हर कहानी की जान उसके कैरेक्टर्स होते हैं। इस स्टोरी में हम तीन ऐसे लोगों की जिंदगी देख रहे हैं जो मर्यादा और चाहत के बीच खड़े हैं।
गीती (संस्कारी वाइफ)
उम्र: 28 साल
प्रोफेशन: बैंक मैनेजर
आरा: ग्रेसफुल, प्रोफेशनल और थोड़ी सी रिजर्व्ड। पर उसके शांत चेहरे के पीछे एक सुलगता हुआ ज्वालामुखी है।
गीती “क्लासिक इंडियन ब्यूटी” का परफेक्ट मिसाल है। उसकी हाइट 5’6″ है और उसका फिगर एक परफेक्ट आवरग्लास शेप में है—चौड़ी जाँघें और एक बहुत ही पतली कमर। उसका रंग दूध की तरह सफेद है, जो सिल्क साड़ियों में और भी निखरता है। उसके बाल लंबे, घने और जेट-ब्लैक हैं, जो अक्सर ऑफिस में एक नीट बन में बँधे होते हैं, पर जब खुलते हैं तो उसकी पीठ को पूरा ढक लेते हैं। उसकी आँखें बड़ी और गहरी हैं, जिनमें हमेशा एक ठहराव होता है, पर अब उनमें एक नए अनुभव की भूख जाग रही है।
वाइब: वो ऐसी औरत है जिसे देखकर लोग इज्जत भी करते हैं और दबे पाँव उसकी खूबसूरती की तमन्ना भी।
सोहम
उम्र: 29 साल
प्रोफेशन: आईटी कंपनी मैनेजर
आरा: कॉन्फिडेंट, शार्प और फिट। वो जितना अपने काम में कमिटेड है, उतना ही अपनी डिजायर्स को लेकर कंफ्यूज।
सोहम की हाइट 6 फीट है और उसका बॉडी फ्रेम काफी अथलेटिक और टोन्ड है, जो रेगुलर जिम जाने की वजह से दिखता है। उसके फीचर्स काफी शार्प हैं—एक मजबूत जॉलाइन और हमेशा वेल-ग्रूम्ड लाइट स्टबल। उसके हाथ बड़े और मजबूत हैं, जो गीती की नाजुक स्किन पर काफी रफ और मस्कुलिन लगते हैं। ऑफिस में वो हमेशा क्रिस्प आयरन्ड शर्ट्स और फॉर्मल ट्राउजर्स में होता है, जिसमें उसकी चौड़ी छाती साफ नजर आती है।
वाइब: एक ऐसा मर्द जो प्रोटेक्ट भी करना जानता है और बेकाबू होना भी। उसकी आवाज में एक गहरापन है जो किसी को भी अट्रैक्ट कर सकता है।
अमृता
उम्र: 23 साल
स्टेटस: गवर्नमेंट एग्जाम्स की तैयारी कर रही है
आरा: चंचल, बेखौफ और मिश्चिवस। वो “जेन-जेड” एनर्जी से भरी हुई है और जानती है कि अपनी मासूमियत को कैसे यूज करना है।
अमृता गीती से थोड़ी छोटी है, हाइट 5’4″। उसका बदन पेटीट है पर काफी बबली और कर्वी है। उसका रंग सन-किस्ड है, जो काफी हेल्दी और यूथफुल ग्लो देता है। उसके बाल शोल्डर-लेंथ हैं और हमेशा थोड़े बिखरे हुए रहते हैं, जिससे वो काफी क्यूट लगती है। वो अक्सर घर में शॉर्ट कॉटन कुर्तीज या क्लिंगी ड्रेसेस पहनती है, जो उसकी नरम और चिकनी त्वचा को हाइलाइट करते हैं। उसकी आँखों में हमेशा एक शरारत होती है, जैसे वो हर वक्त किसी मजाक की तलाश में हो।
वाइब: वो ऐसी लड़की है जिसे देखकर आपको लगेगा कि वो बहुत मासूम है, पर उसकी बातों और नजरों में एक ऐसी आग है जो किसी भी मर्द को भटका सकती है।
मुंबई की गर्मी और ऊपर से दिल्ली की थकाने वाली फ्लाइट—सोहम जब घर पहुँचा तो उसका बदन टूट रहा था। उसने फ्लैट की बेल बजाई और अपना सूटकेस वहीं साइड में रख दिया। उसका दिमाग अभी भी ऑफिस के काम में उलझा था, पर एक हिस्सा बेचैन था। दिल्ली के टूर पर काम का इतना प्रेशर था कि उससे गीती से बात करने का वक्त तक नहीं मिला, और फिजिकल इंटिमेसी तो दूर की बात थी। एक मर्दाना भूख उसके अंदर दबी हुई थी।
दरवाजा खुला, पर सामने गीती नहीं थी।
अमृता: जीजू! आप आ गए!
अमृता ने खुशी से चहकते हुए कहा।
अमृता ने एक ढीली कॉटन की शॉर्ट कुर्ती और लेगिंग्स पहनी थी। उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे, जैसे वो अभी-अभी सोकर उठी हो। उसका चेहरा बिल्कुल ताजा और चमकदार लग रहा था।
सोहम: हाँ अमृता, गीती अभी तक नहीं आई?
अमृता: नहीं, उनका आज कुछ ऑडिट है बैंक में, तो लेट हो जाएँगी।
अमृता ने सूटकेस उठाने के लिए नीचे झुकते हुए कहा।
जैसे ही वो सूटकेस पकड़ने के लिए नीचे झुकी, उसकी ढीली कुर्ती का गला थोड़ा आगे गिर गया। सोहम, जो ठीक उसके ऊपर खड़ा था, की नजर सीधा उसकी डीप नेकलाइन पर गई। अमृता की गोरी छाती और उसके बीच की गहरी क्लीवेज मूनलाइट की तरह चमक रही थी। सोहम का गला एकदम से सूख गया। दो हफ्ते से गीती से दूर रहने की वजह से उसका शरीर पहले ही सेंसिटिव था, और ये नजारा उसके लिए किसी बिजली के झटके से कम नहीं था।
अमृता: जीजू? कहाँ खो गए?
अमृता ने सूटकेस उठाकर सीधा होते हुए पूछा। उसने सोहम की नजरों का पीछा किया और हल्की सी स्माइल दी, जैसे उसे पता हो कि सोहम क्या देख रहा था।
सोहम: उह… कुछ नहीं। बस थोड़ा थका हुआ हूँ। वैसे, मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ।
उसने अपने बैग से एक छोटा सा बॉक्स निकाला।
सोहम: ये लो, दिल्ली से तुम्हारे लिए एक छोटी सी भेंट।
अमृता ने एक्साइटेडली बॉक्स खोला। उसमें एक रोज-गोल्ड फिनिश वाली महँगी वॉच थी।
अमृता: वाओ! ये कितनी प्यारी है! थैंक यू सो मच, जीजू!
खुशी के मारे अमृता ने आओ देखा ना ताओ, और सीधा सोहम को गले लगा लिया।
उसकी फ्रूटी शैम्पू और यूथफुल स्किन की महक सोहम के नाक से होती हुई सीधा उसके दिमाग तक पहुँची। अमृता का नरम बदन सोहम के सख्त सीने से चिपक गया। सोहम ने महसूस किया कि उसकी दबी हुई गर्मी अब बेकाबू हो रही है। उसका औजार एकदम से सख्त होने लगा और जींस के अंदर अपना रास्ता बनाने लगा।
अमृता ने हग थोड़ा लंबा खींचा। पर जैसे ही वो पीछे हटने वाली थी, उसे सोहम के थाइज के पास कुछ सख्त महसूस हुआ जो उसके पेट से टकरा रहा था। वो एक पल के लिए ठिठक गई। उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हुईं और उसने सोहम की आँखों में देखा।
दोनों के बीच एक गहरी खामोशी छा गई। अमृता ने तुरंत उसे नहीं छोड़ा; उसने धीरे से अपने हाथ सोहम के कंधों से हटाए, पर उसकी नजरें सोहम के जींस के उस उभार पर ही थीं जो साफ नजर आ रहा था।
अमृता: आप… आप फ्रेश हो जाइए, मैं चाय बनाती हूँ।
अमृता ने धीरे से कहा, उसका चेहरा अब हल्का गुलाबी हो चुका था।
दोनों सोफा पर बैठ गए। अमृता ने टीवी ऑन कर दिया, पर दोनों का ध्यान स्क्रीन पर नहीं था। कमरे में एक ऐसी अकॉर्डनेस और टेंशन थी जिसे काटा जा सकता था। सोहम अपनी जींस ठीक करने की कोशिश कर रहा था, और अमृता बार-बार अपने बालों को कान के पीछे कर रही थी, कभी-कभी तिरछी नजरों से सोहम को देखते हुए।
रात अभी शुरू हुई थी, और गीती के आने में अभी काफी वक्त था।
सोहम फ्रेश होकर लिविंग रूम में आया तो देखा अमृता किचन से दो कप स्टीमिंग चाय लेकर आ रही थी। उसके चलने के अंदाज में एक अजीब सी लचक थी। वो सोहम के बिल्कुल पास सोफा पर बैठ गई—इतनी पास कि उनके कंधे लगभग टकरा रहे थे।
चाय की भाप के बीच अमृता ने अपनी नजरें उठाईं।
अमृता: जीजू, आप कभी मेरे साथ घर पे टाइम क्यों नहीं बिताते?
उसने एक टीजिंग मुस्कान के साथ पूछा, उसका गला थोड़ा डीप हुआ जैसे वो जानबूझकर उसे डिस्ट्रैक्ट कर रही हो।
सोहम ने चाय का सिप लिया, पर उसका ध्यान अमृता के गुलाबी होठों पर था।
सोहम: तुम ही तो बड़ी बिजी रहती हो मैडम… हर वक्त या तो फोन में या बुक्स में। मुझे लगा मेरी जरूरत नहीं है।
अमृता ने थोड़ा नखरा दिखाया और अपना सर थोड़ा टेढ़ा किया।
अमृता: अच्छा जी? आप तो लगता है किसी और के साथ टाइम बिताने में बिजी होते हो… दिल्ली की चंचल लड़कियाँ पसंद आ गईं लगती हैं। मुझे तो बस एस्क्यूज मिलता है!
सोहम थोड़ा और झुका, उसकी मस्कुलिन कोलोन और अमृता की मीठी सेंट अब मिल रही थीं।
सोहम: वैसे अगर तुम चाहो… तो मैं सिर्फ तुम्हारा हो जाऊँ कुछ वक्त के लिए?
अमृता का चेहरा एकदम से तमतमा उठा। वो शर्मा गई, पर उसने अपनी नजरें नहीं हटाईं।
अमृता: जीजू, आप भी ना… फ्लर्ट करने लगे हो क्या? दीदी को बताऊँ?
सोहम: मैं तो बस तुमसे बात कर रहा हूँ… तुम ही कुछ और सोच रही हो!
चाय के बाद दोनों गार्डन में वॉक करने गए। शाम ढल रही थी और आसमान पर नारंगी और बैंगनी रंग बिखरे हुए थे। बातें करते-करते वो दोनों एक घने पेड़ के नीचे रुक गए।
अमृता: जीजू, आप कभी-कभी इतने स्वीट लगते हो कि लगता है आपको किसी लड़की ने अब तक चुराया कैसे नहीं।
उसने आँख मारते हुए कहा, पर उसकी आवाज में एक सच्चाई थी।
सोहम ने थोड़ी देर उसे देखा, फिर धीरे से बोला—
सोहम: शायद इसलिए क्योंकि मैं किसी एक लड़की का हो गया हूँ… लेकिन उसने अब तक रियलाइज नहीं किया।
अमृता का दिल जोरों से धड़का। उसने सोहम की बात का मतलब समझ लिया था, पर उसने सिर्फ एक चैलेंज वाली स्माइल दी। वो जानती थी कि ये आग दोनों तरफ बराबर लगी है।
रात होने को थी, बारिश की ठंडक बढ़ रही थी। दोनों ने डिसाइड किया कि एक लाइट सी मूवी देखते हैं। लिविंग रूम की लाइट्स डिम थीं, सिर्फ टीवी की रोशनी उनके चेहरों पर पड़ रही थी।
मूवी के दौरान भी वो दबी-दबी मस्ती चालू थी। सोहम ने पॉपकॉर्न उठाते वक्त “गलती” से अमृता के नरम हाथ को छुआ। अमृता ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि उसने अपनी टाँग सोफा पर ऊपर रख दी, सोहम का रास्ता ब्लॉक करते हुए।
सोहम: ये क्या कर रही हो मैडम, पाँव हटाओ।
उसने मजाक में कहा, पर उसकी नजर अमृता की चिकनी और गोरी थाइज पर थी जो कुर्ती से बाहर झाँक रही थीं।
अमृता: तो आप निकाल के दिखाओ।
अमृता ने थोड़ा ललकारा, उसके चेहरे पर नॉटी एक्सप्रेशन्स थे।
सोहम ने मजाक-मजाक में उसका पाँव पकड़ लिया। अमृता का पाँव इतना मुलायम था कि सोहम का हाथ वहाँ से हटने का नाम नहीं ले रहा था। अमृता हल्का सा सहमी, पर फिर हँस दी। वो बॉन्डिंग एफर्टलेस थी, जैसे दोनों एक कम्फर्ट जोन में आ गए हों जहाँ शरम पीछे छूट रही थी।
देर रात जब गीती थकी-हारी घर आई, तो उसने देखा घर का माहौल काफी वार्म और लाइट है। सोहम और अमृता हँस-हँसकर बातें कर रहे थे।
गीती: अरे, तुम दोनों की पार्टी तो अभी तक चल रही है?
उसने मुस्कुराते हुए पूछा, अपना बैग रखते हुए।
उसने देखा कि सोहम का चेहरा खिला हुआ है और अमृता काफी खुश है। गीती को लगा कि सोहम और उसकी बहन के बीच एक हेल्दी, स्वीट दोस्ती बन गई है। उस मासूम को क्या पता था कि उसकी गैर-हाजिरी में घर के हर कोने में एक फॉरबिडन कनेक्शन की खुशबू बस चुकी थी।
गीती ने सोहम को गले लगाया, पर सोहम की नजरें अभी भी अमृता से टकरा रही थीं।
अगले दिन की सुबह थोड़ी देर से शुरू हुई। सोहम दिल्ली की थकान और रात की बेचैनी की वजह से देरी से जागा। जब उसने आँखें खोलीं, तो सूरज की रोशनी पर्दे चीरकर कमरे में आ रही थी। गीती पहले ही उठ चुकी थी और किचन से मसालों की खुशबू और बर्तनों की आवाज आ रही थी—वो लंच की तैयारी में व्यस्त थी।
सोहम ने अंगड़ाई ली और बेड से उठकर कमरे से बाहर निकला। उसका इरादा सीधा बाथरूम जाने का था, पर जैसे ही वो हॉलवे में पहुँचा, बाथरूम का दरवाजा खुला।
सामने अमृता खड़ी थी।
सोहम के कदम वहीं जम गए। अमृता ने सिर्फ एक छोटा सा सफेद टॉवल अपने बदन पर लपेटा हुआ था। टॉवल उसकी चेस्ट से शुरू होकर उसकी थाइज के बीच तक ही पहुँच रहा था। उसका बदन अभी भी गीला था, और पानी की नन्ही बूँदें उसके गोरे कंधों और कॉलरबोन पर मोतियों की तरह चमक रही थीं। उसके भीगे बाल शोल्डर्स पर बिखरे थे, और पानी धीरे-धीरे टपककर टॉवल के ऊपर से उसके बदन पर रास्ता बना रहा था।
अमृता ने सोहम को देखा और एक पल के लिए फ्रीज हो गई। दो हफ्ते तक सोहम घर पर नहीं था, तो वो और गीती अक्सर ऐसे ही आजादी से घूमती थीं। वो भूल गई थी कि अब सोहम घर वापस आ चुका है।
सोहम की नजरें अमृता के भीगे बदन पर टिक गई थीं। सफेद टॉवल अमृता की सन-किस्ड स्किन और उसके कर्व्स को इतनी खूबसूरती से उभार रहा था कि सोहम का दिमाग सुन्न हो गया। सुबह की ठंडक में उसके शरीर में एक गरम लहर दौड़ गई। रात की दबी हुई चाहत एकदम से जाग उठी, और उसकी शॉर्ट्स के अंदर उसका लंड एक बार फिर तेजी से सख्त होने लगा।
अमृता: ओप्स! सॉरी जीजू!
अमृता ने धीरे से कहा, उसका चेहरा शरम से एकदम लाल हो गया।
वो तेजी से अपने कमरे की तरफ भागी, पर भागते वक्त उसकी नजर एक पल के लिए सोहम के शॉर्ट्स पर गई। वहाँ साफ तौर पर एक लंबा और सख्त उभार नजर आ रहा था जो सोहम की अराउजल को छुपा नहीं पा रहा था।
अमृता अपने कमरे में घुसी और दरवाजा बंद कर लिया। दरवाजे के पीछे खड़े होकर उसने अपना हाथ अपने दिल पर रखा, जो जोरों से धड़क रहा था। उसने याद किया कि सोहम उसे कैसे देख रहा था—उन नजरों में भूख थी, एक ऐसी चाहत जो अमृता को अंदर तक हिला गई थी। वो हल्का सा मुस्कुराई और फिर एक दबी हुई खिलखिलाहट उसके होठों से निकली। उसे बुरा नहीं लगा; बल्कि उसे मजा आ रहा था कि उसका भीगा बदन सोहम को इतना बेचैन कर सकता है।
बाहर हॉलवे में, सोहम अभी भी वहीं खड़ा था, अपनी साँसें काबू करने की कोशिश कर रहा था।
गीती: सोहम? तुम उठ गए? चाय ठंडी हो रही है!
गीती ने किचन से आवाज दी।
सोहम ने एक गहरी साँस ली और अपना गला साफ किया।
सोहम: हाँ गीती, बस आ रहा हूँ।
पर उसका ध्यान अभी भी उस बंद दरवाजे पर था जिसके पीछे अमृता अभी-अभी गई थी।
वो जानता था कि अब ये सिलसिला रुकने वाला नहीं है। हर गुजरते पल के साथ, घर की दीवारों में एक फॉरबिडन रोमांस अपनी जगह बना रहा था।
दोपहर का वक्त था। मुंबई की सड़कों पर हल्की भीड़ थी और आसमान पर काले बादल अभी भी तैर रहे थे। सोहम एक साउथ मुंबई के पोश कैफे में बैठा था, बार-बार अपने कॉफी मग के हैंडल से खेल रहा था। उसके दिमाग में अभी भी वही मॉर्निंग वाला नजारा घूम रहा था—अमृता का वो भीगा बदन, सफेद टॉवल, और उसकी शरारत भरी गिगल।
तभी आशीष ने एंट्री ली। आशीष, सोहम का कॉलेज का सबसे पुराना दोस्त, जो अब एक लाइफस्टाइल मैगजीन में एडिटर था। वो हमेशा से थोड़ा ‘मॉडर्न’ और ‘ओपन-माइंडेड’ खयालों का रहा है।
आशीष: क्या बात है सोहम? इतना सन्नाटा क्यों है भाई? लगता है दिल्ली की थकान उतरी नहीं अब तक।
सोहम ने एक फीकी मुस्कान दी।
सोहम: थकान तो उतर गई… पर दिमाग कहीं और फँसा हुआ है।
आशीष ने वेटर को कॉफी का ऑर्डर दिया और लीन होकर सोहम की आँखों में देखा।
आशीष: बता ना यार, क्या चल रहा है? गीती भाभी से झगड़ा हुआ? या फिर… कहीं वहाँ दिल्ली में कोई सीन तो नहीं हो गया?
सोहम ने एक गहरी साँस ली और टेबल पर झुक गया।
सोहम: नहीं यार… सीन घर पर हो गया है। अमृता… गीती की बहन।
आशीष ने एक जोर का ठहाका लगाया।
आशीष: ओहो! साली साहिबा? भाई, तू तो बड़ा ‘शौकीन’ निकला! भाभी इतनी सुंदर हैं, और तेरी नजर अब साली पे है? क्या बात है, ‘साली आधी घरवाली’ वाला मुहावरा सच कर रहा है क्या?
सोहम का चेहरा सख्त हो गया।
सोहम: मजाक मत कर आशीष। मैं बहुत सीरियस हूँ। मुझसे नहीं हो रहा… मैं उसे देखता हूँ तो मेरा कंट्रोल छूटने लगता है। आज सुबह… उसे टॉवल में देखकर… आई मीन, इट वाज रॉन्ग। पर मेरे अंदर कुछ हो रहा है जो मैं रोक नहीं पा रहा।
आशीष का मजाकिया मूड एकदम से गायब हो गया। उसने देखा कि सोहम के हाथ काँप रहे थे।
आशीष: शिट, सोहम। तू सच में फँस गया है। पर गीती? वो तो तुझसे बहुत प्यार करती है। धोखा देगा उसे?
सोहम: वही तो प्रॉब्लम है! मैं गीती को धोखा नहीं देना चाहता। पर अमृता के लिए जो अट्रैक्शन है, वो मेरी बॉडी और दिमाग पर कब्जा कर रहा है। मैं डिशवॉशर में या टीवी देखते वक्त भी सिर्फ उसे ही इमेजिन करता हूँ।
आशीष ने कॉफी का सिप लिया और कुछ देर सोचता रहा। फिर उसने एक अजीब सी स्माइल दी।
आशीष: देख सोहम, सॉल्यूशन सिंपल है पर थोड़ा तीखा है। तूने कभी ‘ओपन रिलेशनशिप’ या ‘हॉटवाइफ’ कॉन्सेप्ट के बारे में सुना है?
सोहम ने सवालिया नजरों से देखा।
सोहम: मतलब? वही जो मूवीज में होता है? स्विंगर्स?
आशीष: नहीं, हर बार स्विंगर नहीं होता। देख, तेरा गिल्ट इसलिए है क्योंकि तू अकेले कुछ ‘फॉरबिडन’ करना चाहता है। पर अगर तू और गीती एक-दूसरे को आजादी दे दो? अगर तू अमृता के साथ है, तो गीती को भी तो मजा आने दे किसी और के साथ।
सोहम का चेहरा पीला हो गया।
सोहम: क्या बकवास कर रहा है? गीती किसी और के साथ? मैं टॉलरेट नहीं कर पाऊँगा!
आशीष: क्यों? तू करे तो ‘अट्रैक्शन’, वो करे तो ‘चरित्रहीन’? सोच सोहम… अगर गीती एक ‘हॉटवाइफ’ बन जाए, और तू उसे किसी और के साथ देखे या बस जाने कि वो किसी और के साथ है… तेरा गिल्ट खत्म हो जाएगा। क्योंकि तब तुम दोनों बराबर होगे। इन फैक्ट, उसे किसी और के साथ इमेजिन करना तुझे और भी ज्यादा एक्साइट करेगा।
सोहम चुप हो गया। उसके दिमाग में एक अजीब सा कॉन्फ्लिक्ट शुरू हुआ। एक तरफ गीती की मासूमियत थी, और दूसरी तरफ आशीष का ये ‘अनकॉन्वेंशनल’ आइडिया।
सोहम: तू कहना चाहता है कि मैं उसे ‘अलाउ’ करूँ किसी और के पास जाने के लिए?
आशीष: मैं कह रहा हूँ कि सच्चाई शेयर कर। उसे बता कि तू क्या फील कर रहा है। उसे भी एक पार्टनर कंसीडर करने दे। अगर वो मैच्योर है, तो समझेगी। और यकीन मान, जब एक औरत को पता चलता है कि उसका मर्द उसे शेयर करने के लिए तैयार है, तो उनके बीच का कनेक्शन और भी ‘वाइल्ड’ हो जाता है। तू अमृता के साथ खुल सकेगा… बिना किसी डर के।
सोहम ने अपनी कॉफी खत्म की। उसके दिमाग में अब दो इमेजेस थीं—अमृता का वो टॉवल वाला बदन, और गीती… एक ‘हॉटवाइफ’ के रूप में किसी अजनबी के साथ।
सोहम: शायद तू सही कह रहा है। हमें डर में जीने से अच्छा है कि हम अपनी बाउंडरीज ही मिटा दें।
आशीष ने उसकी पीठ थपथपाई।
आशीष: गुड लक, ब्रदर। पर याद रखना, एक बार ये दरवाजा खुल गया, तो वापस बंद नहीं होता।
सोहम कैफे से बाहर निकला। बारिश बंद हो चुकी थी, पर हवा में एक नई तरह की गर्मी थी। वो जानता था कि आज रात की बातचीत उन तीनों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगी।
अगले कुछ दिन घर के अंदर का माहौल एक ऐसी खामोश जंग जैसा था, जिसके बारे में सिर्फ सोहम और अमृता जानते थे। गीती के लिए वो उसका वही पुराना घर था, पर सोहम के लिए हर कोना अब एक गुनाह की निशानी बनता जा रहा था।
सोहम का हाल अब ऐसा था कि वो जितना खुद को रोकने की कोशिश करता, उतना ही अमृता के खयालों में धँसता जाता। ऑफिस में काम करते वक्त भी, स्प्रेडशीट्स की जगह उसे अमृता का वो व्हाइट टॉवल वाला बदन और हॉलवे में उसकी वो शरारत भरी गिगल याद आती। उसका दिमाग अब एक ऐसे “लूप” में फँसा था जहाँ हर रास्ता अमृता पर ही खत्म होता था।
गीती, जो हमेशा से एक समझदार और केयरिंग पत्नी रही थी, उसे अब साफ एहसास होने लगा था कि कुछ बहुत बड़ा गलत हो रहा है। सोहम अब उससे नजरें चुराने लगा था। वो घर तो आता, पर उसका मन कहीं और होता।
गीती: सोहम, तुम ठीक तो हो ना?
गीती ने एक शाम डाइनिंग टेबल पर उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा।
गीती: तुमने ढंग से खाना भी नहीं खाया। दिन भर खोए-खोए रहते हो। मुझसे कोई गलती हुई है क्या?
सोहम ने झटके से अपना हाथ पीछे खींच लिया, जैसे गीती का स्पर्श उसे चुभा हो।
सोहम: कुछ नहीं गीती, तुम हर बात का बतंगड़ क्यों बनाती हो? ऑफिस में ऑडिट चल रहा है, स्ट्रेस है। बस।
गीती: स्ट्रेस ऑफिस का है या मुझसे दूर होने का? पिछले चार दिनों से तुमने मुझसे ढंग से एक सेंटेंस तक नहीं बोला। अमृता से तो तुम हँस-हँसकर बातें करते हो, पर मेरे आते ही तुम चुप हो जाते हो।
सोहम ने बिना जवाब दिए कुर्सी छोड़ी और बालकनी की तरफ चला गया। उसका ये रूखापन गीती के लिए किसी खंजर से कम नहीं था। उसे लग रहा था कि वो अपने ही घर में एक अजनबी बनती जा रही है।
रात को बेडरूम में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की ‘टिक-टिक’ भी शोर लग रही थी। गीती ने आज हिम्मत जुटाई थी। उसने वही रेड सिल्क नाइटी पहनी थी जो सोहम ने उसे सालगिरह पर दी थी। उसने थोड़ा सा वही परफ्यूम लगाया जो सोहम को मदहोश कर देता था।
वो बेड पर सोहम के पास आई और धीरे से उसकी पीठ पर अपना सर रख दिया।
गीती: सोहम… प्लीज… मुझसे दूर मत जाओ। मैं तुम्हारी वही गीती हूँ।
सोहम पलटा। गीती की आँखों में आँसू और चाहत का एक अजीब मिक्स था। रेड सिल्क में उसका गोरा बदन चमक रहा था। सोहम ने एक गहरी साँस ली और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उसे लगा शायद गीती के पास आने से अमृता का भूत उतर जाएगा।
वो गीती को किस करने लगा, पर जैसे-जैसे नजदीकियाँ बढ़ीं, सोहम का दिमाग “धोखा” देने लगा।
जैसे ही उसने गीती की आइवरी स्किन को छुआ, उसे अमृता के वो भीगे हुए कंधे याद आ गए। जब उसने गीती की नाइटी की स्ट्रैप नीचे की, तो उसे वही सफेद टॉवल दिखने लगा जो अमृता ने हॉलवे में लपेटा था। वो गीती के होठों को छू रहा था, पर उसकी बंद आँखों के पीछे अमृता का चेहरा था—उसकी वही तिरछी नजर और वो मासूम सी शरारत।
उसका शरीर तो गीती के साथ था, पर उसकी रूह अमृता के ‘फॉरबिडन’ टच के लिए तरस रही थी। एक पल ऐसा आया जब सोहम के होठों से गलती से “अम…” निकलते-निकलते रह गया।
वो अचानक एक झटके से पीछे हट गया। उसका साँस फूल रहा था, जैसे उसने कोई पाप कर दिया हो।
गीती: सोहम? क्या हुआ?
गीती ने बेचैनी से पूछा, उसका चेहरा हैरानी और दर्द से भरा था। वो अधूरेपन में तड़प रही थी।
सोहम: आई… आई कैंट, गीती। बहुत थकान है। नींद आ रही है।
सोहम ने करवट बदल ली और कंबल ओढ़ लिया।
गीती वहीं खामोश बैठी रही, अँधेरे में उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसे अब यकीन हो गया था कि सोहम के दिमाग में कोई और है। वो रिजेक्शन उसे अंदर तक तोड़ गया।
दीवार के दूसरे कमरे में, अमृता शायद जाग रही थी। वो जानती थी कि सोहम की हर साँस पर अब उसका पहरा है। सोहम खुद से नफरत कर रहा था, पर वो जानता था कि अब वो गीती का “लवली हस्बैंड” नहीं रहा—वो अपनी ही साली की चाहत का कैदी बन चुका था।
रात के 9 बज रहे थे। बाहर की बारिश अब एक हल्की सी ठंडक में बदल चुकी थी। गीती जब घर आई, तो उसके चेहरे पर दिन भर की थकान साफ दिख रही थी। उसने अपनी नेवी ब्लू कॉटन साड़ी का पल्लू थोड़ा संभाला और अपने बालों के बन को ढीला किया। बैंक का ऑडिट काफी एग्जॉस्टिंग रहा था, और वो बस एक गरम कप कॉफी और सोहम का साथ चाहती थी।
सोहम लिविंग रूम में काउच पर बैठा था। टीवी बंद था, पर उसके हाथ में एक पुराना मैगजीन था जिसे वो बिना पढ़े पलट रहा था। उसके दिमाग में आशीष की बातें और अमृता का वो ‘टॉवल’ वाला अक्स किसी घोस्ट की तरह घूम रहे थे।
गीती: बहुत थक गई हूँ, सोहम। चाय पीओगे या कॉफी?
सोहम: कॉफी… मेरे लिए भी एक बना दो।
कुछ देर बाद गीती दो मग लेकर आई। उसने कॉफी टेबल पर रखी और सोहम के पास बैठ गई। उसने अपने स्पेक्टेकल्स उतारे और अपनी थकी हुई आँखों को मसला।
गीती: सब ठीक है ना? तुम आज कुछ अलग ही मूड में लग रहे हो।
सोहम ने कॉफी का मग उठाया, पर उसके हाथ हल्का सा काँप रहे थे। उसने एक गहरी साँस ली, जैसे हिम्मत जमा रहा हो।
सोहम: गीती… मैं तुमसे एक बात शेयर करना चाहता हूँ। थोड़ा हटके है, थोड़ा अनकॉन्वेंशनल… पर मैं तुमसे अब कुछ छुपाना नहीं चाहता।
गीती ने अपना मग पकड़ा और थोड़ा अलर्ट हो गई।
गीती: क्या बात है, सोहम? इतनी टेंशन में क्यों लग रहे हो? कोई ऑफिस की प्रॉब्लम है?
सोहम ने उसकी आँखों में देखा। उसके दिमाग में अमृता का चेहरा था, पर उसके सामने उसकी प्यारी और वफादार पत्नी बैठी थी।
सोहम: नहीं… ऑफिस नहीं। हमारे बारे में। मुझे लगता है… हम दोनों थोड़ा ‘स्टक’ फील कर रहे हैं। इस रूटीन में, इस मोनोटनी में।
गीती: मोनोटनी? मतलब?
सोहम: मतलब… क्या तुमने कभी ओपन रिलेशनशिप के बारे में सोचा है?
वही सन्नाटा जो गीती को सुकून देता था, अब एक भयानक सन्नाटे में बदल गया। गीती का हाथ वहीं जम गया। कॉफी की भाप उसके चेहरे से टकरा रही थी, पर उसे लग रहा था जैसे किसी ने उस पर बर्फ फेंक दी हो।
गीती: क्या?? सोहम… तुम होश में तो हो?
सोहम ने नजरें चुराईं, पर फिर खुद को संभाला।
सोहम: मुझे लगता है… एक्सप्लोरिंग आउटसाइड द मैरिज, टुगेदर—म्यूचुअली, ऑनेस्टली—कुड ब्रिंग क्लैरिटी। हम दोनों को एक नया पर्सपेक्टिव मिल सकता है। मैं चाहता हूँ कि तुम भी… आजाद महसूस करो।
गीती: आर यू ईवन लिसनिंग टू योरसेल्फ, सोहम? तुम मुझसे कह रहे हो कि मैं किसी और मर्द के साथ… रिश्ते में जाऊँ? ताकि तुम्हारे दिमाग का ‘स्टक’ फील होना खत्म हो सके? दैट टू विथ योर ‘परमिशन’?
सोहम ने उसका हाथ पकड़ना चाहा, पर गीती ने झटके से अपना हाथ छुड़ा लिया।
सोहम: नहीं, मेरा मतलब तुम्हें फोर्स करना नहीं था। मैं बस सोच रहा था… अगर हम दोनों चाहें, तो—
गीती: तो तुम खुद किसी और के साथ होना चाहते हो, राइट? और इसलिए मुझे भी ‘अलाउ’ कर रहे हो ताकि तुम्हारा गिल्ट कम हो जाए? वाओ, सोहम। कितने कंसीडरेट हो तुम! मेरे लिए इतना बड़ा ‘सैक्रिफाइस’?
सोहम ने कुछ बोलने की कोशिश की।
सोहम: गीती, प्लीज। मैं सिर्फ ऑनेस्ट होना चाहता हूँ। आशीष से बात की थी मैंने और—
गीती: आशीष? ऑनेस्ट होने का मतलब ये नहीं होता कि तुम किसी भी वक्त मेरी जिंदगी में बॉम्ब फोड़ दो। तुमने कभी सोचा मैं क्या महसूस करूँगी? मैं यहाँ दिन भर काम करके आती हूँ ताकि तुम्हारे साथ थोड़ा सुकून बिता सकूँ, और तुम मुझे किसी और मर्द के बिस्तर में भेज रहे हो?
सोहम काउच पर ही बैठा रहा, उसका सर झुका हुआ था। उसे समझ आ गया था कि आशीष का ‘मॉडर्न’ मशवरा हकीकत में कितना कड़वा था।
गीती बेडरूम की तरफ चली गई। दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखा, पर अंदर जाने से पहले वो पलटी। उसकी आँखें अब शोला बन चुकी थीं। उसने एक लास्ट लाइन बोली—इतनी धीमी पर इतनी तीखी कि सोहम का कलेजा काँप गया:
गीती: अगर मैं कल किसी और के साथ होती ना… क्या तुम टॉलरेट कर पाते, सोहम? क्या सच में तुम मुझे किसी और की बाँहों में देखकर इतने ही ‘ऑनेस्ट’ रह पाते?
दरवाजा जोर से बंद हो गया।
सोहम काउच पे अकेला रह गया—साइलेंट, शेकेन, एंड अनश्योर। उसने एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी जिसे शायद वो अब कभी गिरा नहीं पाएगा। पर उसके दिमाग के एक कोने में, गीती का वही सवाल गूँज रहा था—क्या वो टॉलरेट कर पाता?
अँधेरे में बैठकर, सोहम को रियलाइज हुआ कि उसने शायद वो चीज तोड़ दी है जो उन दोनों को बाँधे हुए थी। और दीवार के दूसरे कमरे में, अमृता शायद ये सब सुन रही थी… या शायद वो अगले मोड़ का इंतजार कर रही थी।