मेरा नाम पूजा है। उम्र पच्चीस साल। दिल्ली यूनिवर्सिटी में मास्टर्स कर रही हूँ। उस दिन जंतर मंतर घूमने गई थी अकेली। दोपहर के लगभग तीन बज रहे थे। धूप काफी तेज थी लेकिन पेड़ों की छाँव में बैठने लायक मौसम था। मैंने टाइट डार्क ब्लू जींस पहनी थी जो मेरी गांड को पूरी तरह से टाइट करके दिखा रही थी और ऊपर हल्की गुलाबी टॉप जिसमें मेरी बड़ी-बड़ी चुचियाँ साफ झलक रही थीं। ब्रा इतनी पतली थी कि निप्पल की शेप साफ दिख रही थी। अंदर से मेरी चूत पहले से ही हल्की गीली हो रही थी। अकेली घूमना, अजनबी नजरें… सब कुछ मिलकर उत्तेजना बढ़ा रहा था।
मैं जंतर मंतर के मुख्य हिस्से से पीछे की तरफ घूम रही थी जहाँ भीड़ कम होती है। तभी चार लड़के मेरे पास आ गए। सब लगभग बाईस-तेईस के होंगे। एक काफी लंबा और गठीला था, नाम था राहुल। दूसरा थोड़ा गोरा और चमकदार आँखों वाला विक्की। तीसरा अमित, उसके बाजू काफी मोटे थे और चौथा सोनू, जो सबसे ज्यादा हँसमुख लग रहा था।
राहुल ने सीधे आकर मेरी आँखों में देखा और बोला, “दिखने में तो बड़ी माल लग रही हो… अकेली हो क्या यहाँ?”
मैंने हल्का मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ… घूमने आई हूँ।”
विक्की ने आगे बढ़कर मेरी कमर पर हाथ रख दिया। उसका हाथ गर्म था। “चलो थोड़ा आगे… वहाँ पेड़ों के पीछे बैठते हैं। तुम्हारी खुशबू पागल कर रही है।”
मेरे अंदर कुछ हिचकिचाहट थी लेकिन चूत में जो गर्मी बढ़ रही थी उसने मना नहीं करने दिया। मैं चुपचाप उनके साथ हो ली। वे मुझे जंतर मंतर के बिल्कुल पीछे वाले हिस्से में ले गए जहाँ पुरानी दीवारें और घने पेड़ थे। वहाँ कोई नहीं था। बिल्कुल सुनसान।
जैसे ही हम पहुँचे, राहुल ने मुझे दीवार से सटा दिया। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसने मेरे होंठ पकड़ लिए और जोर से चूसने लगा। उसकी मोटी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैंने भी जवाब दिया। तभी विक्की पीछे से आया और मेरी जींस का बटन खोलने लगा। उसने जिप नीचे की और हाथ अंदर डाल दिया। उसकी उँगलियाँ सीधे मेरे पैंटी के अंदर चूत पर चली गईं।
“साली… पूरी गीली हो रखी है चूत,” विक्की ने हँसते हुए कहा। “देखो राहुल, कितना पानी निकल रहा है।”
उसने दो उँगलियाँ मेरी चूत के अंदर घुसा दीं। गरम और चिकनी दीवारें उसकी उँगलियों को कस रही थीं। मैं कराह उठी। अमित ने मेरी टॉप ऊपर कर दी और ब्रा को एक झटके में ऊपर सरका दिया। मेरी भारी चुचियाँ बाहर निकल आईं। उसने एक चुची को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। निप्पल को जीभ से घुमा रहा था और हल्का-हल्का दाँतों से काट रहा था। सोनू ने दूसरी चुची पकड़ ली और निप्पल को मरोड़ने लगा।
“आह… जोर से चूसो मेरी चुचियाँ…” मेरी आवाज में कराह थी।
राहुल अभी भी मेरे मुँह को चूस रहा था। विक्की ने मेरी जींस और पैंटी दोनों एक साथ घुटनों तक खींच दीं। मैं कमर से नीचे पूरी नंगी हो गई। मेरी चूत के बाल थोड़े बिखरे हुए थे और बीच का गुलाबी हिस्सा चमक रहा था। विक्की झुक गया और सीधी अपनी जीभ मेरी चूत पर लगा दी।
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उसकी गर्म जीभ ने पहले क्लिट को चूसा, फिर नीचे जाकर छेद के अंदर घुस गई। वह जीभ घुमा-घुमा कर चाट रहा था। मैं दीवार को दोनों हाथों से पकड़े हुए थी। टाँगें काँप रही थीं। अमित और सोनू मेरी दोनों चुचियाँ जोर-जोर से चूस रहे थे। चुचियाँ उनके मुँह में पूरी समा रही थीं।
राहुल ने अपना लंड बाहर निकाला। मोटा, लंबा, ऊपर की तरफ मुड़ा हुआ और नसों से लबालब। उसने मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह के पास लाया। “खोल मुँह… पूरा निगल ले।”
मैंने मुँह खोला। राहुल का लंड मेरे गले तक चला गया। आँखों से पानी आने लगा लेकिन मैंने चूसना जारी रखा। आगे-पीछे। गला ढीला करके पूरा अंदर ले रही थी। लंड की नसें मेरी जीभ पर फिसल रही थीं। मुँह से लार टपकने लगी।
इतने में विक्की खड़ा हो गया। उसने अपना लंड निकाला। राहुल से भी थोड़ा मोटा। उसने मेरे गीले चूत के छेद पर सेट किया और एक जोरदार धक्का दिया। पूरा लंड एक ही बार में अंदर धँस गया।
“आह्ह्ह… माँ… मेरी चूत फट गई… इतना मोटा…” मैं चीख पड़ी।
विक्की ने दोनों हाथों से मेरी गांड पकड़ी और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ मेरी चुचियाँ हिल रही थीं और अमित-सोनू उन्हें मुँह में लिए हुए चूस रहे थे। राहुल मेरा मुँह बुरी तरह चोद रहा था। गला पूरी तरह लंड से भरा हुआ था।
थोड़ी देर बाद विक्की बोला, “अब इस साली की गांड में डालता हूँ।”
उसने लंड चूत से बाहर निकाला। थूक की मोटी लार लगाई और मेरी गांड के छोटे छेद पर लगाया। धीरे-धीरे दबाव दिया। मैंने दर्द से आँखें बंद कर लीं। छेद फैल रहा था। धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में समा गया।
“आह्ह… गांड फट रही है… धीरे… अह्ह…” मैं कराह रही थी।
विक्की ने गांड चोदनी शुरू कर दी। पहले धीरे, फिर तेजी से। हर धक्के के साथ मेरी गांड की मांसपेशियाँ उसकी लंड को कस रही थीं। राहुल अभी भी मुँह में लंड डाले हुए था। अमित ने मेरी चूत में तीन उँगलियाँ डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। सोनू मेरी चुचियाँ काट-काट कर चूस रहा था।
मैं बिल्कुल पागल हो चुकी थी। शरीर काँप रहा था। एक तेज लहर आई और मेरी चूत से पानी की धार छूट गई। मैं दीवार पकड़े हुए काँपती रही। चरम इतना तेज था कि पैरों के नीचे से जमीन खिसकती महसूस हुई।
फिर उन्होंने बारी बदली। अमित ने मुझे घुमाया और मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। सोनू ने पीछे से गांड में लंड डाल दिया। दोनों एक साथ। डबल पेनेट्रेशन। मेरी चूत और गांड दोनों पूरी तरह भरी हुई थीं। दो मोटे लंड अंदर-बाहर हो रहे थे। राहुल और विक्की मेरे मुँह में बारी-बारी से लंड ठूँस रहे थे।
“चूस जोर से रंडी… पूरा निगल,” राहुल गुर्रा रहा था।
अमित और सोनू की स्पीड बहुत तेज हो गई। दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे। मेरी चुचियाँ हवा में हिल रही थीं। मैं बार-बार चरम पर पहुँच रही थी। चूत और गांड दोनों से पानी और झाग निकल रहा था। शरीर पसीने से नहा चुका था।
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अमित ने पहले मेरी चूत में छोड़ दिया। गर्म गाढ़ा वीर्य अंदर भर गया। मैंने महसूस किया कि वह अंदर तक जा रहा है। फिर सोनू ने गांड में जोर से छोड़ा। दोनों छेद वीर्य से लबालब हो गए। राहुल ने मेरे मुँह में छोड़ा। मैंने पूरा निगल लिया। स्वाद कड़वा लेकिन मजा आ रहा था। विक्की ने मेरी दोनों चुचियों पर छोड़ा। वीर्य की धारें चुचियों पर फैल गईं और निप्पल से टपकने लगीं।
वे रुके नहीं। थोड़ी देर साँस लेने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार राहुल मेरी चूत में घुसा। विक्की ने गांड में लंड डाला। अमित ने मेरे बाल पकड़कर अपना लंड मुँह में ठूँस दिया और सोनू मेरी चुचियाँ मरोड़-मरोड़ कर चूस रहा था। फिर से वही जोरदार चुदाई। थप-थप की आवाज पेड़ों में गूँज रही थी। मेरी चूत और गांड दोनों लाल होकर सूजने लगी थीं लेकिन दर्द अब मजे में बदल चुका था।
राहुल ने मुझे जमीन पर गिरा दिया। घास पर लेटा दिया। एक ने मेरे पैर फैलाए रखे, दूसरे ने हाथ पकड़े। राहुल ने मेरी चूत में लंड डाला और पागलों की तरह तेज-तेज चोदने लगा। बाकी तीन मेरे मुँह, चुचियों और चेहरे पर टूट पड़े। लंड मेरे चेहरे पर रगड़े जा रहे थे। मैं चीख-चीख कर चरम पर पहुँच रही थी। चूत से वीर्य और पानी मिलाजुला बह रहा था और घास गीली हो रही थी।
फिर उन्होंने मुझे कुत्तिया की पोजीशन में कर दिया। घुटनों और हाथों के बल। एक के बाद एक मेरी गांड और चूत दोनों में घुसते रहे। जब कोई चूत चोद रहा था तो दूसरा गांड में उँगली या लंड डाले हुए था। जब कोई गांड में था तो दूसरा नीचे से चूत चाट रहा था। सोनू लेट गया और मुझे अपने लंड पर बैठा लिया। चूत में लंड अंदर था। पीछे से राहुल ने गांड में लंड डाल दिया। दोनों एक साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमित और विक्की मेरे मुँह में लंड ठूँसे हुए थे।
“देखो इस रंडी की हालत… दोनों छेद भरे हुए… मुँह भी भरा हुआ,” अमित हँस रहा था।
मैं बोल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ कराहें निकल रही थीं। शरीर इतना काँप रहा था कि नियंत्रण नहीं था। एक के बाद एक तेज लहरें आ रही थीं। चूत की दीवारें बार-बार सिकुड़ रही थीं और लंड को जकड़ ले रही थीं।
दो घंटे से ज्यादा समय तक यह सिलसिला चला। चारों ने कम से कम तीन-तीन बार छोड़ा होगा। मेरी चूत, गांड, मुँह, चुचियाँ, पेट, जाँघें… सब जगह गाढ़ा वीर्य लगा हुआ था। बाल बिखरे हुए, होंठ सूजे हुए, चुचियों पर दाँतों के निशान, चूत और गांड दोनों जल रहे थे और लाल हो चुके थे।
आखिर में जब वे थक गए तो राहुल ने मुझे उठाया और दीवार से लगा दिया। उसने आखिरी बार मेरी चूत में लंड डाला और बहुत तेज गति से चोदा। बाकी तीन मेरे आसपास खड़े होकर अपने-अपने लंड सहला रहे थे। राहुल ने अंदर छोड़ा। फिर विक्की ने आकर गांड में छोड़ा। अमित ने मुँह में और सोनू ने फिर से चुचियों पर।
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मैं दीवार पकड़े हुए धीरे-धीरे नीचे बैठ गई। पैर काँप रहे थे। खड़े होने की हालत नहीं थी। चूत और गांड से वीर्य की धारें टपक रही थीं और जाँघों से होती हुई जमीन पर गिर रही थीं।
राहुल ने मेरे बाल सहलाते हुए कहा, “कल फिर आना यहीं… और लाएँगे तुम्हारी इस रसीली चूत और गांड के लिए। अगली बार छह लोग होंगे।”
मैंने सिर्फ आँखें उठाकर देखा और हल्के से सिर हिलाया। जींस और टॉप ठीक किए। पैंटी इतनी गीली थी कि पहनना मुश्किल हो रहा था। धीरे-धीरे वहाँ से चली। हर कदम पर चूत और गांड में दर्द और मजे का मिश्रण महसूस हो रहा था। वीर्य अभी भी टपक रहा था।
उस दिन जंतर मंतर के उस सुनसान कोने में चार लड़कों ने मेरी पूरी तरह से धुलाई कर दी। मेरी चुचियाँ, मेरी चूत, मेरी गांड… कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं बचा जिसे उन्होंने नहीं चखा, नहीं चोदा, नहीं भरा।
अब जब भी जंतर मंतर का नाम आता है तो मेरी चूत खुद-बخود गीली हो जाती है। दिल जोर से धड़कता है। कभी-कभी रात में अकेली लेटी हुई जब उँगलियाँ चूत में डालती हूँ तो वही दिन याद आ जाता है… चार मोटे लंड, मेरी चीखें, मेरी चुचियाँ उनके मुँह में, मेरी गांड उनके लंड से फटती हुई।
और मैं इंतजार करती हूँ… अगली बार के लिए। जब वे फिर से मिलेंगे और इस बार शायद और ज्यादा लड़के होंगे। मेरी चूत और गांड दोनों फिर से फाड़ी जाएँगी। पूरा दिन, पूरी रात।
उस दिन के बाद से मेरी चूत कभी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुई। हर बार जब अकेली नहाती हूँ तो आईने में अपनी चुचियों पर उनके दाँतों के निशान देखती हूँ और उँगलियाँ नीचे चली जाती हैं। चूत अभी भी उनकी याद में धड़कती है। गांड में अभी भी वह भरने वाला अहसास बाकी है।
कभी-कभी सोचती हूँ कि अगर उस दिन मना कर देती… लेकिन नहीं। मेरी चूत ने खुद उन्हें बुलाया था। और उन्होंने आकर मेरी पूरी हवेस निकाल दी। चार लंड, अनगिनत बार, हर छेद में।
जंतर मंतर… अब सिर्फ एक जगह नहीं रही मेरे लिए। वह जगह है जहाँ मेरी चूत ने पहली बार एक साथ चार लंड लिए थे। जहाँ मेरी गांड पहली बार इतनी बेरहमी से चोदी गई थी। जहाँ मेरी चुचियाँ इतने मुँहों में चूसी गई थीं कि निप्पल सूज गए थे।
और मैं वापस जाऊँगी। जरूर जाऊँगी। क्योंकि मेरी चूत अभी भी तरस रही है… और भी ज्यादा लंड के लिए। और भी जोर की चुदाई के लिए। और भी गहरी गांड की चुदाई के लिए।
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