Dr Amruta Ki Kamukta Bhari Sex Story:- हमेशा की तरह आज हॉस्पिटल में रितेश और अमृता साथ में आए थे। रितेश आते ही ऊपर अपने फ़्लोर पर चला जाता है और अमृता अपने केबिन में।
मॉर्निंग के राउंड के लिए वो पेशेंट्स वार्ड में चली जाती हैं और सबको चेक करने के बाद अपने केबिन में फिर से आ जाती हैं।
अगर आपने इस कहानी के पिछले पार्ट नहीं पढे है तो पहले वो पढ़ लो नहीं तो कहानी मे मज़ा नहीं आएगा ==> डॉक्टर मैडम की कामवासना -2
Dr Amruta Ki Kamukta Bhari Hindi Sex Story
मॉर्निंग के 10 बज चुके थे—
अमृता अभी भी केबिन में वर्क कर रही थीं तभी एक वार्ड बॉय भागकर आता है और अमृता को कहता है—
वार्ड बॉय: मैम मैम एक इमरजेंसी केस आया है।
अमृता अपनी चेयर से खड़ी होती हैं—
अमृता: क्या केस है?
वार्ड बॉय: मैम पैर में गोली लगी है घुटने के ऊपर।
अमृता: अच्छा ठीक है पेशेंट के लेग को स्कैन करो गोली कहाँ घुसी है और ऑपरेशन थिएटर में लेकर आओ।
वार्ड बॉय: ओके मैम।
और अमृता वहाँ से चेंजिंग रूम में जाती हैं और अपना मेडिकल किट पहन लेती हैं।
फ़ेस पर मास्क और बॉडी पर किट पहनने के बाद वो ऑपरेशन रूम में जाती हैं।
5 मिनट बाद वो पेशेंट रूम में आता है उस स्ट्रेचर बेड के साथ 2 वार्ड बॉय और 2 नर्स थीं। अमृता एक वार्ड बॉय को रुकने को बोलके एक को बाहर भेज देती हैं।
उस पेशेंट का मुँह मास्क से ढका हुआ था यहाँ अमृता ने भी अपनी किट पहनी थी। उस पेशेंट की हालत थोड़ी ख़राब थी बुख़ार भी था और घुटने के ऊपर गोली लगने के कारण ख़ून भी बहुत बह चुका था।
थोड़ी ही देर में अमृता वो गोली निकाल देती हैं पर उसको स्कैन में दिखता है कि गोली थोड़ी सी घुटने के ऊपर लगी है तो ये जल्द अपने पैर की मूवमेंट नहीं कर पाएगा और चलने के लिए तो 1 महीना भी लग सकता है।
अमृता अब नर्स को उसके पैर की ड्रेसिंग करने बोलती हैं और वहाँ से निकल जाती हैं।
अपने केबिन में जाके वो वार्ड बॉय से उस पेशेंट की फ़ाइल बुलाती हैं।
उसमें उसका नाम था रागा……
वो नाम पढ़के अमृता थोड़ी सरप्राइज़ हो जाती हैं लेकिन उसको लगता नहीं कि वो वही आदमी है जो कल उनके हवेली पर था।
तभी अमृता के केबिन के यहाँ वार्ड बॉय आता है और कहता है—
वार्ड बॉय: मैम उस पेशेंट की ड्रेसिंग हो चुकी है अब उसे किस वार्ड में रखना है?
तभी अमृता उस पेशेंट की फ़ाइल पर उसकी एज देखती हैं जहाँ 65 लिखा था।
अमृता: अह्म एज तो बहुत है ख़ून भी बहुत निकला है और पैर की मूवमेंट भी नहीं कर पाएगा।
एक काम करो स्पेशल आईसीयू में शिफ़्ट कराओ 5 दिन के बाद नॉर्मल वार्ड में शिफ़्ट करेंगे ओके।
वार्ड बॉय: ओके मैम……
और वो लोग उस पेशेंट को आईसीयू में शिफ़्ट कर देते हैं।
अब दोपहर के 2 बज चुके थे अमृता और रितेश कैंटीन से खाना खाके अपने-अपने काम पर लग चुके थे।
अमृता आफ्टरनून राउंड के लिए निकल चुकी थीं वो सारे वार्ड में विज़िट देके उस आईसीयू के सामने आ जाती हैं।
और उसके अंदर एंटर करती हैं अंदर एंटर करते ही उसको एक झटका लगता है।
वो बूढ़ा आदमी वही था जो कल उनके हवेली पर था जिसको अमृता ने मिठाई दी थी और जो बाद में फ़ोन लेने आया था। अमृता को उसका नाम भी याद था और फ़ाइल पर नाम पढ़ने के बाद उसको उस आदमी का ख़याल भी आया था……
अमृता अब उस बेड के पास जाती हैं……
वो आईसीयू रूम काफ़ी स्पेशल था हालाँकि महाजन मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल शहर का काफ़ी बड़ा हॉस्पिटल था सारी फ़ैसिलिटीज़ वहाँ थीं पर ये आईसीयू रूम काफ़ी स्पेशल था पूरा अमीरों वाला जहाँ सब सुविधा उपलब्ध थी।
रागा को भी होश आ चुका था उसकी आँखें थोड़ी खुली हुई थीं और उसके आँखों के सामने वही चेहरा था जो वो देखने की चाह रख रहा था।
आँखें खुलते ही वो अपने सामने अमृता का ख़ूबसूरत सा चेहरा पाता है।
अमृता की निगाहें रागा को ही देख रही थीं।
और रागा की आँखें उस ख़ूबसूरत चेहरे को देख रही थीं जो उसके सामने एक मिराज बनके खड़ी थी उसको ये सपने जैसा लग रहा था ऐसा लग रहा था उसका सारा दर्द ग़ायब हो चुका हो।
उसके सामने लाल बिंदी लगाई हुई चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और ख़ूबसूरत से सलवार कमीज़ में खड़ी एक अप्सरा खड़ी थी।
उसको देख रागा को लगता है कहीं वो स्वर्ग में तो नहीं आया जो ये अप्सरा उसके सामने खड़ी है। रागा उसके गुलाबी होंठों को देख ही रहा था कि अमृता बोलती हैं—
अमृता: कैसा लग रहा है अब बाबा?
रागा: अह दर्द है थोड़ा।
अमृता: हाँ कुछ दिन होगा पर अब सब ठीक है।
रागा: आप यहाँ मेमसाहब……
अमृता: अरे पहचान लिया आपने मुझको।
रागा: मेमसाहब अब आपको भूल पाना संभव नहीं।
अमृता: मतलब?
रागा: आप हमारे साहब की बहू हो आपको कैसे भूल सकता हूँ इतने जल्दी…… लेकिन आप यहाँ क्या कर रही हो मेमसाहब?
अमृता: बाबा मैं यहाँ की डॉक्टर हूँ ये हमारा ही हॉस्पिटल है……
रागा: ओह अच्छा इसलिए मालिक ने लड़कों को मुझे यहाँ लाने को कहा……
अमृता: हाँ अब चिंता मत कीजिए और आराम कीजिए।
रागा: जी हाँ मेमसाहब…… आप ऐसे खड़ी मत रहो बैठ जाओ उस कुर्सी पर……
अमृता: अरे कोई बात नहीं मैं आपको चेक करने आई थी यहाँ मेरा तो काम है वो।
रागा: अह्म आप यहाँ की डॉक्टर हो पर हमारे लिए तो मेमसाहब हो और आपको ऐसा खड़ा देख नहीं सकता तो कृपया बैठ जाओ।
अमृता को रागा की ऐसे बात करना बहुत अच्छा लगता है। उम्र से बड़े होकर भी रागा जो अमृता को रिस्पेक्ट दे रहा था वो सुनके अमृता को रागा के लिए रिस्पेक्ट महसूस होता है और उसके रिक्वेस्ट का रिस्पेक्ट करते हुए अमृता बग़ल में रखी चेयर लेकर वहाँ बैठ जाती हैं……
रागा अब अमृता को बैठा देख उसको काफ़ी इमोशनली कहता है—
रागा: मेमसाहब मैं मैं अब चल तो पाऊँगा ना……
ये सुन अमृता को उसपर तरस आता है और वो कहती हैं—
अमृता: जी हाँ बाबा बिल्कुल पर थोड़ा समय लगेगा पर आप जल्द ही ठीक हो जाओगे और चल पाओगे……
रागा: अच्छा बेटा धन्यवाद मुझे नया जीवन देने के लिए।
अमृता: ऐसे कोई बात नहीं थैंक यू उन्हें कहिए जिन्होंने आपको यहाँ वक़्त पर लाया वरना बहुत ख़ून बह चुका था आपका।
रागा: हाँ बेटा मेरे मालिक ने लड़कों को जल्दी-जल्दी यहाँ भेजा।
अमृता: अच्छा ठीक है बाबा, वैसे आपको ये गोली कैसे लगी समझी नहीं मैं।
रागा: क्या बताऊँ अब मैं मेमसाहब हम जैसे ग़रीब लोगों के जीवन की कुछ क़ीमत नहीं होती।
अमृता: मतलब समझी नहीं मैं बाबा ठीक से बताओ।
रागा: कल रात आपके यहाँ से जाने के बाद मैं अपने घर गया फिर सुबह मालिक का कॉल आया मैं उनके घर गया तो देखा उनके घर किसी अनजान लोगों ने हमला किया था।
अमृता: ओह माय गॉड फिर क्या हुआ।
रागा: आपको तो पता है हम प्रताप साहब के लिए काम करते हैं तो ऐसा होता रहता है पर उस हमले में गोलियाँ चलने लगीं और मालिक को बचाने में मुझे एक गोली यहाँ लगी।
अमृता: ठीक है बाबा पर इस उम्र में आप अपना ख़याल रखो।
अमृता वहीं बैठी थीं रागा अपनी एक नज़र उसके ऊपर डालता है उसको अमृता का सिंपल नेचर और उसकी ज्वाला जैसा आग वाला रूप काफ़ी पसंद आता है उसकी स्माइल से रागा घायल हो चुका था उसके बोलने की अदा से उसको अपनापन सा लगने लगा था……
तभी अमृता वहाँ से खड़ी हो जाती हैं और रागा को कहती हैं—
अमृता: चलो बाबा मैं अपने केबिन में जा रही हूँ काम है मुझे आप कुछ लगे तो वार्ड बॉय या नर्स को बता देना।
रागा: ठीक है मेमसाहब आते रहिएगा।
अमृता: हाँ 4 बजे आपका ब्लड प्रेशर देखने आऊँगी या नर्स को भेज दूँगी।
रागा: आप ही आना अच्छा लगता है।
अमृता इस बात पर थोड़ा मुस्कुराती हुई वहाँ से निकल जाती हैं।
बाहर निकलते ही वहाँ वही 2 नर्स बैठी थीं जो रागा के ड्रेसिंग के वक़्त वहाँ मौजूद थीं वो उनमें डिस्कस कर रही थीं—
कितना गंदा बूढ़ा था वो क्या पता कहाँ से आया है कितना मैल था उसके स्किन पर पता नहीं कहाँ-कहाँ से आते हैं ऐसे लोग। अजीब सी गंध भी आ रही थी उससे।
और ये बात अमृता सुन लेती हैं और आगे निकल जाती हैं। उसको भी एक अजीब सी गंध महसूस हुई थी जब रागा पहली बार हवेली में आया था और अभी भी उसे वो महसूस हुई थी।
अपने केबिन में जाके वो रागा की ही फ़ाइल पढ़ रही थीं तब उसे दिखता है रागा बहुत सारा अल्कोहल और ड्रग्स कंस्यूम करता है और ये पढ़के अमृता को घिन आती है पर रागा से बात करके उसको एक हमदर्दी सी महसूस हुई थी पर अब उसको एक घिन सी महसूस हो रही थी।
ऐसे ही करते-करते आफ्टरनून के 4 बज जाते हैं अमृता नर्स को रागा का ब्लड प्रेशर करवाने के लिए बोलने ही वाली थीं कि अमृता को एक सवाल आता है 5-6 घंटे हो गए रागा को यहाँ आए पर उनसे कोई मिलने क्यों नहीं आया और ये सवाल उसको इस क़दर सताता है कि वो खुद रागा का बीपी मेज़र करने निकल जाती हैं……
यहाँ रागा दरवाज़े की तरफ़ राह तक रहा था कि कब उस अप्सरा के दर्शन उसे हों जिसे देखने के लिए वो पैर पर गोली तक खा चुका था।
तभी हल्का सा दरवाज़ा खुलता है और एक सुगंध उस रूम में आ जाती है उस सुगंध से रागा पहचान जाता है कि ये अमृता हैं वो देखता है।
सुंदर सा बदन उसके सामने था टाइट सलवार कमीज़ में अब रागा की हालत सुबह से काफ़ी बेहतर थी बुख़ार भी उतर चुका था।
अमृता बीपी चेक करने की मशीन बेड पर रखकर कुर्सी लेकर रागा के हाथ के यहाँ बैठ जाती हैं और रागा के हाथ को वो मशीन लगा देती हैं।
रागा तो मानो अपनी आँख बंद कर अपनी मेमसाहब के हाथ का स्पर्श महसूस कर रहा था उसको वो हाथ काफ़ी कोमल लगते हैं।
अमृता: अब कैसा लग रहा है बाबा?
रागा: बहुत अच्छा मेमसाहब……
अमृता: वैसे आपको देखने अभी तक कोई क्यों नहीं आया मतलब आपके घर के कोई……
ये बात सुन रागा के एक्सप्रेशन बदल जाते हैं और वो थोड़ा सोचके बहुत ही गहरी आवाज़ में कहता है—
रागा: क्या बताऊँ मैं अब मेमसाहब……
अमृता: बताइए क्या हुआ?
रागा: बात कुछ ऐसी है मेमसाहब कि हम पहले से ग़रीबी में पले-बढ़े और ग़रीबी में ही रह गए। जवानी में शादी हुई तो कुछ ही दिन बाद मेरी पत्नी किसी और के साथ भाग गई कारण था कि मैं उसकी ख़ुशियों को पूरा नहीं कर पाता था उसको बहुत पैसा चाहिए था और मेरे पास वही नहीं था। उस वक़्त बहुत दुख हुआ मैंने मरने को भी चाहा पर खुद को मार नहीं पाया। शादी के 4 महीने बाद ही वो छोड़के चली गई तब से बस आज तक अकेला ज़िंदगी को काट रहा हूँ और ग़रीबी में ही जी रहा हूँ।
मेरे मालिक का शुक्र कि इस हॉस्पिटल में भेज दिया वरना मर रहा होता किसी रोड के साइड में।
अमृता ये सुन शॉक हो जाती हैं जो उसका चेहरा साफ़ बता रहा था और उसके मन में रागा के लिए और हमदर्दी बढ़ जाती है…… उसके आँखों में हल्की सी नमी थी और इंसानियत भरा दिल काँप रहा था।
अमृता: आप काम क्या करते हो बाबा?
रागा: मेरे जीवन में मैंने बहुत काम किए मेमसाहब जो आपको सुनाने के लिए भी अच्छे नहीं लगेंगे इसलिए जाने दीजिए।
अमृता ये सुन थोड़ा हैरान हो जाती हैं पर वो भी फ़ोर्स नहीं करतीं।
अमृता: फ़िलहाल क्या करते हो आप?
रागा: मेमसाहब पेशे से तो मैं एक चपरासी हूँ छोटी सी सड़क के किनारे मेरी दुकान है और मेरे मालिक के लिए छोटे-मोटे काम करता हूँ बस।
अमृता: अच्छा ठीक है बाबा आपका बीपी नॉर्मल है।
मैं ज़रा ड्रेसिंग चेक करती हूँ……
और इतना कहकर अमृता वहाँ से उठ जाती हैं और रागा के पैर के यहाँ जाती हैं जो कि वन साइडेड जाँघ तक खुला था।
उसकी स्किन काफ़ी काली थी और तभी उसको वो नर्स ने कही बात याद आती है वो सोच उसे फिर से घिन महसूस होती है।
यहाँ रागा को अपनी आँखों के सामने जन्नत जैसा नज़ारा नज़र आता है अमृता के लेगिंग्स में अमृता की वन साइडेड जाँघ अब रागा के आँखों के सामने थी जो रागा को देख उसके लंड में तनाव महसूस करवा देती है……
अमृता की गाँड का 38 का उभार बहुत ही क़ातिलाना दिख रहा था उसके लेगिंग्स में और वो देख यहाँ रागा का लंड मानो उसे सलामी देना चाह रहा था।
तभी हवा का हल्का सा झोंका आता है और अमृता के टॉप को थोड़ा सा ऊपर लहरा देता है मानो क़यामत भी रागा को ऐसा दृश्य दिखाना चाहती थी जिसे देख रागा का लंड पहली बार अमृता के बदन को सलामी दे।
और होता भी वैसा ही है अमृता का टॉप खुली काँच की खिड़की से आकर ऊपर हो जाता है और बूढ़े रागा के आँखों के सामने उसके मेमसाहब का वो ख़ज़ाना था जो देखना किसी के भी बस की बात नहीं थी……
उसके नज़रों के सामने उसके मेमसाहब के 38 के बड़े-बड़े गाँड के उभार थे जो लेगिंग्स ने बहुत ही कामुक लग रहे थे उसकी गदराई हुई गाँड का एक-एक दृश्य रागा के कुंड को खड़ा कर रहा था गाँड की वो कामुक रेखा लंड के टोपे को कामुक भाव प्रदान कर रही थी वो अमृता का फ़िगर देख रागा का लंड तन जाता है।
उसका तो मन कर रहा था अभी जाके अपना काला लंड अपनी मेमसाहब के गाँड के दरारों में डालके लेगिंग्स के ऊपर से घिसे और अपनी मेमसाहब के मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियों का कोमल सुर सुने पर फ़िलहाल नयन सुख से काम चलाना होगा।
अमृता को महसूस होता है हवा से उसका पीछे का टॉप ऊपर हो चुका है। वो झट से हाथ को पीछे लेकर नीचे कर देती हैं और रागा की तरफ़ देखती हैं।
उसकी नज़रें वहीं थीं जहाँ अमृता बिल्कुल भी सोच नहीं सकतीं वो देख अमृता भी थोड़ी अकवर्ड फ़ील करती हैं।
और अपनी बीपी की मशीन लेने लगती हैं तभी उसके हाथ से वो नीचे गिर जाती है और एक सेकंड भी वेस्ट न करते हुए वो मशीन को उठाने के लिए नीचे झुक जाती हैं……
रागा ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मेमसाहब का एक ख़ज़ाना देखने के बाद उसे अमृता के अमृतों की भी दर्शन हो जाएँगे।
जैसे-जैसे अमृता नीचे झुक रही थीं वैसे-वैसे रागा के दिल की धड़कनें बढ़ रही थीं मानो हर एक अमृता के नीचे झुकने के मूवमेंट पर रागा का लंड थोड़ा-थोड़ा खड़ा हो रहा था……
अब अमृता नीचे झुक चुकी थीं और रागा के नंगे आँखों के सामने अमृता का बेशुमार ख़ज़ाना अपनी ख़ूबसूरती को लुटा रहा था……
उसके रेशमी सिर के बाल उस बूब्स के साइड से उसकी ख़ूबसूरती बढ़ा रहे थे और उसके गोरे-गोरे अमृत जैसे आम उसके कमीज़ से मानो आज़ाद होना चाह रहे हों उसके नीचे झुकने से उसके दोनों बड़े-बड़े अमरूद मानो लटक से गए थे और सामने पड़े रागा के हवस भरी आँखें उसे देखकर कामसुख का आनंद ले रहे थे।
रागा के मन में कई सारे विचार थे—
(आाह्ह्ह ऐसे ही झुके रहो मेमसाहब आाह्ह्ह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रताप साहब की बहू के स्तन ऐसे देखने को मिलेंगे अभी मैं हवेली में ये देखता तो शायद मेरी मुंडी धड़ से अलग हो चुकी होती आाह्ह्ह मेमसाहब क्या बदन है आपका अप्सरा हो तुम आाह्ह्ह क्या गोरा रंग गोरा बदन जैसे अमृत)
अमृता अभी भी झुकी हुई थीं उसके दोनों टाइट 36 के आम अभी भी लटक रहे थे।
उसके दोनों बूब्स की दरार काफ़ी बड़ी थी कामसिन बदन की मालकिन झुकी हुई और भी कामुक लग रही थीं।
तभी अमृता ऊपर उठ जाती हैं और फिर से रागा के नज़रों को पिछाड़ते हुए खुद को एक ऐसी कंडीशन में पाती हैं जहाँ उसे सिर्फ़ शर्म प्राप्त होती है उसके चेहरे पर एक शर्म की लाली चढ़ जाती है…… और वो वहाँ से निकलने के लिए पीछे मुड़ जाती हैं।
रागा: मेमसाहब……
रागा का आवाज़ सुन अमृता थम जाती हैं और रागा को देखती हैं।
अमृता: क्या……
रागा: अब कब आओगे?
अमृता: अब कल सुबह रात के विज़िट के लिए एक डॉक्टर आएँगे।
रागा: अच्छा मतलब अब आप डायरेक्ट कल आओगी?
अमृता: हाँ क्यों क्या हुआ?
रागा: आपके आने से अपनापन लगता है मेमसाहब मेरे घर में तो कोई नहीं जो मुझे देखने आए एक मालिक हैं पर वो काम में रहेंगे अपने, साहब को तो पता भी नहीं होगा मुझे ऐसा कुछ हुआ है, मेरी किस्मत जो आप मेरा इलाज कर रही हैं।
रागा की ऐसी बात सुन अमृता के चेहरे पर गुलाबी सी मुस्कान आती है और वो अपने कामुक होंठों से कहती हैं—
अमृता: इस रूम के बग़ल में ही मेरा केबिन है मुझे जब पॉसिबल होगा आपको चेक करने आऊँगी बस।
रागा: शुक्रिया मेमसाहब……
वहीं खड़े-खड़े अमृता रागा पर एक नज़र घुमाती हैं रागा का गंदापन उसे साफ़ झलक रहा था उसका काला बदन वो अजीब सी गंध उसके हाव-भाव।
पर फिर भी अमृता के मन में उसके लिए हमदर्दी पैदा हो चुकी थी।
जाते-जाते वो एक बार उस ज़ख़्म को देखती हैं और तभी उसकी नज़र रागा के लंड की जगह पर जाती है जहाँ रागा ने बेडशीट ले रखी थी पर अमृता को वहाँ कुछ हलचल महसूस हो रही थी।
रागा: मेमसाहब एक बात कहूँ……
ये सुन अमृता की नज़र वहाँ से हट जाती है।
अमृता: हाँ हाँ कहिए……
रागा: आप बहुत अच्छी हो ऐसे डॉक्टर सबके नसीब में नहीं होते।
अमृता: अरे ऐसा कुछ नहीं बाबा।
रागा: सच कहूँ तो मेरा आधा दर्द आपको देखके ही ख़त्म हो गया आप ऐसे ही आते रहोगी तो शायद चलने भी लग जाऊँ……
ये सुन अमृता मुस्कुराती हैं और थोड़ा शर्मा भी जाती हैं।
अमृता: अच्छा ठीक है पर ऐसा कुछ नहीं।
रागा: आपको शायद पता नहीं पर……
अमृता: पर क्या बाबा?
रागा: कुछ नहीं आप गुस्सा हो जाओगी।
अमृता: अरे बोलिए ना क्या हुआ?
रागा: आप बहुत ख़ूबसूरत हो आप जैसी ख़ूबसूरती मैंने कहीं नहीं देखी आपको देखके दर्द भूल गया मैं।
ये सुन अमृता पानी-पानी हो जाती हैं पर दिखाती नहीं और मुस्कुराकर वहाँ से निकल जाती हैं……
अमृता के जाते ही दरवाज़ा बंद हो जाता है और रागा झट से अपना कब से तना हुआ काला लौड़ा बाहर निकाल लेता है और उसको धीरे से सहलाके बात करता है।
(आाह्ह्ह फ़िकर न कर मेरे लाल आाह्ह्ह अभी तुझे जितनी तकलीफ़ हुई उससे ज़्यादा मुझे हुई है तेरे एक-एक नस में अमृता का नाम सुनाई दे रहा है और इस रागा के रग-रग में अमृता का नाम बह रहा है)
कितने रंडियों को चोदा कितने मुहल्ले की औरतों के बच्चों का बाप बना पर इस बुढ़ापे के दिनों में किस्मत ने अमृता का अमृत पिलाने भेजा है।
मन कर रहा था अभी उसके स्तनों के दरारों में ये काला लंड भर दूँ जैसे कोई नई दुल्हन की माँग पर साबर रख।
ये माल क्या चीज़ है आज समझ आ गया अब कल से इसको अपना असली रंग दिखाना शुरू होगा।
कुछ ही दिनों में इसके ही अस्पताल में इसी बेड पर वो गिरी होगी और मेरा हथियार इसके ऊपर क्या मज़ा आएगा ये नई सुहागन शगुन के तौर पर इस लंड की सवारी करेगी…………
और शैतानी मुस्कान देते हुए रागा आज के दृश्य को याद करते हुए अपने मोटे काले लंड को ज़ोर-ज़ोर से अमृता के नाम से हिलाने लगता है।