Didi Live Gangbang Sex
मेरा नाम मोनू है। उम्र पच्चीस साल। शरीर कसा हुआ है, सीना चौड़ा, बाजू मोटे। लंड मेरा साढ़े सात इंच का है, मोटा और नसों वाला। जब खड़ा होता है तो पूरा सख्त हो जाता है, सिर काला-चमकीला। रोज हिलाता हूँ तो थोड़ा और मोटा लगने लगा है। Didi Live Gangbang Sex
मेरी दीदी नेहा। उम्र अट्ठाईस। कद पाँच फुट पाँच इंच। बदन भरा-भरा। गाँड भारी, गोल-गोल, जब चलती है तो पीछे से दोनों चूतड़ हिलते-मटकते हैं। किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। स्तन मोटे-मोटे, भरे हुए, ब्लाउज में ठूँसे हुए लगते हैं। जाँघें मोटी-गोरी। पूरा शरीर माल जैसा।
मुझे सेक्स स्टोरी पढ़ने का बहुत शौक था। रोज पढ़ता और हिलाता। तभी से मन में मम्मी और दीदी दोनों को चोदने के ख्याल आने लगे थे। दीदी की शादी हो गई थी। दिल्ली में रहती थी। एक बेटा भी था। मैं बारहवीं के बाद एसएससी की तैयारी करने उसके घर गया था।
वहाँ एक ही बेड था। उसी पर मैं, जीजा, दीदी और उसका बेटा सोते थे। दीदी रोज जीजा से चुदती थी। कभी-कभी झगड़ा भी हो जाता, लेकिन चूदाई चलती रहती। जीजा साढ़े आठ-नौ इंच का मोटा लंड रखता था और दीदी को तगड़े तरीके से चोदता था।
हाय साली, एक नंबर की माल थी। मैं मौके की तलाश में था। कब अकेली मिले, कब इसकी चूत में लंड घुसाऊँ। एक दिन जीजा को काम से हफ्ते भर के लिए गाँव जाना पड़ा। मैंने ठान लिया—आज नहीं तो कल, इसको जरूर चोदूँगा। रात को खाना खाकर सब सो गए।
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मैं भी सोने का नाटक करने लगा। दीदी मुझे अपने पैर दबवाती थी। मैं भी मजे लेने के लिए दबा देता था। कम से कम उसकी गोरी मोटी जाँघ तो छूने को मिलती थी। उस दिन भी दबाते-दबाते हाथ जानबूझकर जाँघ पर ज्यादा फेर दिया, सहला भी दिया। उसे लगा नॉर्मल है। वह सो गई।
मैं लेटा रहा। थोड़ी देर बाद हाथ उसके पेट पर रख दिया, सहलाने लगा। वह हिली, करवट लेकर सो गई। फिर हाथ उसकी गाँड पर रख दिया। दोनों चूतड़ों को महसूस किया। एक हाथ गाँड पर, एक हाथ लंड पर पकड़कर पड़ा रहा। पता नहीं कैसे नींद आ गई।
अगला दिन नॉर्मल निकल गया। लेकिन अगली रात मैं और आगे बढ़ने के मूड में था। वह सो गई तो मैंने हाथ पेट पर रखा, फिर स्तनों पर। धीरे-धीरे सहलाते हुए चूत की तरफ बढ़ाने लगा। जब हाथ उसकी चूत तक पहुँचा तो वह जाग गई। “सही से सो!”
मेरा कंट्रोल खो चुका था। बोला, “दीदी एक बार कर लेने दो बस… मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। मेरी गाँड भी फट रही है।”
वह गुस्से में आ गई। “तू कितना घटिया है! कितना बुरा है! सुबह घर से निकल जाना!”
मेरी गाँड फट गई। सुबह होते ही घर छोड़कर दोस्त के यहाँ चला गया। जब मैं घर नहीं पहुँचा और न गाँव गया तो उसने मम्मी को सब बता दिया। कुछ दिन बाद जब गाँव गया तो मम्मी ने एक-दो गाली दीं, ज्यादा नहीं बोलीं। डर था कि मैं घर छोड़कर भाग न जाऊँ। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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समय के साथ सब नॉर्मल हो गया। दीदी मुझसे बात करने लगी। मैं भी उसके घर जाने लगा। कुछ साल बाद वह अपने ससुराल में थी। फोन करके बोली, “तेरे भांजे को मेला दिखाने ले आ। कह रहा है।” पीछे से भांजा बोल रहा था, “खुद जाना चाह रही हो, मेरा नाम क्यों ले रही हो?”
मुझे कुछ गड़बड़ लगी, लेकिन बोला— देखता हूँ। मन अब भी बहुत करता था कि इसी को चोदूँ। अगले दिन मैं उसके घर पहुँच गया। उसने सलवार-सूट पहना था। हम तीनों मेला देखने निकले। भीड़ बहुत थी। वह आगे चल रही थी, बेटे का हाथ पकड़े। मैं पीछे।
उसके चलने का अंदाज देखकर लंड सख्त हो गया। भीड़ की वजह से टकराता रहता था। मौका देखकर मैंने हाथ उसकी चूतड़ पर रख दिया, दबा दिया, सहला दिया। वह उछल सी गई, लेकिन समझ नहीं पाई कौन है। फिर और हिम्मत करके उंगली उसकी सलवार के ऊपर से ही दोनों चूतड़ों की दरार में घुसा दी।
उंगली उसके गाँड के छेद तक पहुँच गई। वह फिर से सिहर गई, उछली। थोड़ी देर बाद बोली, “तू इसे मेला दिखा दे, मैं तब तक कुछ सामान खरीद लेती हूँ।” मुझे शक हुआ। मैंने भांजे को एक झूले में बिठाया और पूछताछ करने लगा कि दीदी किस तरफ गई।
वह एक चूड़ी वाले स्टॉल पर रुकी, फिर मेले से बाहर की तरफ निकल गई। बाहर तीन लड़के खड़े थे। उनमें से एक के साथ वह पास के जंगल जैसी जगह में चली गई। मैं भांजे को एक खाने की स्टॉल पर बैठाकर स्टॉल वाले को बोला और उसी तरफ वापस आ गया। दोनों लड़के खड़े थे। मैं दूसरी तरफ से जंगल में घुसा।
देखा— दीदी उस लड़के से झगड़ रही है। “नहीं, मैं इन दोनों से नहीं चुदुँगी। मैं कोई रंडी नहीं हूँ!”
लड़का बोला, “कर ले यार… वो तुझे लाइक करता है और पैसे भी देने को तैयार है।”
दीदी बोली, “मैं कोई पैसे से चुदने वाली नहीं हूँ। मैं तुझसे प्यार करती हूँ इसलिए चुदती हूँ। तू मुझे बाजारू रंडी समझ रहा है?”
लड़का जिद करने लगा।
आखिर दीदी बोली, “ठीक है… लेकिन बस लास्ट टाइम। आगे से नहीं।”
मेरा खून खौल गया। लंड पहले से ही सख्त था, अब और तन गया। मैं झाड़ियों के पीछे छिपकर देख रहा था। दीदी ने सलवार नीचे उतारी। उसकी भारी भरी गाँड नंगी हो गई। मोटी-मोटी चूतड़, बीच में गुलाबी गाँड का छेद। आगे की चूत भी बालों से भरी, लेकिन साफ-सुथरी। स्तन अभी कपड़ों में थे।
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लड़का अपना पैंट खोला। लंड निकाला— करीब सात इंच का, काला। दीदी घुटनों के बल बैठ गई और मुँह में ले लिया। “आह्ह… चुस साली… गहरा ले…” दीदी चुस रही थी। लार टपक रही थी। लड़का उसके बाल पकड़कर मुँह में ठोक रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर बाद उसने दीदी को घुटनों पर झुका दिया। पीछे से लंड उसकी चूत में घुसाया। “आह्ह्ह… धीरे… आह्ह…” “चुप रंडी… ले पूरा…” लंड अंदर-बाहर हो रहा था। दीदी की गाँड हिल रही थी। चूत की आवाज— छप-छप साफ सुनाई दे रही थी।
लड़का जोर-जोर से धक्के मार रहा था। “तेरी यह मोटी गाँड… फाड़ दूँगा आज…” दीदी कराह रही थी। “आह्ह… जोर से… हाँ… चोद…” मैं अपना लंड निकालकर हिला रहा था। गुस्सा भी आ रहा था, लेकिन सीन देखकर लंड और सख्त हो गया।
उसने अपना फोन निकाला और उनमें से एक को फोन पर दोनों को बुला लिया फिर मैंने सोचा कि एक बार भांजे को देख के आता हूं मैं जल्दी से भाग के गया और उसे एक बाउंसी कैसल में खेलने को छोड़ के ये बोल के वापस आ गया कि मैं जल्दी ही आ जाऊंगा मैं झाड़ियों के पीछे छिप गया सामने साफ़ दिख रहा था।
तीनों लड़कों ने मेरी बहन को एक बड़े पेड़ के तने से सटा रखा था। उसकी जींस और पैंटी घुटनों तक उतर चुकी थी। कुर्ती ऊपर उठी हुई थी, ब्रा एक तरफ़ खिसकी हुई। मम्मे बाहर निकले हुए थे, लाल और थोड़े से निशान वाले। सबसे हैंडसम वाला लड़का उसके पीछे खड़ा था।
उसने अपना लंड उसकी गांड की दरार पर रगड़ रहा था। थूक लगा-लगा के। “इतनी टाइट गांड… सााली पहले कभी गांड नहीं मरवाई न?” उसने पूछा। बहन ने दाँत भींच के कहा, “नहीं… मत डालो… दर्द होगा…” “दर्द होगा तो मज़ा भी आएगा रंडी।”
उसने एक झटके में आधा लंड गांड में धकेल दिया। “आआह्ह्ह… हरामज़ादे… निकाल… फट गई… आह्ह्ह…” वो जोर से चीखी। आवाज़ जंगल में गूँज गई। लड़का रुका नहीं। दोनों हाथ उसकी कमर पर रखकर और अंदर धकेलने लगा। “ले… पूरा अंदर जा रहा है… देख कितनी आसानी से निगल रही है तेरी गांड…” दूसरा लड़का सामने आ गया।
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उसने उसके बाल पकड़ के सिर पीछे खींचा और अपना लंड उसके मुँह में ठूस दिया। “चूस रंडी… अच्छे से। दाँत मत लगाना।” बहन की आँखों से आँसू आ गए थे, लेकिन मुँह खोल के लंड चूसने लगी। गटी-गटी आवाज़ें आने लगीं— “घप… घप… उक… उक…” तीसरा लड़का नीचे बैठ गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने उसकी चुत के होंठ फैलाए और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। “कितनी गीली हो रखी है साली… मेलें में उंगली लगते ही भीग गई थी न?” वो उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा और साथ में उसके क्लिट पर अंगूठा घुमाने लगा। बहन का शरीर काँप रहा था।
गांड में लंड, मुँह में लंड, चुत में उंगलियाँ। वो बीच-बीच में चीख रही थी— “आह्ह… बहुत जोर से… गांड फट रही है… धीरे करो सालो… आआह्ह…” थोड़ी देर बाद हैंडसम वाले ने कहा, “अब दोनों एक साथ डालते हैं गांड में।” दूसरे ने मुँह से लंड निकाला। “Didi Live Gangbang Sex”
दोनों ने उसके पीछे पोजीशन ली। एक ने पहले अपना लंड पूरा अंदर डाला, फिर दूसरे ने धीरे-धीरे साइड से धकेलना शुरू किया। “नहीं… एक साथ मत… रह नहीं पाऊँगी… आआाह्ह्ह… मादरचोद… निकल जाओ… दर्द… बहुत दर्द… आआह्ह…” दोनों लंड उसकी गांड में एक साथ धँसे हुए थे।
वो पेड़ का तना पकड़ के खड़ी थी, पैर काँप रहे थे। हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ बदल रही थी— कभी चीख, कभी कराह, कभी अधूरी गाली। “ले रंडी… दो लंड एक साथ निगल… तेरी गांड अब फैल गई है…” “आह्ह… चुप कर… चोदते रहो… बस निकाल मत… आआह्ह…” तीसरे ने नीचे से उठ के उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया।
अब तीनों छेद भरे हुए थे। गांड में दो, चुत में एक। बहन की आवाज़ अब लगभग टूट चुकी थी। वो बस रो रही थी और कराह रही थी— “बहुत… हो गया… अब नहीं… शरीर जल रहा है… आआह्ह… साले… रंडी बना दी… हर छेद में… आआह्ह…” तीनों बारी-बारी से और एक साथ ठोक रहे थे।
कभी गांड के दोनों लंड बाहर निकाल के फिर जोर से अंदर धकेल देते, कभी चुत वाले को और गहराई तक ले जाते। उसके मम्मे हाथों से मसले जा रहे थे, निप्पल कस के पिंच किए जा रहे थे। लगभग बीस मिनट तक यही चलता रहा। आखिर में पहले हैंडसम वाले ने उसकी गांड के अंदर ही पानी छोड़ दिया।
“ले… अंदर ले रंडी…” फिर दूसरे ने भी गांड में ही छोड़ दिया। तीसरे ने निकाला और उसके मुँह में ठूस के छोड़ दिया। बहन के मुँह से सफेद पानी और लार दोनों बह रहे थे। जब तीनों हटे तो वो पेड़ से सट के धीरे-धीरे जमीन पर बैठ गई। पैर फैलाए हुए, गांड और चुत दोनों से पानी रिस रहा था। “Didi Live Gangbang Sex”
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चलने की कोशिश की तो पैर काँपे और वो फिर गिर गई। “चल नहीं पा रही… साली पूरी फैल गई है,” एक लड़का हँस के बोला। वो बस भारी साँस ले रही थी। आँखें बंद किए हुए। शरीर पर पसीना और उनके छोड़े हुए पानी की चमक। मैंने पूरा वीडियो बना लिया था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
तब तक मेरा अपना लंड भी पूरी तरह तन चुका था। लेकिन मैं चुपचाप पीछे हट गया। बाकी की कहानी अगले भाग में बताउंगा अगर कोई बहन भाई मां बेटा अपनी बात शेयर करना चाहता है या कोई कपल हम दोनों भाई बहन के साथ चुदाई करना चाहता है तो वह monubhardwaj532@gmail.com पर बोल सकते हैं या कोई सुझाव भी.
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