आवारा लड़का और दीदी की चुदाई 1

Didi ki awara ladke se chudai kahani:- Dosto, ye ek bahut hi bold hindi sex story hai — 22 saal ki Menuka didi aur slum ke gundo Jai-Raghu ki kahani. Jo log sex story hindi me padhna pasand karte hain, unke liye ye kamuk kahani ek zabardast adult hindi story hai. Ye desi sex story hindi kahani ke deewanon ke liye likhi gayi hai, poori kahani end tak padhein.

दीदी – नाम मेनुका, 22 साल की एकदम खूबसूरत है। अभी कॉलेज में 2nd ईयर में है। रंग एकदम गोरा और फिगर 34-26-34 है। एकदम स्वर्ग से आई अप्सरा लगती है। दिखने में बहुत हॉट और गोरी इतनी कि जैसे कश्मीर की गोरी लड़कियां।

Didi ki awara ladke se chudai hindi sex kahani

मैं – मेरा नाम हर्ष है। साधारण सा लड़का हूँ। 18 साल का हूँ और अभी कॉलेज में 10 के पेपर दे के घर पे फ्री हूँ।

डैड – महेश कुमार एक कंपनी में एज अ मैनेजर की नौकरी करते हैं। उम्र 42 है।

मॉम – उम्र 35 है। खूबसूरत हैं। मेनुका दीदी इन्हीं पे गई हैं।

ये कहानी मेरी दीदी की किसी और से चुदाई के ऊपर बेस्ड होगी।

हमारे मोहल्ले का नाम है विश्वास नगर। हमारे मोहल्ले के पास एक ग्राउंड है जहाँ पर ज़्यादातर लोग क्रिकेट खेलते हैं आस-पास के मोहल्ले वाले। उसी खाली ग्राउंड के कुछ दूर जाके स्लम एरिया शुरू होता है। इस एरिया के लोग कुछ गुंडे टाइप के हैं, और पॉलिटिकल पावर वाले हैं।

मैं घर पे फ्री रहता था तो कभी उस ग्राउंड में जा के क्रिकेट खेल लिया करता था। एक दिन मैं उस ग्राउंड में क्रिकेट खेलने गया था। उस ग्राउंड के कुछ कोने पर कुछ लोग ताश (cards) खेल रहे थे। कुछ समय बाद उनमें किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। वो कुछ तीन लोग थे। फिर उनमें से दो लोगों ने मिलकर एक को मारना शुरू कर दिया।

वो हमसे कुछ दूर थे तो हमें नहीं पता था वो किस लिए उसको मार रहे थे, और वो लोग उम्र में हमसे कुछ बड़े और गुंडे टाइप के लग रहे थे तो किसी ने उनके लफड़े में पड़ने का ना सोचा। कुछ देर बाद वो एक बंदा जिसने मार खाई थी वहाँ से चला गया and बाकी के दो लोग वहीं बैठ के बीड़ी पीने लगे (smoking) करने लगे।

कुछ देर बाद वो एक बंदा (जिसने मार खाई थी) अपने साथ दो लड़के लेकर आया। दोनों लड़के उम्र में 22-23 साल के लग रहे थे। फिट शरीर के एकदम काले थे। उन दोनों के हाथ में बैट और हॉकी स्टिक्स थीं। उन्होंने आते ही पहले वाले दोनों लोगों पर अटैक करना शुरू कर दिया। कुछ देर मारने के बाद पहले वाले दोनों बंदे वहाँ से भाग गए।

तब तक हमने भी खेलना बंद कर दिया था। मुझे अपने साथ वाले एक फ्रेंड से पता चला कि दोनों साथ के स्लम एरिया से हैं, एक का नाम है जय और दूसरे का नाम रघु। दोनों ही लड़ाई और झगड़े के लिए मशहूर थे और सुना था कि बहुत सी सुंदर लड़कियां पटा के चोदना इनका काम था। दोनों बहुत सी लड़कियों को अपने जाल में फंसाते थे और फिर साथ में चुदाई भी करते थे उसके साथ। दोनों ही दिखने में एकदम काले और हबशी जैसे दिखते थे।

कुछ देर और वहाँ बैठने के बाद मैं घर आ गया। करीब 12:30 को मैं घर आया खाना खाने, घर में सिर्फ मम्मी ही थीं। पापा ऑफिस गए थे और दीदी कॉलेज गई थीं। वो कॉलेज से करीब 2 बजे आती थीं। वो एक्टिवा से कॉलेज जाती थीं। उस दिन ज़्यादा कुछ और खास हुआ नहीं।

अगले दिन मैं जब ग्राउंड पे खेलने गया तो वो कल वाले लड़के (जय और रघु) मुझे ग्राउंड पर मेरे दोस्तों के साथ दिखे। मैं जब उनके नज़दीक पहुंचा तो मुझे पता चला कि वो मेरे बाकी दोस्तों से उन्हें भी हमारे साथ खिलाने की बात कर रहे थे। हम बहुत कम लोग खेलते थे तो हमने उनको ok बोल दिया।

वो हमारे साथ खेल रहे थे तो बीच-बीच में बहुत गाली-गलौच भी कर रहे थे। उनकी पावर और उम्र हमसे कहीं ज़्यादा थी तो हम उनको कुछ नहीं बोल पा रहे थे। उस दिन खेलने के बाद वो लोग हमारे साथ बात करने लगे कि हम लोग कहाँ से आते हैं, घर कहाँ है etc। कुछ देर बाद जब सब अपने-अपने घर जाने को हुए तो उन्होंने मुझे पूछा।

रघु: ओ हर्ष तू विश्वास नगर में रहता है ना।

मैं: हाँ भाई (वो मुझसे बड़े थे तो मैं उन्हें भाई ही बुलाने लगा था)।

रघु: अच्छा चल बैठ हम वहीं जा रहे हैं तुझे छोड़ देते हैं।

मैं: नहीं भाई इसकी कोई ज़रूरत नहीं मैं चला जाऊंगा।

रघु: चल बैठ जा साले इतना भाव तो कोई लड़की भी नहीं खाती, वहीं जा रहे हैं छोड़ देते हैं (ये उन्होंने बिल्कुल शांत स्वभाव में कहा था, but मुझे पता था इन्हें गुस्सा दिलाना मेरे लिए ही खतरा है तो मैं उनके साथ बैठ गया)।

पहले जय बैठा फिर मैं और फिर रघु मेरे पीछे। रास्ते भर वो कोई ना कोई लड़की को देख के उसके बारे में गलत कमेंट करते हुए जा रहे थे, like उनके boobs के बारे में या गांड के बारे में etc। थोड़ी देर बाद मेरा घर आ गया। मैं बीच में बैठा था तो पहले रघु उतरा फिर मैं उतरा जय अभी भी बाइक पे ही बैठा था। फिर मैंने उनको byy बोला और घर के अंदर चला गया।

मैं डायरेक्ट अपने रूम में गया। मेरे रूम में एक खिड़की है। उस खिड़की के थ्रू मेरे को एक आवाज़ आई। वो आवाज़ स्कूटी की थी। जब मैंने खिड़की से बाहर देखा तो वो मेरी दीदी की स्कूटी की आवाज़ थी। वो आज जल्दी घर आ गई थीं।

जब मैंने बाहर देखा तो पाया कि रघु और जय अभी भी बाहर खड़े थे और जैसे ही मेरी दीदी की स्कूटी रुकी और दीदी उतरीं वो तो जैसे सपने में ही चले गए। उन्होंने आज तक इतनी गोरी सुंदर और इतने मस्त फिगर वाली लड़की देखी भी नहीं होगी। उस टाइम दीदी ने टाइट जींस और ब्लू टॉप पहना हुआ था। टाइट टॉप में उनके दो दूध बिल्कुल शेप में थे और टाइट जींस में गांड और भी सुंदर लग रही थी। अभी तो वो स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं।

उन्हें इस टाइम देख के तो किसी बुढ़े का लंड भी खड़ा हो के पानी छोड़ दे। अभी जय और रघु मेरी खूबसूरत दीदी को घूरे जा रहे थे और रघु ने तो एक बार अपना लंड भी मसल दिया था। उसके बाद दीदी घर के अंदर आ गईं। कुछ देर आपस में बात करने के बाद वो दोनों भी चले गए।

कुछ देर बाद मम्मी ने भी मुझे खाने के लिए बुला लिया। जब मैं खाना खाने गया तो दीदी भी वहीं थीं। और आज वो सच में एक सेक्स बॉम्ब लग रही थीं। फेस से तो वो बिल्कुल इनोसेंट थीं और फिगर तो उनका माशाल्लाह बॉम्ब था। कुछ समय हल्की-फुल्की बात करने के बाद दीदी चली गईं अपने कमरे में और मैं भी खाना खाने के बाद अपने कमरे में आ गया।

अगले दिन जब मैं खेलने गया तो सब नॉर्मल था but इस बार रघु और जय मुझसे कुछ ज़्यादा ही फ्रेंडली बात कर रहे थे। वो मुझसे बहुत नरमी से बात कर रहे थे और प्यार से भी। लेकिन वो मुझे तू कह के ही बुला रहे थे and बाकियों से वैसे ही बात कर रहे थे (थोड़ा रफ and गाली देकर)।

कुछ देर खेलने के बाद उन्होंने मुझे फिर से घर छोड़ने के लिए लिफ्ट देने की बात की। मैं कर भी क्या सकता था तो मैं मान गया and वो मुझे घर छोड़ने आए। तब करीब 1:30 बज रहे थे। उन्होंने मुझे ड्रॉप किया and मैं घर के अंदर चला गया।

जब मैं अपने कमरे में गया तो मैंने ऐसे ही अपनी खिड़की से बाहर देखा तो पाया कि वो दोनों अभी भी मेरे घर के बाहर कुछ दूर खड़े हैं। मुझे शक हुआ कि ये मेरी दीदी को देखने के लिए ही खड़े हैं। but दीदी नहीं आईं तो वो कुछ देर रुके, फिर बाइक स्टार्ट करके वहाँ से चले गए।

मुझे लगा वो चले गए but वो हमारे मोहल्ले में बाइक लेकर घूमने लगे, और कुछ देर बाद वहीं आकर रुक गए (मेरे घर सामने)। अब 2 बज गए थे और मेरी दीदी के आने का टाइम भी हो गया था। कुछ देर बाद एक्टिवा के हॉर्न की आवाज़ आई और मेरी दीदी भी आ गईं। जय और रघु तब बहुत खुश लग रहे थे।

दीदी ने आज सलवार सूट पहना था वो भी फिटिंग वाला। दीदी के बॉडी के कसाव इतने मस्त लग रहे थे जैसे वो सलवार सूट उन्हीं के लिए बना हो। सूट की फिटिंग इतनी टाइट कि मम्मों के शेप का पूरा पता चल जाए, उसके नीचे फ्लैट पेट और उभरी हुई गांड किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए काफी थी। वो लाल रंग के सलवार सूट में एकदम अप्सरा लग रही थीं। वो स्कूटी से उतरीं और घर के अंदर आ गईं।

जब वो घर के अंदर की ओर आ रही थीं तो उनकी पीठ जय और रघु की तरफ थी। वो मेरी मासूम सी दीदी के मस्त गांड के हिलन को देखने लगे और आपस में कुछ बात की, अपनी घड़ी में टाइम देखा आगे चले गए।

अगले दिन जब मैं खेलने गया तो वो दोनों नहीं आए थे, मुझे थोड़ा शक हुआ, कुछ देर खेलने के बाद मैं घर चला गया। आज मैं जल्दी घर आया था। कुछ देर खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया। मुझे अंदर ही अंदर पता था कि वो आज भी मेरी दीदी को देखने ज़रूर आएंगे so मैं अपनी दीदी के आने का इंतज़ार करने लगा।

जब मेरी दीदी के आने का टाइम हुआ तो मैं खिड़की से देखने लगा, कुछ देर बाद दीदी भी आ गईं एक्टिवा से अपनी और कुछ देर बाद बाइक से वो दोनों भी उनके पीछे से आए और आगे चले गए। दीदी घर के अंदर आईं, खाना खाया और अपने कमरे में चली गईं। अगले दिन भी same ही हुआ।

मैंने जितना सुना था उनके बारे में कि वो मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाके उनका फायदा उठाते हैं और मिलकर उनके साथ सेक्स करते हैं, बहुत बुरी तरह चोदते हैं दोनों मिलकर। हमारे पास के मोहल्ले की एक लड़की जो अभी कॉलेज में ही उनके जाल में फंसी थी, उसको उन्होंने प्यार के जाल में फंसाकर उसका वीडियो भी बनाया था और उसको कई लड़कों से भी चुदवाया था। बड़ी मुश्किल से वो लड़की उनके चंगुल से बच पाई थी, वो भी उसकी फैमिली ने जब उसको यहाँ से दूर पढ़ाई के लिए भेज दिया और फिर उसकी शादी करवा दी।

अब बैक टू प्रेजेंट।

अगले दिन मैं जल्दी उठा बस ये जानने के लिए कि वो दोनों सिर्फ मेरी दीदी के पीछे दोपहर को ही आते हैं या सुबह भी पीछा करते हैं, तो मैं सुबह उठा और दीदी के जाने के टाइम अपने रूम की खिड़की के बाहर देखा तो कोई नहीं था। मुझे लगा वो दोनों सिर्फ शाम को ही पीछा करते होंगे but मैं गलत साबित हुआ जब दीदी घर से बाहर अपनी एक्टिवा लेकर निकलीं तो कुछ देर बाद वो भी उनको फॉलो करने लगे।

मुझे अब तक तो पता चल गया था कि ये मेरी दीदी को पटाने की सोच रहे हैं, और मैं ये नहीं चाहता था but मैं मजबूर था क्योंकि मेरे में इतना दम नहीं था कि मैं उनको रोक सकूँ या उनपे ये इल्ज़ाम लगा सकूँ कि वो मेरी दीदी को छेड़ रहे हैं (क्योंकि वो मेरी दीदी को छेड़ नहीं रहे थे बस फॉलो कर रहे थे), या फिर मैं उन्हें मना कर सकूँ क्योंकि वो मेरे से और मेरी फैमिली से बहुत पावरफुल लोग हैं, उनके पास पॉलिटिकल पावर है और हमारे पास कुछ भी नहीं है वैसा।

उस दिन मैं खेलने नहीं गया और घर पर ही बैठा रहा, जब दीदी के घर आने का टाइम हुआ तो मैं फिर खिड़की के पास जाके देखने लगा। आज भी same हुआ, दीदी आईं और उनके पीछे वो भी फॉलो करते हुए आए (शायद दीदी को पता ना हो या वो इग्नोर करती हों क्योंकि लड़कियों के लिए ये आम बात होती है)।

फिर मैंने सोचा क्यों ना कल से मैं भी इन्हें फॉलो करूँ तो मैं इनका प्लान पता कर सकूँ और अपनी प्यारी और भोली दीदी को बचा सकूँ इन कमीनों से। अपने प्लान को अंजाम देने के लिए मुझे चाहिए थी एक vehicle, so मैं अपने एक दोस्त के पास गया वो नज़दीक में ही pg लेकर रहता था और उसके पास एक बाइक भी थी, मेरी उससे जान-पहचान क्रिकेट खेलते हुए ही हुई थी और जान-पहचान भी बहुत अच्छी हो गई थी तो मैं उसके पास गया और बोला भाई मुझे तेरी बाइक और हेलमेट कुछ दिनों के लिए सुबह के टाइम चाहिए, तो उसने मुझे ok कह दिया। फिर मैं अगले दिन का इंतज़ार करने लगा क्योंकि मुझे अगले दिन से जासूसी करनी थी।

अगले दिन मैं दीदी के कॉलेज निकलने के कुछ 10 min. पहले निकल गया और घर से कुछ चौक तक आकर रुक गया। मैंने घर पे पहले ही बोल दिया था कि मैं खेलने जा रहा हूँ और मुझे कुछ टाइम लगेगा आने में। कुछ देर बाद दीदी भी घर से अपनी एक्टिवा पे निकलीं और within a minute में उन्होंने मुझे क्रॉस किया (वो मुझे नहीं देख पाईं क्योंकि मैंने हेलमेट पहन रखा था), और उसके ठीक बाद वो दोनों भी बाइक से निकले, मैं भी उनका पीछा करने लगा कि ये लोग कहाँ तक पीछा करते हैं मेरी दीदी का।

कुछ देर बाद दीदी का कॉलेज आ गया और दीदी कॉलेज के गेट से अंदर चली गईं। (यहाँ मैं बता दूँ कि दीदी का कॉलेज बहुत बड़ा था और वहाँ 3 से 4 गेट थे एंटर होने के लिए और कोई ज़्यादा चेकिंग नहीं थी एंट्री के टाइम)। दीदी के अंदर जाते ही रघु और जय कॉलेज के गेट से ही मुड़ गए और मैं भी मुड़ गया। उसके बाद मैं जिसकी बाइक थी उसको बाइक वापस देकर अपने घर आ गया। बाकी कुछ खास नहीं हुआ उस दिन।

अगले दिन भी मैं तैयार था और same पिछले दिन की तरह मैं पहले ही दीदी के निकलने से पहले निकल गया घर से और वही चौक पे जाकर रुक गया। आज भी दीदी आईं और कुछ देर बाद वो भी आए but आज वो दो ना होके तीन थे, मुझे कुछ अजीब लगा, मैंने सोचा ये क्या करना चाहते हैं जो आज तीन आए हैं।

फिर मैंने भी उनका पीछा करना शुरू किया। जब दीदी कॉलेज पहुंचके गेट के अंदर दाखिल हुईं तो वो तीनों वहीं बाहर रुक गए। जब मैंने ध्यान से देखा तो मुझे पता चला कि ये तीसरा तो वो लड़का है जिसका उस दिन पार्क में झगड़ा हो गया था और उसके बाद ये ही रघु और जय को बुलाके लाया था। ये लड़का भी कोई 21-22 साल का होगा। फाइट करने। पर ये यहाँ क्या कर रहा है मुझे नहीं पता लग रहा था।

उनमें कुछ बात हुई, उन्होंने घड़ी में टाइम देखा और कॉलेज के गेट के आगे वाली सिंगल रोड की तरफ इशारा किया। उस तीसरे लड़के ने हाँ में जवाब दिया और वो तीनों फिर चले गए। मैंने भी घर जाने की सोची और रास्ते भर सोचता रहा कि वो क्या प्लान कर रहे होंगे, पर मुझे पता नहीं चल रहा था, तो जब मैं घर आया तो पता चला शायद वो मेरी दीदी के घर आने के टाइम कुछ बड़ा करने की सोच रहे हों तो मैंने पता लगाने के लिए मेरी दीदी के कॉलेज खत्म होने के टाइम वहाँ जाकर पता लगाने का सोचा।

मेरी दीदी के कॉलेज खत्म होने के कुछ टाइम पहले मैं वहाँ पहुंच गया और सामने की गली में छिपकर सब देखने लगा। कुछ टाइम बाद रघु और जय बाइक पे आए थे, वो तीसरा बंदा भी उनके साथ आया था but अपनी बाइक लेकर। थोड़ी देर बाद दीदी के कॉलेज की छुट्टी हुई और वो बाहर अपनी एक्टिवा से आईं और घर की ओर चल दीं।

कुछ दूर जाकर हमारे घर जाने के लिए एक सिंगल हाइवे टाइप रोड जाती है, वहाँ पर ज़्यादातर लॉन्ग रूट वाले ट्रक ही चलते हैं और दोपहर को वो रोड सुनसान सी ही होती है। जब दीदी उस रोड पर जा रही थीं तो वो लड़का और जय वहाँ से दीदी के बिल्कुल बगल से ओवरटेक करते हुए चले गए जिससे मेरी दीदी का बैलेंस बिगड़ा और वो रोड पर एक्टिवा के साथ गिर गईं, उन्हें थोड़ी चोट भी आई (हाथ और पैर थोड़े छिल गए थे) पर बच गईं मेरी दीदी।

मैं उनकी हेल्प करने जा ही रहा था कि मैंने देखा रघु वहाँ पहुंचा, अपनी बाइक रोकी और मेरी दीदी को उठाया और स्कूटी भी उठाई और साइड में स्टैंड लगाके खड़ी कर दी। मैं भी उनके पास जाना चाहता था हेल्प के लिए but क्या कहता कि मैं इस टाइम यहाँ क्या कर रहा हूँ so मैं नहीं गया, उधर उसने दीदी को उठाया और कुछ पूछा।

मैं बहुत दूर खड़ा था तो मुझे उनकी बात सुनाई नहीं दे रही थी so मैं वहीं खड़ा होकर उस काले हबशी जैसे को मेरी परी सी दीदी से बात करता हुआ देखता रहा। कुछ देर बाद उसने अपनी बाइक से फर्स्ट एड निकाला और दीदी की मरहम-पट्टी की। उसके बाद उनकी हल्की-फुल्की बात हुई।

फिर उसके बाद दीदी अपनी एक्टिवा के पास आईं तो देखा कि एक्टिवा के नीचे ऑयल लीकेज कर रहा है और वो परेशान हो गईं। उसके बाद रघु ने शायद उनको घर छोड़ने की बात कही पर दीदी ने मना करके अपनी स्कूटी की तरफ इशारा किया तो उसने अपनी बाइक कुछ देर वहीं झाड़ी के पीछे खड़ी की और किसी को फोन किया, कुछ देर बात की, फिर दीदी की स्कूटी को घसीटता हुआ दीदी के साथ चलने लगा।

मैं भी उनके पीछे जाना चाहता था but वो मुझे देख लेते so मैं वहीं झाड़ियों के पीछे लुका रहा, वो कुछ देर में बहुत आगे चले गए। कुछ देर बाद जय और वो लड़का वापस आए, उन्हें देखकर मैं फिर से झाड़ी के पीछे छुप गया, वो आए और जय ने एक चाबी अपनी जेब से निकाली (जो शायद बाइक की डुप्लीकेट चाबी थी), और बाइक चलाके उस लड़के के साथ निकल गया।

मैं भी फिर उस दिशा की ओर बाइक लेके slowly चल पड़ा जिस ओर रघु और मेनुका दीदी गए थे। मैं भी फिर उस दिशा की ओर बाइक लेके slowly चल पड़ा जिस ओर रघु और मेनुका दीदी गए थे। आगे जाके एक ढाबा दिखाई दिया मुझे, उसके पास एक मैकेनिक भी था जो हाइवे की गाड़ियां ठीक करता था।

मैंने मेनुका दीदी की स्कूटी वहीं खड़ी देखी but दीदी और रघु कहीं नहीं दिख रहे थे। मैं भी उस ढाबे की ओर चल पड़ा। मैंने अपनी बाइक कुछ दूर एक ट्रक के पीछे खड़ी करी (ये हाइवे का ढाबा था so वहाँ पे ट्रक खड़े होना लाज़मी था)। मैं उसी ट्रक के पीछे से दीदी और रघु को खोजने लगा।

कुछ देर बाद वो ढाबे से आते दिखे और मैकेनिक से बात करने लगे, शायद वो ढाबे में बैठने चले गए होंगे थोड़ी देर। मैकेनिक से बात करने के बाद दीदी और रघु में थोड़ी और बात हुई and जब वो बात कर रहे थे तो दीदी भी हंस-हंस के जवाब दे रही थीं। कुछ देर बाद स्कूटी ठीक हुई। रघु ने दीदी से पेमेंट ना करवाके खुद पेमेंट की और उसके बाद फिर उनमें कुछ देर बात हुई और रघु आगे बैठा और दीदी उसके पीछे बैठ गईं and वो स्कूटी चलाने लगा।

मैं भी उनका पीछा करने लगा। वो स्कूटी बहुत धीरे चला रहा था and बार-बार ब्रेक भी लगा रहा था, शायद ऐसा करके वो मेरी sister के नरम चूचों का मज़ा ले रहा था। ये देखकर मुझे बहुत गुस्सा भी आया but मैं लाचार था।

हमारे घर आने के कुछ देर बाद मैंने देखा रघु ने स्कूटी रोकी और उतर गया and फिर दीदी से हल्की-फुल्की बात करने लगा और अपना मोबाइल निकाला and कुछ नोट करने लगा (maybe मेरी दीदी से नंबर मांग लिया हो and इतनी हेल्प की है तो दीदी ने उससे नंबर दे भी दिया और दीदी इतनी भोली कि उनको पता ही नहीं कि वो उन्हें अपने जाल में फंसा रहा है और उनके जिस्म का मज़ा लेना चाहता है, उनकी चुदाई करना चाहता है)। फिर दीदी घर चली गईं और रघु स्लम एरिया अपने गंदे घर की ओर चला गया। मैं भी दीदी के पीछे घर आ गया।

घर पहुंचके मैं अपने रूम में जाके आज के पूरे सीन के बारे में सोचने लगा, इतना तो मुझे पता था कि अगर उसने no. लिया है तो msg या call तो करेगा और मैं उनकी सारी बातें सुनना और जानना चाहता था। तो शाम को करीब 8 बजे मैं अपने रूम से निकला तो दीदी अभी लिविंग रूम में tv देख रही थीं so मैं उनके पास जाकर बैठ गया। और बात करने लगा।

दीदी : और भाई कैसे चल रहे हैं vacations?

मैं : एकदम मस्त दीदी आप बताओ कॉलेज कैसा चल रहा है?

दीदी : बिल्कुल बढ़िया।

मैं : दीदी ये हाथ पे चोट कैसी लगी?

दीदी : वो कुछ नहीं, आज पार्किंग से स्कूटी निकालते वक्त स्कूटी का बैलेंस बिगड़ा और स्कूटी गिर गई and उसका ऑयल भी लीकेज होने लगा था but मैंने वो रिपेयर करवा दिया। और चोट भी कोई ज़्यादा नहीं लगी। (दीदी मुझसे झूठ बोल रही थीं शायद इसलिए कि कहीं घर में टेंशन ना हो।)

फिर हमने इधर-उधर की बात करी फिर मम्मी ने दीदी को किचन में हेल्प के लिए बुला लिया। दीदी के जाते ही मैंने उनका फोन सोफे पे पाया और ओपन किया। दीदी का फोन वैसे फिंगरप्रिंट था और उसमें 5 fingers के प्रिंट लगा सकते थे and बहुत पहले मैंने दीदी का एक फिंगरप्रिंट हटाके अपना लगा दिया था, so मैंने फोन ओपन किया तो सबसे पहले WhatsApp चेक किया।

वहाँ पे मैंने आज आए सारे मैसेज देखे तो उनमें से कुछ दीदी की फ्रेंड्स के थे but एक no. दीदी ने सिर्फ R करके सेव किया तो मैंने देखा उसमें लिखा था – Hi, mai wahi hu jisne aapki madad ki thi pehchana। उसके बाद दीदी का भी reply था – yes aapko kaise bhul sakti hu, and thanx again for everything, aap na hote to aaj mujhe bahut pareshani hoti।

बस इतना ही मैसेज थे तो मैंने सोचा रघु शायद slow slow शुरुआत करेगा and उसके बाद मैंने दीदी के मोबाइल में कॉल रिकॉर्डिंग डाउनलोड कर दिया and उसका नोटिफिकेशन बंद करके उसको हाइड कर दिया। फिर दीदी आने वाली थीं तो मैंने मोबाइल बंद करके वहीं रख दिया जहाँ से उठाया था।

Dosto, kahani abhi jaari hai — agle part me dekhiye Raghu didi ko apne jaal me kaise fansata hai. Aisi hi aur kamuk kahani aur didi sex story ke liye bane rahiye.

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