक-एक हिस्से को चाटे जा रहा था। अंदर कमरे में लाइट जल रही थी, सुभा का गोरा बदन रमाकांत को पागल बना रहा था।

सुभा के लिए बूढ़े के साथ सेक्स एक नया अनुभव था। अभी तक उसने जितने लोगों के साथ सेक्स किया, सब शहर के सोफ़िस्टिकेटेड लोग थे। पहली बार उसे गाँव के एक साँड़ के साथ संभोग का मौका मिला।

रमाकांत का गठीला बदन पसीने से तर था। पुरुष की पसीने से भरी महक सुभा को गंदी तो लग रही थी, लेकिन ये उसकी चूत में पानी के फ़्लो को भी बढ़ा रही थी।

रमाकांत सेक्स में मँझा हुआ खिलाड़ी था। उसे पता था कि पहली बार सुभा न-नुकुर करेगी। इसीलिए उसने उसके कपड़े न खोलके अपना पजामा उतारा, और सुभा का एक हाथ ज़बरदस्ती अपने लंड  पे रख दिया।

सुभा ने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की लेकिन रमाकांत का हाथ उसे हटने न दिया। बेचारी सुभा हार मानकर उसका तना हुआ लंड  अपने हाथों में रखी थी।

सुभा जब अपने आप को संभाली तो उसका ध्यान रमाकांत के लंड  पे गया — आदिल के लंड  से मोटा और सख़्त। सुभा को पता ही नहीं चला कि कब उसका हाथ अपने आप उसके लंड  को सहलाने लग गया।

रमाकांत ने सुभा को नरम पड़ते देख अपना पकड़ ढीला कर दिया और सुभा को अपने पूरे शरीर को महसूस करने दिया। सुभा अब रमाकांत के बाहों में पिघलने लगी, उसका विरोध पूरी तरह से ख़त्म हो गया।

रमाकांत की पकड़ ढीली होने पर उसने दोनों हाथों से उसका लंड  पकड़ा और हिलाने लगी। रमाकांत सुभा का सपोर्ट पाकर उसको कंधे से पकड़कर नीचे की ओर धक्का दिया।

सुभा समझ गई उसे क्या करना है। वो नीचे घुटनों पर आ गई। रमाकांत के लंड  को देखके उसका मुँह खुल गया — लग रहा था जैसे किसी घोड़े के लंड  को हाथ में ली है।

रमाकांत ने कमर आगे करते हुए सुभा के सर को अपने लंड  की ओर बढ़ाया। सुभा मुँह खोलकर अपने ससुर के तगड़े लंड  का स्वागत किया।

लंड  की गंध तीक्ष्ण थी — मूत और पसीने की महक लेकिन एकदम तेज़। सुभा के नाक से होते हुए ये महक फेफड़ों में भर गई।

लेकिन रमाकांत की ताक़त के सामने वो कुछ नहीं कर सकती थी। रमाकांत ने जितना हो सकता था उतना अंदर तक लंड  को सुभा के मुँह में पेल दिया।

सुभा लगभग दस मिनट तक उसके मोटे लंड  को मुँह में रखी। अब उसके मुँह की और रमाकांत के लंड  की महक एक जैसी हो गई थी।

रमाकांत ने अपनी बहू को उठाते हुए अपने बाहों में भरा और उसके होठों को अपने मुँह में लेके चूसने लगा। सुभा अब इतनी एक्साइटेड हो गई थी कि उसे लगा कि उसका मूत निकल जाएगा।

रमाकांत ने ब्लाउज़ उसके जिस्म से अलग करके उसके दोनों बड़े बूब्स को अपने मुँह में लिया। सुभा बहुत समय बाद इतना रॉ पॉवर महसूस कर रही थी।

रमाकांत का हफ़्तों का इंतज़ार आज ख़त्म हुआ। वो क्लीवेज देख-देख के थक चुका था, लेकिन सुभा के बूब्स उसने जैसा सोचा था वैसा ही सुंदर पाया।

सुभा ने अपने ससुर के लिए रास्ता आसान करते हुए अपनी साड़ी ढीली कर दी। रमाकांत का हाथ पड़ते ही साड़ी नीचे गिर गई और सुभा अब केवल पैंटी में थी।

रमाकांत ने थोड़ा पीछे होते हुए पहले अपनी बहू के सुंदर रूप को निहारा, फिर उसके बाद उसको प्यार से अपने बाहों में उठाके बिस्तर पर लिटा दिया।

बिस्तर पर लिटाकर रमाकांत ने सुभा का पूरा बदन चूमा — उसके जिस्म का एक भी हिस्सा उसने छोड़ा नहीं। फिर पैरों की ओर जाते हुए उसकी पैंटी को तन से जुदा कर दिया।

पैंटी को दूर फेंकते हुए उसने सुभा से कहा — अब इसकी ज़रूरत नहीं तुम्हें। सुभा ने अपनी चूत क्लीन करके रखी थी। उसकी गोरी चूत के अंदर की गुलाबी पंखुड़ियाँ किसी गुलाब की तरह लग रही थीं।

रमाकांत ने दोनों हाथों से उसकी टाँगें फैलाकर गुलाबी चूत को निहारा, फिर अपने होठों से उसकी पंखुड़ियाँ फाड़ने लगा।

सुभा तो जैसे अब होश में नहीं थी। उसकी आहें लीला को साफ़-साफ़ सुनाई दे रही थीं। रमाकांत किसी भूखे भेड़िये की तरह सुभा की चूत का भोग कर रहा था।

सुभा के लिए अब बर्दाश्त से बाहर हो गया — उसकी चूत से मूत की एक मोटी धार रमाकांत के मुँह पर छूट गई। रमाकांत ने पूरा पानी अंदर गटक लिया।

पानी अंदर लेते ही जैसे रमाकांत पे राक्षस सवार हो गया। वो अपना भारी-भरकम शरीर सुभा के ऊपर चढ़ाकर एक झटके में ही उसकी चूत में डाल दिया।

सुभा चीखी — इतनी ज़ोर से कि अगल-बगल वालों को भी सुनाई दिया। सुभा की चीख़ सुनके लीला मुस्कुरा दी। वो समझ गई कि अब उसका काम हो गया।

कम से कम रमाकांत अब चंदा के पास नहीं जाएगा, तो उसका उधार बढ़ेगा नहीं। रमाकांत सुभा के ऊपर चढ़कर उसका मर्दन करते रहा।

सुभा की चूत एक बार पानी छोड़ चुकी थी, लेकिन लगातार धक्कों से वो वापस उतनी ही गीली हो चुकी थी। रमाकांत की ताक़त सुभा को बहुत पसंद आई — वो केवल टिकने में लंबा नहीं था, बल्कि उसके झटकों में भी ताक़त बहुत थी।

शादी के बाद पहली बार उसे सेक्स के समय आदिल की याद नहीं आई थी। 15 मिनट धक्कों के बाद रमाकांत अपना लंड  जड़ तक सुभा की चूत में डालके ज़ोर से गुर्राते हुए झड़ गया।

माल इतना कि लंड  बाहर निकलते ही फुहारे की तरह उसका वीर्य चूत से बाहर निकल आया। सुभा का पूरा बदन दर्द कर रहा था — उसका शरीर अभी रमाकांत की ताक़त के लिए तैयार नहीं था।

लेकिन दिनों बाद उसको रॉ सेक्स का आनंद मिला। वो अपने ससुर से लिपट गई जैसे उनको सेक्स के लिए धन्यवाद दे रही हो। रमाकांत को भी सुभा के ऊपर प्यार आया, उसको अपने से चिपकाकर दोनों सो गए।

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