घोड़ी बनाकर फिरसे फाड़ी सविता की चूत!

Antarvasna Ki Hindi Sex Stories : सविता को बनाया घोड़ी! बाल खींचकर पीछे से फाड़ी टाइट चूत! Wild Chudai की लगी शर्त! बिना कंडोम कोख में भरा दूसरी बार माल!

अभी तक आपने “हाथ बाँधके फाड़ी भाभी की टाइट चुत!” में पढ़ा :-

चिल्लाया, “सविता… ले ले मेरा रस… आ… आ… आ… आ…”

सारा वीर्य चूत में झाड़ दिया। गरम वीर्य अंदर जाते ही शांत हो गईं। ऊपर ही लेटा था। साँसें फूली हुई थीं। दोनों जोर-जोर से साँस ले रहे थे।

बाँहों में जकड़ रखा था। एक-एक बूँद चूत में गिर रहा था। लिपटी हुई, आँखें बंद कर पड़ी थीं। गरम वीर्य का एहसास हो रहा था।

उठने लगा तो बोलीं, “अम्म अमेय… रुको ना। जल्दी क्या है। लेटे रहो मुझ पर। और रहने दे उस शैतान को अंदर ही। छोड़ने दे उसे पूरा रस।”

बहुत खुश था। चूमा। कान में बोला, “आज से तू सिर्फ मेरी है सविता। मैं ही आज से तेरा पति हूँ। आज से तेरी चूत और तेरी माँग भरने का अधिकार सिर्फ मेरा है।”

बस मेरी तरफ देखती रह गईं। बाँहों में लिया और आँख बंद करके लेटी रहीं। ऊपर था। तेज धड़कन तक सुनाई दे रही थी।

अब आगे :-

थोड़ी देर एक-दूसरे की बाँहों में लिपटकर लेटे रहे। वीर्य पूरा चूत में उतर गया था। लंड थोड़ा नरम हो चुका था। पर सविता अभी भी उसे अंदर लिए पड़ी थीं। शायद गरमाहट का एहसास अच्छा लग रहा हो।

होश आया। आँख बंद करके सोई हुई थीं। माथे पर किस किया और देखने लगा। आँखें खोलीं। चेहरे पर मुस्कान थी। आँखों में अलग चमक। देखते ही जा रही थीं। होंठों पर लंबा किस किया और मुँह का सारा रस पी गईं।

ऊपर से हटने लगा। हाथ का सहारा लेकर हटा। धीरे से लंड चूत से निकाला। हँसने लगीं। बाहर निकलते ही गाढ़ा वीर्य नीचे बहने लगा। जरा भी देर नहीं की। झट चूत पर हाथ रखा।

बाहर आता वीर्य उँगलियों पर लिया और उँगलियाँ मुँह में डाल दीं। चाटने लगीं। कामुक नजर से देख रही थीं।

होश उड़ गए। ऐसा रूप देखकर चौंक गया। खुद को रोक नहीं पाया। फिर से ऊपर चढ़कर चूमने लगा। वीर्य उनके मुँह में था। किस के वक्त स्वाद आ रहा था। अब किसी चीज की परवाह नहीं थी। शायद प्यार हो गया था।

बहुत देर तक एक-दूसरे को चूमते रहे। इसी दौरान लंड पकड़कर सहलाने लगीं। चूत में उँगलियाँ डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। मजा आ रहा था। सिसकियाँ दिए जा रही थीं।

उँगलियों पर थोड़ा वीर्य लग गया था। वही उँगलियाँ मुँह में देता। बड़े चाव से चाटतीं, फिर चूमने लगतीं। बहुत देर चूमने के बाद थोड़ा होश आया। ऊपर से उठ गया। शर्माते-शर्माते थोड़ी दूर जाकर अंगड़ाई देने लगीं।

मैं भी उठकर बैठ गया। दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। नजर घड़ी पर गई। रात के चार बज रहे थे। पूरी तरह सन्नाटा छाया था। आँखें बंद कर ली थीं। बिस्तर पर मदहोश, नंगी पड़ी थीं। अभी होश में नहीं थीं।

पास रखी बोतल उठाई और पानी पीने लगा। आवाज सुनकर जग गईं। उन्हें भी प्यास लगी थी। धीरे से बोलीं, “आ जी, सुनते हो? मुझे भी पानी पिला दो। मेरा पूरा गला सूख पड़ा है, देख।”

अब पक्का था। अपना पति मान लिया था। ऐसी भाभी पाकर खुश भी था। इतने बड़े तरबूजे, मटकी से भी बड़ी गांड, प्यारी चूत, और रोज मिलने वाली चुदाई। किसे ऐसी बीवी नहीं चाहिए। ऊपर से जितनी मैं कामुक था, उतनी ही वो भी।

पानी दिया। बोतल मुँह से लगाई और पीने लगीं। बस देख रहा था। होंठों से थोड़ा-थोड़ा पानी नीचे गिर रहा था। बूँदें दोनों स्तनों के बीच से जाकर चूत पर गायब हो रही थीं।

ऐसा नजारा देखकर किसका लंड खड़ा नहीं होगा। लंड ने वापस सलामी दे दी। उठ खड़ा हो गया।

पानी पिया और बोतल हाथ में देते ही नजर सख्त लंड पर पड़ी। एकदम हँसने लगीं।

“अरे अमेय, ये थकता भी है या नहीं? तूने क्या इसमें सेल वगैरह फिट कर दिए हैं क्या, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। थोड़ा आराम भी करवा इससे।” हँसने लगीं।

“मैंने तो तुझे पहले ही बताया था सविता। मैं इतने में थकने वाला नहीं हूँ। और ना ही मैं तेरे पति जैसा हूँ। एक-दो बार किया और घी खत्म। अभी तो और जलवे दिखाने बाकी हैं मेरी जान।

आराम तो आज तक इसने किया ही था। आज से इसकी जॉब पक्की हुई है, वो भी तेरे खदान में।”

जोर से हँस पड़ीं। “तुम भी ना अमेय। जाओ। कुछ भी बोलते हो। मैं तो अब थक गई बाबा। अब मुझसे तो नहीं होगा। मुझे बस तुम्हारी बाँहों में ले लो अब। और कुछ नहीं करना।”

शर्माते-शर्माते बाँहों में आकर लिपट गईं। मैंने भी बाँहों में लिया। लंड खड़ा हो चुका था। बीच में आकर चुभ रहा था। खड़ा रखकर दिया। छह इंच होने की वजह से स्तन तक चला गया। अब स्तन को भी गरमाहट लग रही थी।

लिपटकर आँखें बंद कर ली थीं। “अमेय… अम्म्म… हटाओ इसे। अभी तो इसे शांत कर दे तू। थोड़ी देर बाद करेंगे अब। मैं थक गई हूँ ना।”

कुछ नहीं बोला।

“कुछ तो बोलो ना। चुप मत बैठो ऐसे।”

“क्या बोलूँ सविता?”

“कुछ भी बोलो। बताओ मुझे, तुम मुझे कभी छोड़कर तो नहीं जाओगे? बताओ तुम मुझसे कितना प्यार करते हो? कुछ भी प्यारी बातें करो मेरे से।”

आँखें खोलीं। मेरी तरफ देखने लगीं।

“अब ये क्या अचानक से बीच में पूछ रही हो।”

“तुम बस बताओ।”

“अरे नहीं जाऊँगा बाबा। तू ऐसे सोच भी मत सविता। और रही बात प्यार की, तो आज तक मैंने किसी से भी इतना प्यार नहीं किया जितना मैं तेरे से करता हूँ।”

मुस्कुराने लगीं। एकदम लाड़ में आ गईं। “हाँ। तुम मुझे अगर छोड़ दोगे ना, तो मैं मर ही जाऊँगी। मैं भी बहुत प्यार करने लगी हूँ तुमसे। मैं अब नहीं जी सकती तुम्हारे बिना।”

“इतना प्यार करती है तू मुझसे?”

“हाँ फिर। बहुत-बहुत ज्यादा। मुझे तुम पहले से ही पसंद थे। पर मैं शादीशुदा थी और तुम इतने छोटे थे, तो उस बात पर ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया। पर मन में तुम्हारे लिए कुछ था।

और इन दिनों मैं तुमसे कुछ ज्यादा ही प्रभावित होने लगी थी। और देखो, अब सब बदल गया है। अब हमारे बीच में कुछ भी नहीं आ सकता। हमें कोई जुदा नहीं कर सकता।”

थोड़ा सीरियस चेहरा किया। “नहीं सविता। अभी भी हमारे बीच एक चीज आ सकती है। जिससे तुझे शायद तकलीफ हो।”

एकदम सीरियस होकर देखने लगीं। झट पूछा, “क्या? कौन सी चीज अमेय? बताओ मुझे।”

तरफ देखा। हाथ पकड़ा और सीधे लंड पर रख दिया।

“ये चीज। यही आ रही है हमारे बीच सविता। तू ही देख।” हँसने लगा।

एकदम शर्मा गईं। लंड पर थप्पड़ लगाया। “तुम कुछ ज्यादा ही शरारती होने लगे हो हाँ। शैतान कहीं के।”

फिर बाँहों में आकर लिपट गईं। पर एकदम लंड पकड़ा और हिलाकर मसलने लगीं।

“कैसा लग रहा है अमेय? अब तुम लेट जाओ और सब मुझ पर छोड़ दो।”

दूसरे हाथ से पीछे धक्का दिया। बिस्तर पर लेट गया। लंड हिलाने लगीं। हिलाते-हिलाते झट मुँह में ले लिया। चूसे जा रही थीं। थूक पूरे लंड से फिसलकर जाँघों पर टपक रही थी।

मुँह से बस इतना निकल रहा था, “आह… आह सविता… चूस मेरा लंड… और जोर से चूस… पूरा ले मुँह के अंदर… पूरा ले… आह… आह… मैं झड़ जाऊँगा तेरे मुँह में सविता… ओह्ह… ओह्ह… ऐसे ही मेरी जान…”

रुक ही नहीं रही थीं। पंद्रह मिनट से मुँह में ही दबा के रखा था। झड़ने भी नहीं दे रही थीं। जब भी करीब आता, झट रुक जातीं। ऐसा ही बड़ी देर तक चला।

मुँह से निकाला। थोड़ा बगल बैठ गईं। चूस-चूस के थक चुकी थीं। तुरंत उठ गया। पास लिया।

“सविता, अब मुझे तेरी चूत चाहिए। जल्दी से तू घोड़ी बन जा।”

चूत गीली हो चुकी थी। शर्माईं। “तुझे पीछे से करने में ही मजा आता है क्या?” हँसने लगीं।

“हाँ सविता। तेरी गांड देखते-देखते तुझे चोदने में अलग ही मजा आता है। और मैं पीछे से तुम्हारे चुचे भी दबा सकता हूँ। और चाहे तो तेरी गांड भी मार सकता हूँ।”

“एक थप्पड़ पड़ेगी ना जोर से, कि सब बोलती बंद हो जाएगी तेरी। उस तरफ जाने की सोचना भी मत। बहुत दर्द होता है मुझे वहाँ पर।

पति ने पहले ही मार-मार कर इतने बड़े करवाए हैं मेरे कुल्हे। सब लोग इसे ही देखते रहते हैं। अब इससे बड़े मुझे नहीं करवाने। और ऊपर से तेरा इतना बड़ा और मोटा है। मैं तो सपने में भी न सोचूँ इसे पिछवाड़े में लेना।”

“सविता, तुझे लगी शर्त तो याद है ना। सुबह तक अगर मैं नहीं थका तो जो भी मैं बोलूँ, तू वही करेगी। नौकरानी-मालिक। हम्म, कुछ याद आ रहा है?”

एकदम शर्त याद आ गई। घड़ी की तरफ देखा। साढ़े चार बज रहे थे। मेरी तरफ देखा।

“हाँ-हाँ, याद है। मैं लगाई शर्तें कभी भूलती नहीं। और वैसे भी अभी साढ़े चार बजे हैं। सूरज उगने में तीन घंटे हैं अभी भी। तीन घंटों में तुझे और तेरे लंड को सुला कर ही मानूँगी। देख लेना।”

“कौन से तीन घंटे? छह बजे सूरज निकलना शुरू होता है। उस हिसाब से डेढ़ घंटा ही बचा है।”

“मेरा सूरज साढ़े सात के बाद निकलता है। मंजूर है तो बोल, वरना तू अभी भी शर्त छोड़ सकता है।”

चारा नहीं था। हाँ कर दी। सारी शर्त मंजूर कर ली। अब कैसे भी करके तीन घंटे निकालने थे। तभी गांड मार सकता था।

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“ठीक है चल सविता। तेरी सारी शर्तें मंजूर। लेकिन बस तू सोच, अगर मैं जीत गया तो? तो फिर तुझे जो भी मैं कहूँ, सब मानना पड़ेगा। तब नखरे नहीं हाँ।”

“हा हा, पहले जीत तो जा। अगर सच में तेरा इतना स्टैमिना रहा ना अमेय, तो मैं दिन-रात तुम्हारी पूजा करूँगी। ये चूत, ये पिछवाड़ा, सब तेरे नाम पर कर दूँगी। तू जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे उसे इस्तेमाल कर। मैं कुछ नहीं बोलूँगी। ठीक है। हो गई अब तसल्ली।”

“है सविता, ठीक है। और चल, अब जल्दी से घोड़ी बन जा। और कितना इंतजार करवाएगी मेरे लंड को?”

“हाँ। ले, अभी बन जाती हूँ। डाल दे।”

सामने घोड़ी बनकर बैठ गईं। जरा भी देर नहीं की। झट लंड चूत में डाल दिया। इस बार जरा सा भी रहम नहीं दिखाया। पूरा का पूरा लंड एक ही झटके में घुसेड़ दिया।

जोर से चिल्ला उठीं। रोकने के लिए हाथ बदन पर सटाया। देर हो चुकी थी। पूरा लंड चूत फाड़कर अंदर जा चुका था। चीखें रुक ही नहीं रही थीं।

“अह्ह… आह… मर गई मैं… मेरी चूत फट गई रे… अमेय तूने ये क्या कर दिया… इतनी जोर से नहीं डालना था रे पागल… दुख रहा है अब… आह… आह… ओह्ह… हाय ये जलन क्यों नहीं रुक रही… हाय दइया… मर गई रे…”

रुकने वाला नहीं था। जोर-जोर से अंदर-बाहर करना शुरू किया। एक हाथ से बाल पकड़ लिए और जोर से खींचे। चिल्लाईं और कमर के भाग से ऊपर उठ गईं। झट दूसरे हाथ से स्तन हाथ में लिया और मम्मे दबाने लगा।

थोड़ी देर बाद दर्द कम हो गया। अब मजा आने लगा। पीछे होकर चूमने लगीं।

“और जोर से दबा ना मेरे तरबूजे। दूध निकाल इनमें से। कर दे पूरा बिस्तर गीला।”

“रुक मेरी घोड़ी। तुझे बताता हूँ।”

बाल जोर से खींचे और पीछे लाया। अब दोनों हाथों से तरबूजे मसल रहा था। स्तनों से दूध के फव्वारे पूरे बिस्तर पर उड़ रहे थे। चिल्लाए जा रही थीं। लंड से भी जोरदार झटके दिए जा रहा था। जब तक झड़ नहीं जाता, रुकने वाला नहीं था।

स्पीड बढ़ाई। सिसकियाँ बढ़ने लगीं। जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। तभी अचानक झड़ गईं। इस बार चूत से बहुत सारा पानी निकला। लंड के साथ-साथ पूरा बिस्तर गीला हो चुका था।

ये देखकर लगने लगा मैं भी झड़ने वाला हूँ। खुद को रोक नहीं पा रहा था। बाल कसकर खींचे। चिल्लाते हुए पीछे आईं। होंठ दाँतों से दबाया और जोरदार झटके देने लगा। उन्होंने भी होंठ चबाए। जमकर चूमने लगे।

बारी आ गई। स्तन जोर से दबाया और लंड का जोरदार आखिरी झटका दिया। आँखें एकदम बड़ी कर दीं। कुछ समझ नहीं आ रहा था। मुँह खुला का खुला रह गया। अभी तक की जोरदार चीख निकाली। आवाज पूरे घर में गूँज उठी।

“उईईईई माँ… अमेय… नहीं… नहीं… अरे मर गई रे… आह… अह्ह… ओह्ह… ओह्ह… ओह्ह…”

पूरा चूत में झाड़ दिया। झड़ने तक स्तनों को ऐसा पकड़कर रखा जैसे कोई स्पंज बॉल हो। चिल्लाए ही जा रही थीं। सारा माल धीरे-धीरे चूत में उतर रहा था।

पूरा माल उतारने के बाद लंड बाहर निकाला। बिस्तर पर ही गिर गईं। साँस फूल गई थी। जोर-जोर से साँस ले रही थीं। कुछ सूझ नहीं रहा था। पसीने से लथपथ दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। पूरे बदन से पसीना टपककर बिस्तर पर गिर रहा था।

उनकी तरफ देखा। पैर फैलाए मेरी तरफ देखती पड़ी थीं। नजर चूत पर गई। धीरे-धीरे माल बाहर निकल रहा था। साँवली चूत पर दही जम चुका था।

किसी पहाड़ से सफेद पानी का झरना बह रहा हो, ऐसा दृश्य था। वहीं डाली चादर उठाई और चूत साफ कर ली।

घड़ी में पाँच बज चुके थे। बाहर बारिश चालू हो गई थी। मौसम ठंडा पड़ गया था। घर में एसी चलने की वजह से ठंड ज्यादा ही पड़ गई थी। झट पास जाकर बाँहों में लिया। उन्होंने भी जकड़ लिया।

अब एक-दूसरे की बाँहों में लिपटकर लेटे थे। नंगे होने की वजह से शरीर की गरमाहट मिल रही थी। आँखें बंद कर ली थीं। मैं सिर्फ चेहरा देखे जा रहा था।

चेहरा साँवला था। घर-घर चटाई बेचती थीं, धूप में चलना पड़ता था। अंदर का शरीर, स्तन, नाभि और गांड, थोड़े गोरे थे। चेहरा साँवला होने के बावजूद आकर्षक था।

सुंदर और मनमोहक। फिगर की वजह से और मादक दिखतीं। आँखों में भर रहा था।

आगे की कहानी : ”jald hi’

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