Devar Bhabhi Wild Sex Stories : देवर ने हाथ बाँध दीवार से सटाकर फाड़ी सविता भाभी की टाइट चूत! करवाया मूसल लंड की सवारी! फिर बिना कंडोम के कोख में भरा पूरा माल!
अभी तक आपने “टॉवल से बाँधकर गले तक डाला लंड!” में पढ़ा :-
कान में बोला, “सविता, अब मैं तेरे चूत में लंड घुसाने वाला हूँ। तू तैयार हो जा। मुझे अब कंट्रोल नहीं हो रहा।”
दोनों एक-दूसरे के साथ सहज हो चुके थे। बिना लाज सब बोल रहे थे। बिना शरमाए अंगों के नाम लेकर गंदी बातें कर रही थीं। जो चाहिए बेझिझक बता रहे थे।
बस देखने लगीं। गुस्सा था। पर चूत के अंदर लंड लेना भी था। तरस रही थीं।
ऐसे बोलने से गुस्सा गायब हो गया। गाल में मुस्कुराईं और हँसने लगीं। समझ गया, अब मजा लेना चाहती हैं।
“हाँ क्या। पहले तेरे लंड को तो तैयार कर ले। फिर आ जाना डालने। शैतान कहीं के।”
झट लंड कसकर पकड़ा और हिलाने लगीं। इस बार पकड़ ज्यादा मजबूत थी।
“सविता, धीरे-धीरे… अह्ह… ओह्ह…”
थोड़ा शर्माईं। “इस शैतान को अगर जल्दी खड़ा करवाना हो तो ऐसे ही करना पड़ेगा अमेय।” जोर से हँसने लगीं।
“सविता, मेरे लंड को थोड़ा गीला कर दे ना। तभी वो तेरे चूत में आराम से जा पाएगा।”
मेरी तरफ देखकर शर्माईं। “हाँ-हाँ, लेती हूँ मुँह में। रुक जरा।”
अब आगे, उसी कहानी का :-
इतना बोलते ही नीचे बैठ गईं। स्तनों के बीच लंड रख दिया। इतने बड़े थे वो तरबूजे कि लंड बीच में गायब ही हो गया। पकड़कर बूबजॉब देने लगीं। बीच-बीच में मुँह में लेतीं, पूरा गीला करतीं, फिर स्तनों के बीच मसलने लगतीं।
लंड लाठी की तरह मोटा और सख्त हो चुका था।
“अमेय, तेरा लंड तो झट से खड़ा करवा दिया। देख लिया? मेरा कमाल।” जोर से हँसने लगीं।
“तू ही तो इसकी रानी है सविता। तू ही मेरे लंड को जगा सकती है। किसी और में इतनी ताकत कहाँ है, मेरी जान।”
शर्मा गईं। लंड मुँह से बाहर निकाला। तीन-चार थप्पड़ गाल पर लगाए। फिर से मुँह में सरका दिया।
पूरा गले लिया। थूक से गीला और चिपचिपा कर दिया। गॉक-गॉक-वैक की आवाज से रूम गूँज उठी। चूत में जाने के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया था।
मुँह से निकाला। “सविता, ये हथियार अब तैयार है। बस अब मुझे तेरी चूत दिखा, जल्दी।”
“अरे हाँ। जरा आराम से ले। मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।” हँसते-हँसते उठ खड़ी हुईं।
“ठीक है। अब जैसा मैं बोलता हूँ, वैसा कर।”
“जब से आई हूँ तब से वही कर रही हूँ। और कोई रास्ता है क्या मेरे पास? बोलिए महाराज, क्या आदेश है आपका?”
दोनों हँस पड़े।
एक फैंटेसी थी। वीडियो में खड़े-खड़े चोदते देखा था। आज मौका भी था।
“सामने की दीवार है ना, वहाँ पर चल बस।”
कुछ समझ नहीं आया। फिर भी दीवार तक गईं। मुड़कर पूछा, “हाँ, अब क्या?”
“घूम जा वापस। पीछे मत देख। मैं तुझे दीवार पर सटा के रखूँगा और खड़े-खड़े चोदूँगा।”
“क्या? खड़े-खड़े? अमेय, कुछ दूसरा नहीं कर सकते क्या? खड़े-खड़े चूत ज्यादा टाइट रहती है। और दर्द होता है, वो अलग से।”
“सविता, जितना दर्द उतना मजा भी तो आता है ना। मुझे कुछ नहीं सुनना। तू जो बोला गया है उतना कर।”
थोड़ी परेशान हो गईं। फिर भी पीछे मुड़ गईं। दीवार पर छाती लगाई और खड़ी हो गईं।
मुड़ते-मुड़ते बोलीं, “अमेय, बस धीरे करना हाँ। बहुत साल हो गए मेरी चूत ने लंड चखा। इनकी बीमारी शुरू होने के बाद उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं था।”
“तू चिंता मत कर। ठीक है। मैं एकदम हल्के से चूत में डालूँगा। और हाँ, सुन ना। तेरे हाथ पीछे ले और गांड पर रख।”
“अब किसलिए हाथ पीछे? तू कुछ नया-नया ही निकाल रहा है हाँ अमेय।”
हाथ पीछे किए। पास गया और फिर से टॉवल से बाँध दिए।
“अमेय, ये क्या कर रहे हो तुम? फिर से क्यों बाँध रहे हो हाथ?”
एक न सुनी। “तेरे हाथ बँधे रहें वही अच्छा है। तू बस मैं बोलूँ वैसा कर। चुपचाप खड़ी रह यहाँ पर।”
हाथ पकड़ा। बदन दीवार से सटा दिया। कमर पीछे ओढ़कर पैर फैला दिए। ये सब देखकर शर्म से लाल हो गई थीं।
“सुनो। ठीक है। कर ले। आज तुझे कुछ नहीं बोलूँगी। बस एक बात सुन।”
गौर से सुनने लगा।
“पहली बार में पूरा मत घुसाना। मैंने लगभग पाँच साल से कुछ भी नहीं किया है। मेरी चूत अब टाइट हो गई होगी। और मुझे जोर के झटकों की आदत नहीं है। तो धीरे हाँ।
और तो और मेरे पति का हथियार तुम्हारे जितना बड़ा और लंबा नहीं था। तो बिल्कुल गड़बड़ मत करना। धीरे-धीरे ही डालना।”
“ठीक है सविता। तू एकदम निश्चिंत हो जा। तू कहेगी वैसा ही सब होगा।”
दीवार के सहारे खड़ी थीं। पूरा बदन चिपका था। हाथ पीछे बँधे थे। गांड एकदम पीछे ला रखी थी। मोटा लंड गांड को चुभ रहा था।
पैरों के बीच अच्छा-खासा गैप लिया था, ताकि चूत ज्यादा फैले और दर्द कम हो। इसी वजह से चूत की रेखा और गांड का छेद एकदम अच्छे से दिख रहा था।
खुद को रोक नहीं पाया। थोड़ी थूक हाथों पर ली और चूत के ऊपर मसल दी। शरीर में करंट सा दौड़ गया। हरकतें देखकर हँसने लगीं।
“कहाँ से सीखा तुमने ये सब अमेय? कितने शरारती हो तुम। सुनो, और थोड़ी थूक लो। इतनी काफी नहीं होगी।”
शर्म आने लगी। “ठीक है, रुक। और थूक लगाता हूँ।”
नीचे बैठ गया। जीभ चूत में डाली और चूसने लगा।
“उई माँ… ओह्ह… अह्ह… अच्छा लग रहा है… आ… आ… कर और कर अमेय… चूस मेरी चूत को… चाट ले पूरी चूत… आज बस ये तेरी है… रुक मत चाटता रह…”
चूत और गांड का छेद चाट-चाटकर गीला कर दिया। चूत की रेखा से शुरू कर गांड के छेद तक जीभ घसीटता। बस सिसकियाँ देती रह जातीं। अब चूत से पानी बहने लगा था। देर नहीं की।
खड़ा हो गया। हथियार एकदम सख्त और बड़ा हो चुका था। लंड चूत पर रख दिया। गरमाहट लंड पर महसूस हो रही थी। जोर की सिसकी लीं। तभी धीरे से ऊपर का टोपा चूत में सरका दिया।
हाथ पकड़ लिया और चिल्लाईं, “अह्ह… आह्ह… बस-बस धीरे… जल रहा है वहाँ… जल रहा है… अह्ह… अह्ह…”
सच बोल रही थीं। चूत बहुत टाइट थी। मजा आ रहा था। रुकना नहीं था। पूरा अंदर घुसा के ही मानना था। रुका नहीं। हल्के-हल्के झटके देने लगा। सिर्फ कुछ हिस्से से अंदर-बाहर कर रहा था।
पागल हो रही थीं। आँखें बंद कर सिसकियाँ ले रही थीं। चूत ने लंड को जकड़ लिया था। कई दिनों बाद इतना बड़ा लंड मिला था, इसलिए पूरे मजे से अंदर-बाहर करवा रही थीं।
मेरे लंड ने पहली बार किसी चूत को चखा था। जो महसूस हो रहा था, शब्दों में बयान नहीं हो सकता।
लग रहा था वक्त यहीं रुक जाए। दिन-रात सविता के साथ चुदाई करता रहूँ।
मुँह से बस इतना निकल रहा था, “आह्ह्ह… ओह्ह… धीरे अमेय… चोदो मुझे… चोदो…”
चूत का रस लंड को गीला करे जा रहा था। धीरे-धीरे झटके बढ़ाने शुरू किए। अभी तक आधा ही अंदर लिया था। स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से चीखने लगीं। अब उन्हें भी मजा आने लगा था। एक हाथ से बाल कसकर पकड़ रखे थे।
थोड़ी देर यही चलता रहा। दोनों पसीने से नहा चुके थे। उनके शरीर से पसीना टपक रहा था। स्तन पकड़े और दबाने लगा। चुदी जा रही थीं और चिल्ला रही थीं।
“चोदो मुझे… चोदो… अह्ह… अह्ह… ओह्ह… ओह्ह… और जोर से अमेय…”
सुनकर और उत्तेजित हो रहा था। मेरे मुँह से भी आह… आह… ओह्ह निकल रहा था।
देर नहीं करनी थी। पूरा लंड घुसाना था। रुक गया। “सविता, अब थोड़ा दर्द होगा। मैं पूरा लंड अंदर डालने वाला हूँ।”
कुछ नहीं बोलीं। सिर्फ आँखें बंद कर लीं और नाखून मेरे पेट पर गाड़ दिए। जोर का एक झटका दिया। पूरा लंड चूत में समा गया।
“उई माँ… मर गई मैं तो… आह्ह… आह्ह… रुको… ओह्ह… ओह्ह… मार डाला रे… फाड़ दी तूने… अह्ह… फाड़ डाली रे मेरी चूत… बापरे… अह्ह… ओह्ह…”
अब रुकने वाला नहीं था। पूरी ताकत से अंदर-बाहर करवा रहा था। चूत थोड़ी ढीली पड़ गई थी। आराम से अंदर ले रही थीं। जाँघें गांड पर जोर से भीड़ रही थीं।
पूरे रूम में पच-पच-पच की आवाज गूँज रही थी, जैसे कोई ताली बजा रहा हो। आवाज एकदम तेज हो गई।
“आह… आह… अह्ह… अह्ह… जोर से… और जोर से… सही कर रहे हो जान… वही… वहीं पे… आह… आह… रुक मत… मुझे और दे… और घुस लंड… और घुसा… ऐसे ही करता रह… हाँ… हाँ… बस-बस रुकना नहीं… जोर से… और जोर से कर…”
पूरे लंड पर झड़ दिया। सब पानी लंड पर और जमीन पर गिर गया। जोर-जोर से सिसकियाँ दे रही थीं।
चूत से लंड बाहर निकाला। जोर-जोर से साँसें ले रही थीं। बँधे हाथ खोल दिए।
मेरी तरफ घुमाया। हाँफने लगीं। साँस फूली हुई थी। जोरदार चुदाई की वजह से टाँगें काँपने लगी थीं। ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। स्तन बहुत लाल हो चुके थे।
एक हाथ से मुझे पकड़ रखा था। दूसरे से चूत सहला रही थीं। शायद वहीं थोड़ा दर्द हो रहा था। बहुत दिनों बाद चुदाई हुई थी, वो भी खड़े-खड़े। होना ही था।
“सविता, तू ठीक है ना? तुझे मजा तो आ रहा है ना, मेरी जान?”
गाल ही गाल में हँसने लगीं। आँखें खोलीं।
“तूने आज मेरी चूत ही फाड़ दी है। मेरी टाँगें तक काँपने लगी हैं, देख। मुझे ठीक से खड़ा भी नहीं होने दे रहा है। और देख, मैं पूरा झड़ गई तेरे लंड पर। आज तक मैंने इतना नहीं झड़ा।
तू मुझे पागल ही कर देगा अमेय। अरे, तेरा आज झड़ेगा भी कि नहीं? शैतान की औलाद। मेरी तो अब कमर तोड़ दी और तेरा अभी तक वैसे का वैसा ही खड़ा है। हाय दइया, किस चक्की का आटा खाता है तू?”
सुनकर हँसने लगा।
“तूने आज असली मर्द देखा है मेरी जान। मर्द ऐसे ही अपनी रानी को चोदता है। अभी तो पूरी रात बाकी है।”
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“मर्द? तुम शैतान हो अमेय। तुम मनुष्य ही नहीं हो। और हाँ, अब बस खड़े-खड़े चोदना। मेरी कमर गई अभी से। मुझसे और नहीं होगा।”
“हाँ क्या सविता। फिर क्या करें? ऐसा कर, तू बैठ जा थोड़ी देर। आराम कर जरा।”
अलग ही नजर से देखा। “बैठूँ क्यों? बूढ़ी थोड़ी हो गई हूँ। बस कई दिनों बाद चुदवा रही हूँ ना, इसलिए ऐसा हुआ।
अभी तो मैं गरम हो चुकी हूँ। बस तू रुक मत। कैसे भी करके मरवा मेरी चूत। वैसे भी रुक, अब मेरी बारी। तू बस लेट जा, बाकी का अब मैं करूँगी। मुझे तुम्हारी सवारी करनी है।”
रुकने वाली नहीं थीं। लंड की दीवानी हो चुकी थीं।
“तू जैसे चाहे वैसे चुदवा सविता। आज ये लंड तेरे हवाले। आज पूरी रात मैं तुझे चोदने वाला हूँ। तू बस अपनी चूत तैयार रख।”
बिस्तर पर चला गया।
“पूरी रात? तेरा लंड इतनी देर तक खड़ा तो रहेगा क्या? आया बड़ा पूरी रात चोदने वाला। अभी दो मिनट में देख, तू झड़ जाएगा। इसके बाद तू और तेरा लंड सीधा सुबह ही जगेंगे।”
स्टैमिना पर भरोसा नहीं था। आज तक पति से ही चुदवाई थीं। लग रहा था मैं भी एक-दो बार झड़कर थककर सो जाऊँगा। पर रोज जिम जाता था। डाइट अच्छी थी। स्टैमिना बढ़ा था।
“सविता, तू मुझे चुनौती मत दे। ठीक है चल। अगर मैंने तुझे पूरी रात चोदा तो फिर क्या देगी मुझे?”
“हा हा हा। मजाक अच्छा कर लेते हो। पर चल, अगर तूने मुझे पूरी रात चोदा तो कल से जो बोलेगा मैं वैसा करूँगी। जो भी तू बोले वही होगा।
समझ ले कि तू मेरा मालिक और मैं तेरी नौकरानी। पर अगर तू जरा सा भी थक के सो गया तो फिर कल से तुझे कुछ नहीं मिलेगा। ना मेरी चूत, ना चोदना। मैं कल ही घर चली जाऊँगी। बोल, है मंजूर?”
चुनौती मंजूर थी।
“ठीक है सविता। तो लगी शर्त। अब बात मेरे सम्मान की है। तू देख, आज रात भर तुझे बैठने तक नहीं दूँगा। बाद में मत बोलना कमर दुख रही, गांड दुख रही। बस अब आराम कर।”
जोर से हँसने लगीं। मैं सीरियस था। खुद को साबित करना था।
“हाँ-हाँ, कुछ नहीं बोलूँगी। पर सुन। रात तक तो तुझे रुकना ही नहीं है। और जैसे ही सुबह होगी, मैं तेरे लंड को देखूँगी। वो खड़ा ही होना चाहिए। अगर सिकुड़ गया होगा, या वापस खड़ा नहीं हो रहा होगा, तो तू शर्त हार गया।”
जानकर बीच में शर्तें डाल रही थीं। डर रही थीं। सच में जीत गया तो लेने के देने पड़ सकते थे।
“ठीक है सविता। तेरी सारी शर्तें मुझे मंजूर हैं।”
बिस्तर पर लेट गया। इशारे से ऊपर आने को कहा। झट पास आ गईं। लेटे-लेटे दीवार पर टंगी घड़ी देखी। रात के तीन बज रहे थे। चार-पाँच घंटे की बात थी। स्टैमिना टिका के रखना था।
“ठीक है। चलो देखते हैं आज कौन पहले थकता है। चल, अब मुझे तेरी सवारी करने दे।”
ऊपर आ गईं। हाथ से लंड चूत में सरकाया और हल्का-हल्का अंदर सरकाते मेरे ऊपर बैठ गईं। आँखें बंद कर ली थीं। धीरे-धीरे खुद आगे-पीछे होने लगीं। सिसकियाँ देने लगीं।
हाथ पकड़कर स्तनों पर रख दिए। दबाने का इशारा कर रही थीं। देर नहीं की। जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया। मजे लेने लगीं। सिसकियाँ। दूध पूरे बदन पर गिर रहा था।
मदहोश हो रही थीं। आवाज तेज हो रही थी। उछल-कूद करना शुरू कर दिया। पंजों पर बैठ गईं और लंड पर उछलने लगीं।
आधा लंड चूत से बाहर आए इतना उठ जातीं, झट से बैठ जातीं। लंबे लंड का मजा आने लगा था। चूत धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगी। और मजा आ रहा था।
बीच-बीच में झड़ रही थीं। चूत का पानी बहकर पूरे पेट पर गिर रहा था।
“आह… आह… ओह्ह… इतना मोटा लंड… ये मैं खा जाऊँगी… ओह्ह… आह्ह्ह… चोदो… चोदो मुझे…”
यही कहे जा रही थीं। थोड़ी देर तक यही चला। फिर रुक गईं। बाँहों में आकर चूमने लगीं। लंड अभी भी अंदर ही था। सारी थूक मुँह में दे रही थीं। जीभ चूस रही थीं। किस के टाइम भी चूत ऊपर-नीचे किए जा रही थीं।
थोड़ी देर किस के बाद उठ जाने का इशारा किया। फिर से पंजों पर बैठने को कहा। वैसा ही किया। मदहोश थीं। पंजों पर बैठ गईं। झट कमर का भाग ऊपर उठाया और लंड चूत में घुसाया।
एकदम चिल्ला उठीं। समझ आ गया था, अब बस ऐसे ही बैठना है। बाकी मैं करूँगा। कुछ न करते वैसे ही बैठी रहीं।
जोर-जोर से झटके देने लगा। टोपे तक बाहर निकालता और एक जोरदार झटका देकर पूरा अंदर डालता। हर बार चिल्ला उठतीं। मजा आने लगा था। स्पीड बढ़ाई।
और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। हाथ घुटनों पर रखकर इंडियन टॉयलेट की तरह बैठी थीं। मुँह खुला ही था। जोर-जोर से सिसकियाँ मारकर चिल्ला रही थीं।
“आह… आह… आह… ओह्ह… ओह्ह… आह… आह… ओह्ह…”
स्पीड बहुत बढ़ चुकी थी। लगातार झटके दे रहा था। कभी भी झड़ने वाली थीं।
बस एक मिनट बाद, कुछ समझ पाता, एकदम खड़ी हो गईं। चूत से बड़ा पानी का फव्वारा मुँह पर और पूरे बदन पर गिर गया। पूरा झड़ गई थीं।
मेरी तरफ देखने लगीं। दोनों जोर से हँसने लगे। थक गई थीं। नीचे बिस्तर पर बैठ गईं। तुरंत उठ गया। लंड मुँह के सामने रख दिया।
“सविता, मुँह खोल और ये पूरा मुझे साफ करके दे। और मुझे बता तेरी चूत का स्वाद कैसा है।”
कुछ नहीं बोलीं। लंड पकड़ा और मुँह में ठूँस दिया। मस्त अपने चूत का स्वाद ले-लेकर चूसने लगीं। बार-बार पूरा मुँह में घुसाकर गले तक ले जाता। बड़े मजे से चूस रही थीं। सारी थूक लंड पर थी। पूरा मुँह में लेकर गोटियाँ चाटतीं और उन्हें भी गीला करतीं। गले तक लेने में मजा आने लगा था।
पूरा साफ कर दिया। अब लंड पर सिर्फ थूक की परत थी। मुँह से निकाला। लेट जाने का इशारा किया। मुँह से निकलती थूक पोंछी। टाँगें फैलाकर लेट गईं। चूत और ऊपर के बाल और दीवाना बना रहे थे।
जरा भी देर नहीं की। ऊपर चढ़ गया। हाथ हमारे बीच से नीचे लिया और लंड पकड़कर चूत पर रख दिया। नीचे सविता, ऊपर मैं, चूत के ऊपर लंड।
“सुनो। ये तकिया लो और मेरी कमर के नीचे सरका दो। इससे लंड आसानी से अंदर तक जाएगा।” सिर के नीचे का तकिया थमा दिया।
तकिया पकड़कर कमर के नीचे सरकाया। तकिए की वजह से चूत और ऊपर आ गई। अब आसानी से सरका सकता था।
एक जोरदार झटके से लंड घुसा दिया। जोर से चिल्लाईं, “आआआ… धीरे… धीरे… ओह्ह… ओह्ह… नहीं… इतना जोर से नहीं…”
एक न सुनी। पूरा का पूरा लंड चूत में डाल दिया। मुँह खोलकर सिसकियाँ दिए जा रही थीं। मौका देखकर खुले मुँह में थूक दिया। एकदम आँख खोलीं। देखा, मुस्कुराईं, और झट जीभ अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
शरीर पर था। जोरदार झटकों से चूत फाड़ रहा था। किस करतीं और चिल्लातीं, “उई माँ… उई माँ… जोर से… और जोर से… फाड़ दे आज चूत को मेरी… ओह्ह… आह… आह… अह्ह…”
चिल्लाने की वजह से और उत्तेजित हो रहा था। चूत के अंदर का फील मखमली कपड़े जैसा था। एकदम नरम और गरम। कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। वीर्य बाहर आने को तरस रहा था।
चोदते-चोदते पूछा, “सविता, क्या मैं अंदर ही झड़ जाऊँ क्या?”
मदहोश थीं। कुछ समझ नहीं आ रहा था। कान में बोलीं,
“अह्ह… ओह्ह अमेय… हाँ… झड़ जा… झड़ जा मेरे अंदर अमेय… बुझा दे मेरे चूत की प्यास… दे दे मुझे तेरा सारा रस… दे दे मुझे… पिला मेरे चूत को सारा रस… तू झड़ जा…”
नाखून पीठ में घुसा दिए। होश खो बैठी थीं। कुछ भी बोले जा रही थीं। ध्यान नहीं था कि वीर्य से गर्भवती भी हो सकती हैं। नौ महीने के लिए घर बिठा सकता था। सुनने को तैयार नहीं थीं।
“झड़ जा मेरे चूत के अंदर… ओह्ह… आह्ह… अह्ह… आह्ह… भर दे मेरी चूत… भर दे…”
यही कहे जा रही थीं। मुझे भी वही चाहिए था। चूत में झड़ना था। सारा पानी वही छोड़ना था। जो भी होगा बाद में देखा जाएगा, ऐसा कहकर स्पीड बढ़ाई।
जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। चीखे जा रही थीं। पूरी पागल हो गई थीं। आँखें बंद कर ली थीं।
अब झड़ने वाला था। चिल्लाया, “सविता… ले ले मेरा रस… आ… आ… आ… आ…”
सारा वीर्य चूत में झाड़ दिया। गरम वीर्य अंदर जाते ही शांत हो गईं। ऊपर ही लेटा था। साँसें फूली हुई थीं। दोनों जोर-जोर से साँस ले रहे थे।
बाँहों में जकड़ रखा था। एक-एक बूँद चूत में गिर रहा था। लिपटी हुई, आँखें बंद कर पड़ी थीं। गरम वीर्य का एहसास हो रहा था।
उठने लगा तो बोलीं, “अम्म अमेय… रुको ना। जल्दी क्या है। लेटे रहो मुझ पर। और रहने दे उस शैतान को अंदर ही। छोड़ने दे उसे पूरा रस।”
बहुत खुश था। चूमा। कान में बोला, “आज से तू सिर्फ मेरी है सविता। मैं ही आज से तेरा पति हूँ। आज से तेरी चूत और तेरी माँग भरने का अधिकार सिर्फ मेरा है।”
बस मेरी तरफ देखती रह गईं। बाँहों में लिया और आँख बंद करके लेटी रहीं। ऊपर था। तेज धड़कन तक सुनाई दे रही थी।
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