Maa beta ki jungle me tambu ke andar chudai:- जंगल के घने अँधेरे में रात का सन्नाटा छा चुका था। सिर्फ़ झींगुरों की आवाज़ और दूर कहीं बहने वाली नदी का शोर सुनाई दे रहा था। सभी स्टूडेंट्स अपने-अपने टेंट्स में जा चुके थे। पिकनिक का पहला दिन थकान भरा था, पर कुछ दिलों में अभी भी सवालों की आग भड़क रही थी। खाना-पीना ख़त्म हो चुका था, और कैंप फ़ायर की हल्की ठंडी होती राख के पास बैठकर दोस्तों के ग्रुप्स गपशप कर रहे थे।
Kahani ka pichla part yaha padhen ==> माँ बनी क्लाससमेट 3
Maa beta ki jungle me tambu ke andar chudai story
लेकिन त्रुप्ति अकेली ही एक बड़े पुराने पेड़ के पीछे खड़ी थीं। उन्होंने हल्के अँधेरे का सहारा लिया था ताकि कोई उन्हें देख न सके। जंगल की ठंडी और थोड़ी नम हवा उनके चेहरे को छू रही थी, पर उनके अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी। उनका जिस्म ठंडक में भी गरम हो रहा था।
वहीं नज़दीक के एक टेंट के पास, कृति, शीतल और अभय आपस में धीरे-धीरे बात कर रहे थे। उनकी आवाज़ें त्रुप्ति के कानों में साफ़ पड़ रही थीं।
कृति: यार, तुम लोगों को क्या लगता है? सच में त्रुप्ति और राहुल के बीच में अफ़ेयर है? मुझे कुछ गड़बड़ लगती है।
शीतल: क्यों? त्रुप्ति ने खुद ही तो बताया था कि वो दोनों डेट कर रहे हैं।
कृति: वही तो! मुझे लगता है त्रुप्ति झूठ बोल रही है। उन दोनों को देखो, कोई केमिस्ट्री ही नहीं है। वो एक-दूसरे को ऐसे देखते ही नहीं जैसे लवर्स देखते हैं। ऐसे लगता है जैसे दोनों सिर्फ़ अफ़ेयर की एक्टिंग कर रहे हैं।
पेड़ के पीछे खड़ी त्रुप्ति का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उनके माथे पर पसीना आ गया। अगर इन्हें ज़रा भी शक़ हुआ तो वो गहराई तक जाएँगे।
शीतल: भला दोनों नाटक क्यों करेंगे? राहुल हैंडसम है और त्रुप्ति तो अप्सरा है, पर एक्टिंग करने का क्या लॉजिक?
कृति: ये तो वो ही दोनों बता सकते हैं। पर मेरी नज़रें उन पर हैं।
तभी अभय बोला, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शैतानी और जलन थी। वो त्रुप्ति के लिए पागल हो रहा था।
अभय: मेरे पास एक आइडिया है, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
शीतल: कौन सी आइडिया, अभय?
अभय: देखो, अगर उनके बीच सच में अफ़ेयर है और वो इतने दिनों बाद अकेले जंगल में आए हैं, तो रात को तड़प तो होगी ही। अगर सच में लवर्स हैं, तो दोनों में से कोई न कोई एक-दूसरे के टेंट में ज़रूर जाएगा। रात भर दोनों चुदाई का आनंद लेंगे। हम लोग बाहर जागते रहेंगे। टेंट के कपड़े पर उनकी परछाइयों से पता चल जाएगा कि अंदर रोमांस हो रहा है या नहीं।
कृति: कमाल की आइडिया है! अगर वो एक्टिंग कर रहे होंगे तो अपने-अपने टेंट में चुपचाप सो जाएँगे।
शीतल: चलो, अब देखते हैं आज रात क्या होता है।
त्रुप्ति ने सारी बातें सुन ली थीं। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। उन्हें रियलाइज़ हुआ कि ख़तरा बड़ा है। अगर इन लोगों को पता चल गया कि राहुल और वो एक्टिंग कर रहे हैं, तो वो लोग उनकी असलियत निकाल लेंगे। उन्हें पता चल जाएगा कि वो माँ-बेटा हैं! पूरे कॉलेज में उनकी थू-थू होगी, संजीव का नाम मिट्टी में मिल जाएगा और उनकी पढ़ाई का सपना हमेशा के लिए टूट जाएगा।
उनके दिमाग़ में एक युद्ध चल रहा था। एक तरफ़ उनका ममता भरा दिल था जो चीख रहा था, ‘त्रुप्ति, वो तेरा बेटा है! ये पाप है!’ पर दूसरी तरफ़ उनके अधूरे सपने और इज़्ज़त थी। उन्होंने सोचा, ‘मुझे ये करना ही होगा। सिर्फ़ कुछ वक़्त के लिए। अगर सबको यक़ीन हो गया कि राहुल मेरा मर्द है, तो अभय और विक्की जैसे गंदे लड़के मेरे क़रीब आने की हिम्मत नहीं करेंगे। मुझे अपने बेटे के साथ ये खेल खेलना ही पड़ेगा ताकि मेरा सपना पूरा हो सके।’
रात के क़रीब दस बज चुके थे। जंगल का अँधेरा गहरा हो गया था। त्रुप्ति ने हिम्मत जुटाई और अपने टेंट में गईं। उन्होंने अपने बैग से एक बेहद सेक्सी और पतली, ट्रांसपेरेंट नाइट गाउन निकाली जो उनके शरीर के कर्व्स को बिल्कुल साफ़ दिखा रही थी। उन्होंने गाउन पहना और आईने में खुद को देखा। उनके बूब्स और गाँड का उभार उस पतले कपड़े में क़यामत ढा रहा था।
गुनाह का एहसास उनके मन में था, पर मजबूरी उससे बड़ी थी। वो दबे पाँव अपने टेंट से निकलीं और हर तरफ़ नज़र दौड़ाई। उन्होंने देखा कि कृति और अभय दूर से नज़र रखे हुए हैं। उन्होंने गहरी साँस ली और सीधा राहुल के टेंट की तरफ़ क़दम बढ़ाए।
राहुल अपने टेंट में अकेला लेटा हुआ था, शायद त्रुप्ति के बारे में ही सोच रहा था। तभी टेंट की ज़िप खुली और अँधेरे में उसे एक हसीन साया अंदर आता दिखा। त्रुप्ति अंदर आईं और तुरंत ज़िप बंद कर दी। राहुल ने जब त्रुप्ति को उस सेक्सी गाउन में देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं…
त्रुप्ति (धीमे से): राहुल, हमें एक्टिंग करनी होगी… सब बाहर देख रहे हैं।
टेंट के अंदर की हल्की मद्धम रोशनी में राहुल की आँखें त्रुप्ति के जिस्म पर जमी थीं। उसने देखा कि उसकी माँ, जो अब पूरी दुनिया के लिए उसकी सेक्सी गर्लफ्रेंड थी, एक पतली और झीनी नाइट गाउन में उसके सामने खड़ी हैं। राहुल का जिस्म तुरंत गरम हो गया, उसकी रगों में दौड़ता खून उबाल मारने लगा। वो कुछ कहने ही वाला था कि त्रुप्ति ने अपने होंठों पर उँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया।
राहुल समझ गया कि बाहर दुश्मनों की नज़रें उन पर हैं। वो धीरे से उठा और त्रुप्ति के क़रीब गया। उसने त्रुप्ति की नरम कमर को अपने दोनों हाथों में भरा और उसे अपने से सटाते हुए गले लगा लिया। त्रुप्ति को अपने बेटे के जिस्म की गर्मी महसूस हुई, पर उन्होंने खुद को समझाया कि ये सब सिर्फ़ एक खेल है।
राहुल (धीरे से): क्या हुआ मम्मी? आप इतनी घबराई हुई क्यों हो?
त्रुप्ति (उसके कान के पास सरगोशी करते हुए): कृति और मेरे बाक़ी फ्रेंड्स को हम पर शक़ हो गया है, राहुल। उन्हें लगता है हमारे बीच कोई अफ़ेयर नहीं है, सिर्फ़ एक्टिंग है। कृति कह रही थी कि हमारे बीच वो केमिस्ट्री नहीं दिखती।
राहुल: क्या? लेकिन हमने तो सबके सामने कितना रोमांस किया!
त्रुप्ति: नहीं बेटा, उन्हें यक़ीन नहीं है। अभय ने प्लान बनाया है कि वो रात भर बाहर जागकर हमारे टेंट की परछाइयों पर नज़र रखेंगे। अगर उन्हें लगा कि अंदर कुछ नहीं हो रहा, तो हमारी असलियत खुल जाएगी। हमारी बदनामी हो जाएगी।
राहुल: तो फिर वही होगा जो वो चाहते हैं। आज हम दोनों ऐसा परफ़ॉर्मेंस देंगे कि उनका हर शक़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा।
राहुल की आँखों में एक शैतानी चमक थी। त्रुप्ति को लगा कि उनका बेटा सिर्फ़ उनकी इज़्ज़त बचाने के लिए उत्साहित है, पर राहुल के मन में तो कुछ और ही पक रहा था। उसने त्रुप्ति को अलग किया और उसे इशारा किया।
त्रुप्ति ने गहरी साँस ली और अपनी गाँड को थोड़ा मटकाते हुए टेंट के दूसरे कोने में जा खड़ी हुईं। उन्होंने एक बेहद सेक्सी पोज़ बनाया और अपने चेहरे पर एक नशीली मुस्कान बिखेर दी। राहुल ने जब त्रुप्ति की लहराती हुई गाँड और गाउन के पीछे से झलकती उनकी नंगी पीठ देखी, तो उसका जुनून सातवें आसमान पर पहुँच गया।
राहुल तुरंत त्रुप्ति के पीछे गया और अपने गरम हाथ त्रुप्ति की गोल गाँड पर रख दिए। त्रुप्ति थोड़ी झिझकीं, पर उन्होंने पलटकर राहुल को एक सेक्सी स्माइल दी। राहुल ने जानबूझकर अपनी आवाज़ थोड़ी ऊँची की ताकि बाहर खड़े लोगों तक पहुँचे।
राहुल: वाओ त्रुप्ति! ये सेक्सी गाँड… ये मुझे पागल कर देती है! आज तो मैं इसे जी भरके प्यार करूँगा!
राहुल ने मुस्कुराते हुए त्रुप्ति की पीठ पर हाथ फेरा और फिर उसे घुमाकर उनके होंठों पर अपना अँगूठा रख दिया। वो अँगूठे से त्रुप्ति के रसीले होंठों को मसलने लगा।
राहुल: त्रुप्ति डार्लिंग, तेरे ये होंठ इतने रसीले हैं कि मेरा दिल करता है आज इनका सारा रस पी जाऊँ। क्या मैं शुरुआत करूँ?
त्रुप्ति समझ गईं कि अब असली ड्रामा शुरू हो रहा है। राहुल ने अपने दोनों हाथों से त्रुप्ति के हसीन चेहरे को थामा और उनके होंठों पर अपने होंठ जड़ दिए। त्रुप्ति ने पहले भी राहुल के साथ किस किया था, इसलिए उन्होंने इसे नॉर्मल समझा। उन्होंने सोचा कि बेटा ही तो है, एक्टिंग ही तो कर रहा है।
लेकिन जैसे-जैसे किस गहरी होती गई, त्रुप्ति को कुछ बदलाव महसूस होने लगा। राहुल के होंठ सिर्फ़ एक्टिंग नहीं कर रहे थे, वो भूखे जानवर की तरह त्रुप्ति के होंठों का रस चूस रहे थे। त्रुप्ति ने भी राहुल की गर्दन में बाँहें डाल दीं और उसका पूरा साथ देने लगीं। दोनों के बीच एक बेहद पैशनेट और एग्रेसिव किस शुरू हो गई।
तभी राहुल ने त्रुप्ति को अपने बाज़ुओं में भरा और उसे गोद में उठा लिया। त्रुप्ति ने मदहोशी में अपना मुँह खोल दिया। राहुल ने तुरंत अपना मुँह त्रुप्ति के मुँह में डाला और दोनों की ज़ुबानें आपस में टकराने लगीं। त्रुप्ति को पहली बार अपने बेटे की ज़ुबान का वो नशा महसूस हुआ जो किसी मर्द का होता है। वो भूल गईं कि ये उनका बेटा है, उन्हें बस एक मर्द की गर्मी महसूस हो रही थी।
एक लंबी और तूफ़ानी किस के बाद दोनों ने होंठ छोड़े। त्रुप्ति हाँफ रही थीं। राहुल ने उन्हें धीरे से नीचे उतारा। त्रुप्ति जाके गद्दे पर बैठ गईं, उनकी साँसें तेज़ थीं। उन्होंने अपनी पीठ राहुल की तरफ़ कर ली। उस गाउन में उनकी नंगी, चिकनी पीठ किसी रेशम की तरह चमक रही थी।
राहुल त्रुप्ति के पास बैठा और उसने अपने काँपते हुए हाथ त्रुप्ति की पीठ पर रख दिए। वो हल्के-हल्के उनकी पीठ सहलाने लगा। त्रुप्ति ने आँखें बंद कर लीं। उनका दिमाग़ अभी भी कह रहा था, ‘ये एक्टिंग है’, पर उनके जिस्म के अंदर जागती हुई गर्मी कुछ और ही बयान कर रही थी। उन्हें राहुल का हर टच अब पहले से अलग और ज़्यादा नशा देने वाला लगने लगा था…
टेंट के अंदर की फ़िज़ा अब गरम हो चुकी थी। राहुल के होंठों की तपिश त्रुप्ति की नंगी, रेशम जैसी चिकनी पीठ पर महसूस हो रही थी। राहुल अब सिर्फ़ एक्टिंग नहीं कर रहा था, वो अपने अरमानों को ज़ुबान दे रहा था। उसने त्रुप्ति की पीठ को हल्के-हल्के चूमते हुए पूरी सतह को अपने नरम होंठों से भिगो दिया। फिर, उसने अपनी गरम ज़ुबान बाहर निकाली और त्रुप्ति की पीठ पर लंबे-लंबे स्ट्रोक्स देते हुए उसे चाटने लगा।
त्रुप्ति का शरीर झनझना उठा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा उनके बदन के साथ ऐसे खेलेगा। उनका दिमाग़ बार-बार उन्हें रोकने को कह रहा था, पर जिस्म की गर्मी उन्हें बेहोश कर रही थी। राहुल ने त्रुप्ति को अपनी गोद में उठाया, जहाँ त्रुप्ति के नरम कुल्हे राहुल के लंड की गर्मी महसूस कर रहे थे।
राहुल ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और त्रुप्ति के भरे हुए बूब्स को गाउन के ऊपर से ही मुट्ठियों में भर लिया। वो उन्हें कसकर मसलने लगा, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को दबोच रहा हो। त्रुप्ति की साँस उखड़ने लगी, वो राहुल के गले को चूमने और चाटने पर मजबूर हो गईं। राहुल ने बेरहमी से उनके गालों और गर्दन पर अपने निशान छोड़े।
त्रुप्ति ने होश सँभालने की कोशिश की और राहुल की गोद से उतरकर गद्दे पर पेट के बल लेट गईं। इस पोज़िशन में उनकी गाँड, जो हमेशा से ही राहुल के लिए एक टारगेट थी, व्हाइट नाइट गाउन के नीचे मस्त उभरकर ऊपर आ गई। राहुल की आँखें चमक उठीं, उसने त्रुप्ति के क़रीब बैठकर उनकी गाँड पर हाथ फेरना शुरू किया।
त्रुप्ति: इस… राहुल… म्मम…
त्रुप्ति के मुँह से एक हल्की सिसकारी निकल गई।
राहुल ने अब दोनों हाथों से त्रुप्ति की गोल गाँड को दबोच लिया और उसे सख़्ती से मसलने लगा। वो त्रुप्ति की पूरी गाँड को चूम रहा था, और फिर उसने एक ऐसी हरकत की जिसने त्रुप्ति को शॉक कर दिया। राहुल ने गाउन के ऊपर से ही त्रुप्ति की गाँड की दरार में अपना मुँह डाल दिया और उसे चाटने लगा। त्रुप्ति को लगा कि ये एक्टिंग की हद है, पर बाहर खड़े दोस्तों के डर से वो कुछ बोल नहीं पा रही थीं।
त्रुप्ति: आाह्ह्ह… उम्म… राहुल रुक जाओ… आाह्ह्ह…
त्रुप्ति ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेते हुए सिसकने लगीं।
राहुल बहुत देर तक वहाँ अपना मुँह मारता रहा, फिर वो त्रुप्ति के ऊपर पूरी तरह लेट गया। त्रुप्ति ने महसूस किया कि राहुल का खड़ा लंड, जो किसी लोहे के रॉड जैसा सख़्त था, उनकी गाँड की दरार में गाउन के ऊपर से धँसा हुआ था। राहुल ने अब बैक स्ट्रोक्स देना शुरू किया।
त्रुप्ति शर्म से लाल हो गईं और धीमे से बोलीं—
त्रुप्ति: राहुल… बेटा… ये बहुत ज़्यादा हो रहा है… बस करो।
राहुल ने त्रुप्ति के कान के पास झुककर सरगोशी की—
राहुल: माँ… अगर मैंने ये नहीं किया तो बाहर खड़े दोस्तों को पता चल जाएगा कि ये सब नाटक है। हमारी बदनामी हो जाएगी… थोड़ा सह लो।
गिल्ट, शर्म और डर के मारे त्रुप्ति ने अपने घुटने मोड़ लिए और राहुल को आगे बढ़ने दिया। राहुल ने उन्हें घोड़ी बनने को कहा, और त्रुप्ति तुरंत घोड़ी बन गईं। उन्होंने महसूस किया कि राहुल ने अपनी ज़िप खोली है। जैसे ही राहुल का नंगा लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार से टकराया, उनकी रूह काँप गई।
राहुल ने एक स्ट्रोक लगाया और नंगा लंड दरार में घुस गया। त्रुप्ति को लंड की साइज़ का एहसास हुआ—वो बड़ा और मोटा था। राहुल अब धीरे-धीरे स्ट्रोक्स लगा रहा था, और त्रुप्ति को एक्टिंग के बीच असली मज़ा आने लगा था। उनका शरीर राहुल के हर धक्के पर उछल रहा था।
त्रुप्ति: आाह… म्मम… ज़ोर से राहुल… आाह्ह…
त्रुप्ति अब बेइख़्तियार सिसकारियाँ भर रही थीं।
राहुल अब बेरहमी पर उतर आया था। वो ज़ोर-ज़ोर से स्ट्रोक्स लगा रहा था, त्रुप्ति की गाँड को गाउन के ऊपर से चोद रहा था। कुछ देर बाद, एक तेज़ झटके के साथ राहुल त्रुप्ति की गाँड की दरार में ही झड़ गया। उसने तुरंत अपना लंड पैंट में डाला, त्रुप्ति को बाँहों में भरा और वहीं सो गया।
बाहर खड़े दोस्तों को यक़ीन हो चुका था कि अंदर “चुदाई” हुई है। वो अपनी नींद लेने चले गए, पर अंदर माँ और बेटा एक ऐसे रिश्ते की गहराइयों में उतर चुके थे जहाँ से वापस लौटना नामुमकिन था।
टेंट के अंदर की गर्मी अब धीमे-धीमे ठंडी हो रही थी, पर त्रुप्ति के अंदर एक तूफ़ान उठा हुआ था। वो राहुल की मज़बूत बाँहों में क़ैद थीं, उनका चेहरा राहुल की छाती से लगा था। हर बार जब वो साँस लेतीं, उन्हें अपने बेटे के जिस्म की वही मर्दाना ख़ुशबू आती जिसने अभी कुछ देर पहले उन्हें मदहोश कर दिया था।
त्रुप्ति की आँखों से एक आँसू निकलकर राहुल के सीने पर गिरा। उनका दिल दुख रहा था। गिल्ट का बोझ इतना भारी था कि उन्हें लग रहा था जैसे उनका दम घुट जाएगा। उन्होंने सोचा, ‘हे भगवान, मैंने ये क्या कर दिया? वो मेरा बेटा है… जिसे मैंने अपनी गोद में खिलाया, आज उसने मेरे जिस्म के सबसे नज़दीक हिस्सों से खेला। फ़ोर्ट पर जो हुआ वो ग़लत था, पर आज रात तो मैंने सारी हदें ही मिटा दीं।’
उन्हें अपनी गाँड की दरार में एक चिपचिपाहट और गीली गर्मी महसूस हो रही थी। राहुल का वीर्य उनकी पतली पैंटी और गाउन के ऊपर फैला हुआ था। वो सफ़ेद गाढ़ा रस इस बात का सबूत था कि अभी यहाँ क्या खेल खेला गया है। त्रुप्ति को बुरा लग रहा था, बहुत बुरा… पर वहीं कहीं दिल के किसी कोने में एक ‘गिल्टी प्लेज़र’ भी था। एक मर्द की सख़्ती और उसके जुनून ने त्रुप्ति के अंदर की उस औरत को जगा दिया था जो सालों से संजीव के नरम व्यवहार के बीच सो गई थी।
त्रुप्ति ने हल्के से रोना शुरू किया, उनकी सिसकारियाँ अँधेरे में दब रही थीं। राहुल ने उन्हें और कसकर पकड़ लिया, जैसे उन्हें सुकून दे रहा हो। त्रुप्ति ने सोचा, ‘अब बात काफ़ी आगे बढ़ चुकी है। पर शायद ये ज़रूरी था। आज अभय, कृति और शीतल ने अपनी आँखों से हमारी परछाइयों को मिलते देखा है। अब पूरे कॉलेज में ये कन्फ़र्म हो जाएगा कि राहुल और मैं पक्के गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड हैं।’
उन्होंने अपने आँसू पोंछे और खुद को दिलासा देने लगीं, ‘बस कुछ वक़्त की बात है। एक बार सबको यक़ीन हो गया, तो कोई भी गंदा लड़का मेरे क़रीब आने की हिम्मत नहीं करेगा। न विक्की, न अभय। जब ये ख़तरा टल जाएगा, तो मैं और राहुल ये एक्टिंग बंद कर देंगे। सब नॉर्मल हो जाएगा।’
लेकिन क्या सच में सब नॉर्मल हो सकता था? क्या एक बेटा अपनी माँ के जिस्म का नशा इतनी आसानी से भूल सकता था? त्रुप्ति को पता था कि उन्होंने आज एक ऐसी आग को हवा दी है जो शायद सब कुछ जलाकर राख कर देगी। पर अब पीछे हटने का रास्ता बंद हो चुका था।
राहुल की गहरी साँसों के बीच, त्रुप्ति ने भी अपनी आँखें बंद कर लीं। उनके बदन पर लगा वो चिपचिपा वीर्य उन्हें बार-बार उस पाप की याद दिला रहा था, जिसे करने में उन्हें डर भी लग रहा था और एक अनोखा मज़ा भी आ रहा था। माँ और बेटा, उस जंगल के अँधेरे में, एक नए और ख़तरनाक रिश्ते की बुनियाद रखकर सो गए।
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